राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच एसआईटी कर रही है। 6 दिनों से चल रही जांच की रिपोर्ट लेकर आज एसआईटी लखनऊ पहुंचेगी और सीएम योगी के सामने अब तक की जांच रिपोर्ट पेश करेगी।लेकिन एसआईटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ठोस साक्ष्य जुटाने की है। जांच में सामने आया है कि मंदिर परिसर के सीसीटीवी कैमरों का बैकअप केवल 45 दिनों तक ही उपलब्ध रहता है। यानी कि 45 दिन से पुरानी फुटेज डिलीट हो जाती थीं, ऐसे में कई सालों की फुटेज हासिल करना संभव नहीं है, जिसके कारण चोरी होने की शुरुआत का सटीक पता लगाना मुश्किल हो गया है।

चंपत राय की भूमिका पर उठे सवाल
SIT ने चंपत राय और ट्रस्ट के अन्य अधिकारियों से लगातार पूछताछ की, जिसमें कई बड़े खुलासे हुए।राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कुछ स्थानीय लोगों ने ट्रस्ट पर मंदिर की कीमती प्राचीन और ऐतिहासिक शिलाएं गायब होने का भी आरोप लगाया है।साथ ही एसआईटी को चरण पादुका और हीरे जड़ित हार भी नहीं मिला जिसके बाद चंपत राय की भूमिका पर सवाल उठ रहे है। कई बड़ी अनिमितताएं सामने आने के बाद, चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र पर एक्शन लगभग तय माना जा रहा है। उन्हें ट्रस्ट से हटाने की संभावनाओं पर भी विचार चल रहा है।इसके पहले अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रमों से भी चंपत राय को स्पष्ट रूप से दूरी रखने को कहा गया था।

जांच के दौरान सीसीटीवी से छेड़छाड़
मंदिर परिसर के सीसीटीवी कैमरों का बैकअप केवल 45 दिनों तक ही उपलब्ध रहता है, ऐसे में पिछले डेढ़ महीने के भीतर फुटेज में कोई हेरफेर हुआ है, तो उसके तकनीकी साक्ष्य सामने आने की संभावना है। एसआईटी संदिग्ध कर्मचारियों, पदाधिकारियों और पहले पकड़े गए आरोपियों के बयानों का मिलान कर रही है। पूछताछ में और बयानों में कई विरोधाभास सामने आए हैं, जिन्हें जांच का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।

सीएम योगी का सख्त रुख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या दौरे के दौरान राम मंदिर मामले में स्पष्ट रूप से कहा कि- एसआईटी जांच से 15 दिनों के भीतर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा सीएम योगी ने इस मामले को लेकर राजनीति कर रहे विपक्षी दलों पर भी जमकर निशाना साधा और श्रद्धालुओं से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की करोड़ों राम भक्तों को संबोधित करते हुए उन्होंने अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें और अयोध्या या राम मंदिर को बदनाम करने वाली राजनीतिक साज़िशों के बहकावे में न आएं।




