नई दिल्ली: विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देश भर के युवाओं से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत की. इस दौरान पीएम मोदी ने युवाओं के सुझाव सुने और भारत की पारंपरिक सामुदायिक भावना पर जोर दिया. संवाद के दौरान युवाओं ने भी प्रधानमंत्री को भरोसा दिलाया कि वे विकसित भारत के सपने को साकार करने में अपना पूरा योगदान देंगे.
‘MY Bharat’ प्लेटफॉर्म में युवाओं का योगदान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने इस आयोजन को बेहद खास बताया. इस संवाद में देश के लगभग 250 जिलों से आए युवाओं ने हिस्सा लिया. पीएम ने कहा- कुछ समय पूर्व शुरू किया गया मेरा युवा भारत (MY Bharat) प्लेटफॉर्म आज करोड़ों युवाओं को जोड़ चुका है और इसके वॉलंटियर्स देशभर में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं. पीएम मोदी ने आगे कहा कि युवाओं को सिर्फ डिजिटल या वर्चुअल माध्यमों तक सीमित न रहकर ज़मीनी हकीकत से जुड़ना चाहिए. जब युवा सीमावर्ती और दूरदराज़ के गांवों में जाते हैं, तभी उन्हें वहां के लोगों की आकांक्षाओं और देश की वास्तविक विकास यात्रा का अनुभव होता है.
युवाओं ने बताई Gen-Z की परिभाषा
कार्यक्रम के दौरान MY Bharat वॉलंटियर दिव्यांशु जोशी ने Gen-Z की एक नई और प्रेरणादायक परिभाषा बताई.. उन्होंने प्रधानमंत्री को विश्वास दिलाते हुए कहा कि विकसित भारत का जो संकल्प आपने लिया है, उसे पूरा करने के लिए युवा पीढ़ी पूरी तरह प्रतिबद्ध है. इस दौरान दिव्यांशु ने Gen-Z का मतलब बताया. उनके मुताबिक Gen- G मतलब:
G – Generation of Character: चरित्र निर्माण
N – Nation First: राष्ट्र-निर्माण और देश प्रथम की भावना
Z – Zeal for Innovation & Service: नवाचार (इनोवेशन) और सेवा भाव. युवाओं ने यह भी जानकारी दी कि सीमावर्ती गांवों के अपने दौरों के अनुभवों को इकट्ठा कर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंपेंगे.
क्या है विकसित गांव प्रोग्राम?
‘विकसित गांव प्रोग्राम’ की परिकल्पना प्रधानमंत्री मोदी के उस विचार पर आधारित है, जिसके तहत देश के सीमावर्ती गांवों को अंतिम नहीं, बल्कि देश का पहला गांव माना जाता है. इस कार्यक्रम का आयोजन 4 जून से 30 जून 2026 के बीच दो चरणों में किया गया. लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लगभग 74 वाइब्रेंट विलेज इसमें शामिल थे. देशभर के 3 लाख से अधिक युवाओं ने एक राष्ट्रीय ऑनलाइन क्विज़ में भाग लिया, जिनमें से 400 से अधिक मेधावी युवाओं का चयन इस यात्रा के लिए किया गया. इन युवाओं ने सीमावर्ती क्षेत्रों में रहकर स्वच्छता अभियान, मिनी मॉडल पंचायत, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, वृक्षारोपण और स्थानीय कारीगरों के साथ संवाद जैसी विविध गतिविधियों में भाग लिया. इस पहल से युवाओं को देश की रणनीतिक सीमाओं, सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय विकास मॉडल को करीब से समझने का अवसर मिला.




