सिंधुदुर्ग (देवगड): कोंकण की हसीन वादियों और समुद्री तटों के बारे में तो आपने बहुत सुना होगा, लेकिन यहां की पहाड़ियों में एक ऐसा दिव्य और रहस्यमयी मंदिर छिपा है, जहां प्रकृति खुद 12 महीने भगवान गणेश का अभिषेक करती है. सिंधुदुर्ग जिले के देवगड में स्थित पोखरबाव श्री सिद्धिविनायक मंदिर न सिर्फ अपने चमत्कार के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां का वातावरण आपको आत्मिक शांति भी प्रदान करता है. यह जगह किसी फिल्म के सेट जैसी दिखाई पड़ती है, लेकिन इसकी हकीकत और आध्यात्मिक ऊर्जा रोंगटे खड़े कर देने वाली है.
क्या है ‘पोखरबाव’ का अर्थ?
स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस पवित्र स्थान का नाम पोखरबाव दो शब्दों से मिलकर बना है. पोखर का मतलब पहाड़ी पर स्थित प्राकृतिक गुफा और बाव का अर्थ नीचे स्थित पवित्र जलकुंड है. यहां की पहाड़ियों को चीरकर निकलने वाला झरना सदियों से बह रहा है. झरने की अविरल धारा सीधे मंदिर में विराजमान बप्पा की मूर्ति पर गिरती है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति स्वयं बप्पा का जलाभिषेक कर रही हो.
पानी के नीचे छिपा है महादेव का चमत्कार
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता और रहस्य बप्पा की प्रतिमा के ठीक नीचे है. मंदिर के गर्भगृह के पास बहते हुए झरने के जलकुंड में ओंकारेश्वर महादेव का एक प्राचीन पंचमुखी शिवलिंग स्थापित है. मंदिर से जुड़ी एक प्रचलित मान्यता है कि वर्षों पूर्व यहां के पुजारी को महादेव ने स्वप्न में दर्शन दिए थे. इसी दैवीय संकेत के बाद, पानी के गहरे कुंड से इस पंचमुखी शिवलिंग को खोजा गया. आज भी श्रद्धालु इस शिवलिंग के दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं.
यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त समय
यूं तो पोखरबाव में सालभर जलधारा बहती रहती है, लेकिन मानसून के बाद यानी सितंबर से दिसंबर के बीच का समय इस स्थान की यात्रा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है. इस दौरान चारों ओर फैली हरियाली और पहाड़ों से गिरते झरने स्वर्ग जैसा अहसास कराते हैं.
कैसे पहुंचें?
यदि आप भी कोंकण की इस रहस्यमयी और शांत जगह का अनुभव करना चाहते हैं, तो देवगड का रुख करें. यह पावन धाम प्रसिद्ध कुणकेश्वर मंदिर से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. प्रकृति और आध्यात्मिकता के इस अद्भुत संगम को देखने का अनुभव आपके जीवन की यादगार यात्राओं में से एक होगा.



