विश्व प्रसिद्ध उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर में एक ऐसा दिव्य धाम स्थित है, जिसके कपाट साल में केवल एक बार खोलते हैं. महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर विराजमान श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट सिर्फ नागपंचमी के पावन अवसर पर 24 घंटे के लिए श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं.
364 दिन बंद रहने का पौराणिक कारण
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नागराज तक्षक ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी. जब भोलेनाथ ने उनसे वरदान मांगने को कहा, तो तक्षक ने एकांत में निर्विघ्न शिव-साधना करने का स्थान मांगा. भगवान शिव ने उन्हें महाकाल परिसर में यह स्थान प्रदान किया. तक्षक नाग की इस साधना में कोई बाधा न आए, इसी परंपरा का पालन करते हुए मंदिर के कपाट साल के 364 दिन बंद रखे जाते हैं और केवल नागपंचमी पर खोले जाते हैं.
मूर्ति की अलौकिक और दुर्लभ कलाकृति
नागचंद्रेश्वर मंदिर में स्थापित प्रतिमा अत्यंत दुर्लभ और अद्भुत है. आमतौर पर भगवान विष्णु शेषनाग पर विराजमान दिखते हैं, लेकिन यहां महादेव, माता पार्वती और भगवान गणेश सात फनों वाले नाग के छत्र तले आसीन हैं. प्रतिमा में शिवजी के गले और भुजाओं में सर्प लिपटे हुए हैं. साथ ही नंदी और सिंह की आकृतियां भी उकेरी गई हैं. ऐसा माना जाता है कि यह दुर्लभ प्रतिमा नेपाल से लाई गई थी.
दर्शन का धार्मिक महत्व
नागपंचमी पर भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों भक्त उज्जैन पहुंचते हैं. मान्यता है कि इस दिव्य प्रतिमा के दर्शन मात्र से जातकों की कुंडली से कालसर्प दोष और पितृ दोष का पूर्ण निवारण हो जाता है.




