बिहार में भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर मामले के विरोध में भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में महापंचायत का आयोजन किया गया। जिसमें बिहार के अलावा दूसरे कई राज्यों के लोग भी शामिल होने पहुंचे। भरत तिवारी के गांव बिलौटी में बड़ी संख्या में लोग महापंचायत के लिए जुटे। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी पहुंचकर समर्थन दिया और कई गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने भरत तिवारी के परिवार से मुलाकात की, साथ ही उन्होंने इस मामले में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार को निशाने पर लिया है और कहा है कि गृह विभाग की भूमिका की जांच बहुत जरूरी है।

महापंचायत में सरकार और प्रशासन को अल्टीमेटम
इससे पहले भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में महापंचायत के दौरान सरकार और प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया गया। यदि सात दिनों के भीतर मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला, तो उन्हें मजबूरन व्यापक जन आंदोलन शुरू करना पड़ेगा।

दवाब बढ़ने पर पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई
भरत तिवारी की मौत के बाद सिर्फ परिजन ही नहीं पुरा गांव सड़क पर आ गया, मामले ने जब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तूल पकड़ा तो प्रशासन को भी कदम उठाना पड़ा। घटना के तीन दिन बाद शाहपुर थाना अध्यक्ष समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की कार्रवाई की, इसके साथ ही भरत की मां आशा देवी के आवेदन पर संबंधित एसडीपीओ, एसएचओ और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया।

कौन थे भरत भूषण तिवारी?
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव का रहना वाला 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी, जिसकी सोशल मीडिया पर अच्छी पहचान थी। खासकर फेसबुक पर वह काफी सक्रिय रहते थे। ग्रामीणों के अनुसार भरत सड़क, बिजली, पेयजल, बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और सोन नदी के किनारे बसे गांवों की समस्याओं को लगातार उठाते थे। उनके समर्थकों ने बताया कि वह गरीबों और विस्थापित परिवारों की आवाज बन गए थे। कई बार वह प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ भी खुलकर लिखते और वीडियो बनाते थे। उनके आक्रामक रवैये कारण समर्थकों और विरोधियों, दोनों के बीच चर्चा का विषय बने रहते थे।




