सोमवार (22 जून ) की दोपहर लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में अचानक आग लग गई। जिसमें ग्राफिक्स एनिमेशन सेंटर, पालतू जानवरों की दुकान और पुस्तकालय स्थित थे। इस आग में कम से कम 15 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर छात्र थे।अधिकांश पीड़ित इमारत की दूसरी मंजिल पर फंसे हुए थे, जहां सेंटर में उनकी क्लासेस लग रही थी।

अवैध बिल्डिंग में चल रही थी क्लासेस
रिहायशी इलाके में नियमों को ताक पर रखकर खड़ी की गई यह कमर्शियल बिल्डिंग न सिर्फ अवैध थी, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी खतरा थी।ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि राजधानी आग की लपटों से घिरी हो। इससे पहले भी नवाबों का शहर सिस्टम की लापरवाही के कारण कई बार सुलग चुका है। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने इमारत को व्यावसायिक तौर पर गैर-कानूनी तरीके से चलाने के मामले में अपने ही संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, तीन मंजिला इस इमारत को 2016 में गैर-कानूनी निर्माण के कारण गिराने का आदेश दिया गया था, लेकिन दो महीने से भी कम समय में उस आदेश को वापस ले लिया गया था। इस अग्निकांड के बाद इसे गिराने का फिर से नोटिस जारी कर दिया गया है।
4 अधिकारियों पर गिरी गाज, 4 गिरफ्तार
अग्निकांड के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए, सोमवार को इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जिनमें रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, तुषार कृष्ण जायसवाल और सुरेश कुमार साहू हैं। इसके अलावा बिजली विभाग, अग्निशमन विभाग और लखनऊ विकास प्राधिकरण के चार अधिकारियों को भी निलंबित किया गया है।

मामले की जांच कर के लिए SIT का गठन
अग्निकांड की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी ने लखनऊ आकर खुद घटना स्थल का निरीक्षण किया, जिसके बाद में उन्होंने KGMU में घायलों का हाल जाना और पीड़ितों के परिजन से मुलाकात की। देर शाम उन्होंने अग्निशमन, गृह, लखनऊ विकास प्राधिकरण सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में दो सदस्यीय SIT का गठन कर एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।




