डायबिटिक फुट से जूझ रहे 560 मरीजों को मिली राहत, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत हुआ इलाज

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पंजाब में डायबिटिक फुट और उससे जुड़ी गंभीर जटिलताओं से जूझ रहे मरीजों के लिए मुख्यमंत्री सेहत योजना मददगार साबित हुई है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, योजना के तहत पिछले करीब आठ महीनों में 560 मरीजों का इलाज किया गया, जिस पर 1.32 करोड़ रुपये खर्च हुए। डायबिटीज के मरीजों में पैरों की नसों को नुकसान पहुंचने और रक्त संचार प्रभावित होने के कारण छोटी चोट भी गंभीर घाव में बदल सकती है। समय पर इलाज न मिलने पर संक्रमण गहरे ऊतकों और हड्डियों तक फैल सकता है। गंभीर मामलों में पैर या अन्य अंग गंवाने का खतरा भी पैदा हो सकता है।

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत कई मरीजों को समय पर सर्जिकल और मेडिकल उपचार उपलब्ध कराया गया। 47 वर्षीय हरचरण सिंह एडवांस्ड डायबिटिक फुट से पीड़ित थे। संक्रमण गहरे ऊतकों तक फैलने के बाद डॉक्टरों ने संक्रमित और मृत ऊतकों को हटाने के लिए सर्जिकल डिब्राइडमेंट किया। 38 वर्षीय राजा के पैर का घाव डायबिटिक न्यूरोपैथी के कारण गंभीर संक्रमण में बदल गया और संक्रमण हड्डी तक पहुंच गया। वहीं, 57 वर्षीय वीना के पैर में रक्त संचार खराब होने की वजह से घाव ठीक नहीं हो रहा था और पैर काटने की स्थिति बनने का खतरा था। 67 वर्षीय संतोख सिंह लंबे समय से डायबिटिक फुट अल्सर से परेशान थे, जिसमें संक्रमण और मवाद बनने लगा था। इन मामलों में समय पर उपचार और सर्जिकल प्रक्रियाओं के जरिए संक्रमण को नियंत्रित करने और प्रभावित अंग को बचाने का प्रयास किया गया।

560 मरीजों पर 1.32 करोड़ रुपये खर्च

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, योजना के तहत करीब आठ महीनों में 560 डायबिटिक फुट मरीजों के इलाज पर कुल 1.32 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इनमें 126 मरीजों का सर्जिकल उपचार किया गया, जिस पर करीब 44.55 लाख रुपये खर्च हुए। इसके अलावा 123 मरीजों को मेडिकल मैनेजमेंट उपलब्ध कराया गया। बाकी मामलों में लंबे समय तक ड्रेसिंग, एंटीबायोटिक उपचार, पैर और अंगूठे से जुड़ी सर्जरी, घुटने के नीचे की प्रक्रियाएं, स्किन ग्राफ्टिंग और सीटी स्कैन व एमआरआई जैसी जांच शामिल रहीं। गंभीर मरीजों में सेप्सिस, डायबिटिक कीटोएसिडोसिस और एनीमिया जैसी जटिलताओं का भी उपचार किया गया।

इलाज के खर्च की चिंता से राहत

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि डायबिटिक फुट में इलाज में देरी होने पर मरीज की चलने-फिरने की क्षमता प्रभावित होने के साथ अंग गंवाने का खतरा भी बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक स्थिति इलाज के रास्ते में बाधा न बने। उन्होंने कहा कि योजना की सफलता को केवल इलाज की संख्या या खर्च से नहीं, बल्कि इस बात से देखा जाना चाहिए कि मरीज स्वस्थ होकर घर लौट सके, परिवार पर आर्थिक बोझ कम हो और जिस अंग को बचाया जा सकता है, उसे बचाने का मौका मिले। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत डायबिटिक फुट के इन मामलों में समय पर इलाज ने मरीजों को गंभीर जटिलताओं से निपटने का अवसर दिया है।

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