2000 रूपए से ज्यादा का UPI लेन-देन पड़ेगा महंगा…कैसे?क्या है सरकार का नया नियम…जानिए पूरा लेखा-जोखा

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इस समय हमारे देश में बिना UPI मानो सास लेना भी मुश्किल सा हो गया है।यूपीआई आने के बाद से जो धड़ाधड़ पैसो का लेन-देन शुरु हुआ था उसने पूरे बाजार के माहौल को बदल दिया था।पैसों का लेन-देन आसान करने से लेकर कैश रखने की झंझट खत्म हो गई थी लेकिन अब सरकार नए नियम लेकर आई है।पिछले कई दिनों से इसको लेकर खुब चर्चाएं हो रही थी लेकिन अब सरकार की और से नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। तो अब सवाल है कि ₹2000 से ज्यादा का UPI पेमेंट किया, तो जेब ढीली करनी पड़ेगी’? क्या आप भी परेशान हैं कि Google Pay, PhonePe या Paytm से पैसे भेजना अब महंगा होने वाला है? इंटरनेट पर इस समय इसको लेकर भयंकर कन्फ्यूजन है।लोग डर रहे हैं कि क्या भारत की सबसे बड़ी डिजिटल क्रांति यानी UPI पर अब सरकार टैक्स लगाने जा रही है। दरअसल NPCI (National Payments Corporation of India) ने जो 15 सितंबर 2026 को नया सर्कुलर जारी किया है, उसकी एक-एक बारीक बात समझिए…

नया नियम क्या है?
सबसे पहले बात करते हैं कि आखिर बदलाव क्या हुआ है। NPCI ने साफ कहा है कि 15 अक्टूबर 2026 से ₹2000 से ऊपर के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% का MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाया जाएगा और अगर ट्रांजैक्शन बहुत बड़ा है—जैसे ₹75,000 या ₹1 लाख का—तो भी यह चार्ज अधिकतम ₹300 पर जाकर रुक जाएगा। यानी इस पर कैपिंग लगा दी गई है। ये MDR क्या है…दरअसल MDR का मतलब होता है वो फीस, जो कोई भी डिजिटल पेमेंट सिस्टम चलाने के लिए बैंक और पेमेंट कंपनियां वसूलती हैं। जब आप क्रेडिट कार्ड स्वाइप करते हैं। तो दुकानदार को 2% तक MDR देना पड़ता है। अब यही कॉन्सेप्ट UPI में बड़े ट्रांजैक्शन पर लाया जा रहा है।

आम जनता के लिए क्या फ़ायदा या नुकसान?
आपके लिए, हमारे लिए और हर आम ग्राहक के लिए UPI आज भी, कल भी और 15 अक्टूबर के बाद भी 100% फ्री रहेगा।इसे तीन तरीके से समझिए…दोस्तों या परिवार को पैसे भेजना (P2P)। एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में ट्रास्फर करने पर पर ₹0 चार्ज लगेगा। सब्जी वाले या छोटी दुकान पर पेमेंट: गोलगप्पे खाना हो या राशन की दुकान पर सामान लेना QR कोड स्कैन करके पे किया, ₹1 भी एक्स्ट्रा नहीं देना है।ऑनलाइन शॉपिंग:आप Amazon या Flipkart से ₹10,000 का मोबाइल खरीदते हैं और UPI से पेमेंट करते हैं। आपकी स्क्रीन पर ₹10,000 ही कटेंगे, ₹10,040 नहीं। सरकार और NPCI ने सख्त हिदायत दी है कि कोई भी ऐप या बैंक ग्राहकों से ‘प्लेटफ़ॉर्म फीस’ या ‘हिडन चार्ज’ के नाम पर ₹1 भी नहीं वसूल सकता।

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