BRICS Summit का समापन: भारत मंडपम में दिखा कूटनीतिक तालमेल; PM मोदी बोले— ‘टेक्नोलॉजी और मिनरल्स को हथियार बनाना तरक्की के खिलाफ’

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि महत्वपूर्ण तकनीकों और जरूरी खनिजों (Critical Minerals) को राजनीतिक या कूटनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करना वैश्विक प्रगति के लिए नुकसानदेह है.

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नई दिल्ली: नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का समापन हो गया है. सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और साझा प्राथमिकताओं पर भारत का दृष्टिकोण रखा. सत्र की शुरुआत में हुए ग्रुप फोटो सेशन के दौरान एक खास नजारा देखने को मिला, जब पीएम मोदी के एक तरफ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और दूसरी तरफ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन खड़े नजर आए.

टेक्नोलॉजी और मिनरल्स पर पीएम मोदी का कड़ा संदेश

संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि महत्वपूर्ण तकनीकों और जरूरी खनिजों (Critical Minerals) को राजनीतिक या कूटनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करना वैश्विक प्रगति के लिए नुकसानदेह है. महामारी, प्राकृतिक आपदाओं और सप्लाई चेन में आई रुकावटों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी देश एक-दूसरे पर निर्भर हैं, इसलिए किसी भी एक क्षेत्र का संकट पूरे विश्व को प्रभावित करता है. पीएम मोदी ने ब्रिक्स सदस्यों से मिलकर एक सुरक्षित और पारदर्शी सप्लाई चेन बनाने की अपील की.

‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ जारी

शिखर सम्मेलन के दौरान सभी सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन’ को मंजूरी दी. इसमें आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई. घोषणापत्र में इस बात पर सहमति बनी कि आतंकवाद को पनाह देने, वित्तीय मदद पहुंचाने और सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराने वालों के खिलाफ सामूहिक और सख्त कार्रवाई की जाएगी.

द्विपक्षीय बैठकें और वैश्विक नेताओं की मौजूदगी

सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी ने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो सहित कई राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय बातचीत की. इसके साथ ही ईरान के राष्ट्रपति और मिस्र के राष्ट्रपति अल-सीसी के साथ भी द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई.

वैश्विक मीडिया की नजर

अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस सम्मेलन के सफल आयोजन और साझा घोषणापत्र पर आम सहमति बनाने को भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता माना है.रॉयटर्स (Reuters) के अनुसार, अलग-अलग भू-राजनीतिक हितों वाले देशों जैसे रूस, चीन, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को एक मंच पर लाकर संयुक्त बयान जारी कराना भारत का एक कुशल कूटनीतिक कदम है. वहीं, फाइनेंशियल टाइम्स (Financial Times) की रिपोर्ट के मुताबिक, जहां चीन ब्रिक्स को एक अलग शक्ति केंद्र के रूप में पेश करने की कोशिश में रहता है, वहीं भारत ने इसे संतुलित रखते हुए पश्चिमी देशों के विरोध के बजाय विकासशील देशों (Global South) के आपसी सहयोग का एक मजबूत मंच बनाए रखा.

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