अमेरिका के मजबूत जॉब डेटा ने बदल दिया माहौल : 6 जून को अमेरिका से रोजगार संबंधी आंकड़े आए और उन्होंने वैश्विक बाजारों को चौंका दिया। बाजार को उम्मीद थी कि रोजगार वृद्धि लगभग 80 हजार के आसपास रहेगी। लेकिन वास्तविक आंकड़ा लगभग 1.72 लाख के आसपास आया। इससे निवेशकों को संकेत मिला कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी अपेक्षा से अधिक मजबूत है। इसके साथ ही यह संभावना भी बढ़ गई कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा।
यही वह खबर थी जिसने गोल्ड, सिल्वर और शेयर बाजारों पर दबाव पैदा कर दिया। डॉलर इंडेक्स 100 के ऊपर पहुंच गया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़कर लगभग 4.5 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई। जब डॉलर मजबूत होता है और बॉन्ड यील्ड बढ़ती है तो आमतौर पर गोल्ड और सिल्वर पर दबाव आता है।
सिल्वर पर बढ़ता दबाव : सिल्वर में पिछले कुछ दिनों से कमजोरी दिखाई दे रही थी लेकिन जॉब डेटा आने के बाद बिकवाली और तेज हो गई। सिल्वर का बड़ा सपोर्ट जो 70.90 डॉलर के आसपास माना जा रहा था, वह टूट गया। तकनीकी चार्ट में जो सिमिट्रिकल ट्रायंगल पैटर्न बन रहा था, वह भी नीचे की तरफ टूटता दिखाई दिया। सिल्वर 200 डे मूविंग एवरेज के बेहद करीब पहुंच गया है। यह 67.28 $ स्तर इस समय महत्वपूर्ण सपोर्ट का काम कर रहा है। यदि यह सपोर्ट टूटता है तो सिल्वर 61 डॉलर के आसपास तक जा सकता है। उसके बाद अगला महत्वपूर्ण स्तर और नीचे दिखाई देता है। तकनीकी संकेतकों में भी कमजोरी नजर आ रही है। अधिकांश मूविंग एवरेज सेल सिग्नल दे रहे हैं। एमएसीडी भी कमजोरी दिखा रहा है। हालांकि लंबी अवधि की तस्वीर अभी भी सकारात्मक मानी जा रही है। लेकिन निकट अवधि में जोखिम बढ़ गया है।
गोल्ड-सिल्वर रेशियो भी बढ़ रहा है। यदि यह 65 के ऊपर जाता है तो सिल्वर अपेक्षाकृत सस्ता माना जाएगा। 70 के ऊपर जाने पर सिल्वर और अधिक आकर्षक हो सकता है।
गोल्ड में भी दबाव : गोल्ड की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। गोल्ड 200 डे मूविंग एवरेज के नीचे फिसल गया है। यह तकनीकी दृष्टि से कमजोरी का संकेत माना जाता है। कई तकनीकी संकेतक सेल सिग्नल दे रहे हैं। चार्ट पर डाउनवर्ड फ्लैग पैटर्न दिखाई दे रहा है। यदि गोल्ड अपने प्रमुख सपोर्ट स्तरों को नहीं बचा पाया तो 4150 डॉलर और उसके बाद 4000 डॉलर के नीचे तक भी दबाव बढ़ सकता है। कुछ विश्लेषक 3800 डॉलर तक की संभावना भी व्यक्त कर रहे हैं।
हालांकि दीर्घकालिक दृष्टि से गोल्ड की कहानी अभी समाप्त नहीं हुई है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार गोल्ड खरीद रहे हैं। भू-राजनीतिक तनाव भी बने हुए हैं। लेकिन फिलहाल डॉलर की मजबूती और ऊंची बॉन्ड यील्ड गोल्ड पर दबाव बना रही है।
तेल और पश्चिम एशिया की स्थिति : तेल बाजार भी निवेशकों की निगाह में बना हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। यदि स्थिति बिगड़ती है तो तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। इसका असर बॉन्ड यील्ड, ब्याज दरों और अंततः गोल्ड तथा शेयर बाजार पर भी पड़ता है। यानी आने वाले महीनों में पश्चिम एशिया की स्थिति भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
राजेश एक्सपोर्ट से सबक : शेयर बाजार में पैसा कमाना जितना कठिन है, उससे कहीं अधिक कठिन है अपने पैसे को गलत जगह फंसने से बचाना। पिछले कुछ दिनों में राजेश एक्सपोर्ट का मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि बाजार में केवल सपने देखकर निवेश करने वाले लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। राजेश एक्सपोर्ट का मामला निवेशकों के लिए बड़ी चेतावनी, एक समय ऐसा था जब राजेश एक्सपोर्ट का नाम लगभग हर ब्रोकर, हर यूट्यूब चैनल और हर निवेश चर्चा में सुनाई देता था। कंपनी को लेकर लगातार कहा जा रहा था कि गोल्ड बिजनेस में जबरदस्त कमाई हो रही है और भविष्य बेहद उज्ज्वल है। लेकिन अब जो बातें सामने आ रही हैं, उन्होंने हजारों निवेशकों को झटका दिया है।
बाजार में कई बार ऐसी कंपनियां आती हैं जो अपने कारोबार, टर्नओवर और भविष्य की संभावनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती हैं। जब तक सच्चाई सामने आती है तब तक आम निवेशकों का पैसा डूब चुका होता है। इतिहास में भी ऐसे उदाहरण कई बार देखने को मिले हैं। कभी सत्यम कंप्यूटर, कभी रोल्टा, कभी पेंटाफोर जैसी कंपनियों ने निवेशकों को बड़े सपने दिखाए और बाद में भारी नुकसान पहुंचाया। समस्या केवल कंपनियों की नहीं होती, बल्कि निवेशकों की मानसिकता भी जिम्मेदार होती है। लोग 12 से 14 प्रतिशत की स्थिर कमाई से संतुष्ट नहीं होते और 100 प्रतिशत या 200 प्रतिशत रिटर्न के लालच में फंस जाते हैं।
शेयर बाजार में सबसे बड़ा नियम यही है कि लालच पर नियंत्रण रखा जाए। मजबूत बैलेंस शीट, नियमित लाभ और लंबे समय से कारोबार कर रही कंपनियों में निवेश अपेक्षाकृत सुरक्षित रहता है। निवेशक यदि सीमित और चुने हुए शेयरों पर ध्यान दें तो जोखिम काफी कम हो सकता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था : दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं दबाव में हैं। यूरोप के कई देशों में विकास दर कमजोर है। कुछ देशों में मंदी का खतरा बना हुआ है। लेकिन भारत की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई दे रही है। हालांकि चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। वैश्विक ब्याज दरें, भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर की मजबूती भारतीय बाजारों को प्रभावित कर सकती है। लेकिन समग्र तस्वीर अभी भी सकारात्मक दिखाई देती है।
पिछले कुछ महीनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली देखी गई है। बड़ी मात्रा में पैसा भारतीय शेयर बाजार से बाहर निकला है। सरकार और रिजर्व बैंक की ओर से विदेशी निवेशकों को भारतीय बॉन्ड बाजार की तरफ आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। भारत में ब्याज दरें विकसित देशों की तुलना में अधिक हैं। महंगाई भी नियंत्रण में है। ऐसे में विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बॉन्ड बाजार आकर्षक विकल्प बन सकता है। सरकार द्वारा टैक्स संबंधी राहत देने की चर्चा भी हो रही है। यदि विदेशी निवेशकों को टैक्स के मोर्चे पर अतिरिक्त लाभ मिलता है तो बड़ी मात्रा में पूंजी भारतीय बॉन्ड बाजार की तरफ आ सकती है।
इसका सीधा असर शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है। यदि विदेशी निवेशक इक्विटी से पैसा निकालकर बॉन्ड में लगाते हैं तो शेयर बाजार पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक अभी बाजार को सहारा दे रहे हैं। डीआईआई लगातार खरीदारी कर रहे हैं और यही कारण है कि विदेशी बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आई है।
फिलहाल गोल्ड-सिल्वर, बॉन्ड और शेयर बाजार पर दुनिया की नजर है, इसलिए आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।




