MONEY TALK : क्या Fed की सख्ती से टूटेगा……? GOLD-SILVER में बड़ा तूफान आने वाला है?

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अमेरिका का Federal Reserve हमारे RBI की तरह एक Central Bank है, लेकिन यह सिर्फ बैंकिंग सिस्टम तक सीमित नहीं है। पूरी मॉनेटरी सिस्टम, शेयर बाजार और ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट पर इसका बहुत बड़ा प्रभाव रहता है। कई लोग तो यह भी कहते हैं कि अगर America Federal Reserve को छींक आ जाए, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को जुकाम हो जाता है।

16 मई को नए Fed Chief आए हैं, जिन्हें Donald Trump ने चुना है। Trump चाहते हैं कि नए Fed Chief उनके हिसाब से काम करें, क्योंकि पहले वाले Fed Chief Jerome Powell Trump की बातों से ज्यादा इकॉनमी की वास्तविक स्थिति को देखकर फैसले लेते थे।नए Chief Kevin Warsh का रोल धीरे-धीरे शुरू होगा। हालांकि पुराने Chief Jerome Powell अभी भी Fed Board में रहेंगे, इसलिए Warsh को अंदरूनी स्तर पर Powell के प्रभाव का भी सामना करना पड़ेगा। कहा जा रहा है कि Kevin Warsh Trump के उस फॉर्मूले के साथ आए हैं, जिसमें ब्याज दरों को कम करने की बात की जा रही है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में यह कितना संभव होगा, यह अलग सवाल है। लेकिन जो बातें सामने निकलकर आ रही हैं, उसके अनुसार Fed अपनी Balance Sheet को Reset करने की तैयारी में है।

ध्यान रखिए, इस समय Fed की Balance Sheet लगभग 6.7 ट्रिलियन डॉलर की है। कोविड और उसके बाद के दौर में Fed ने मार्केट से बड़े पैमाने पर बॉन्ड खरीदे थे। इसके कारण मार्केट में भारी मात्रा में Liquidity आई और शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। अब Fed उसी अतिरिक्त Liquidity को धीरे-धीरे सिस्टम से बाहर निकालने की कोशिश करेगा। अगर ऐसा होता है, तो इसके कई असर देखने को मिल सकते हैं —

  • Inflation पर दबाव कम होगा।
  • Dollar मजबूत होगा।
  • मार्केट से Artificial Liquidity खत्म होगी।
  • शेयर बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।
  • Mortgage Rates महंगे हो सकते हैं।
  • कर्ज लेने वालों को नुकसान हो सकता है।
  • Growth Stocks और AI सेक्टर पर असर पड़ सकता है।
  • Housing Market और महंगा हो सकता है।

हालांकि दूसरी तरफ FD कराने वालों और बैंकों को फायदा मिलेगा।

GOLD & SILVER

Dollar मजबूत होने से Gold और Silver पर तात्कालिक दबाव आ सकता है। लेकिन Silver की कहानी अलग है, क्योंकि उसमें Industrial Demand का बहुत बड़ा रोल है। वहीं Gold में Central Banks की खरीदारी आने वाले समय में सबसे बड़ा फैक्टर बनी रह सकती है।

अगर हम 2000 से अब तक देखें, तो अमेरिका का कर्ज लगभग 10 गुना बढ़ चुका है। 2008 से देखें, तो यह करीब 5 गुना बढ़ा है। इसी दौरान Gold लगभग 12 गुना बढ़ा, जबकि S&P लगभग 6 गुना बढ़ा।असल में Gold की असली कहानी 2022 के बाद शुरू हुई, जब दुनिया के कई Central Banks ने Gold की खरीदारी तेज कर दी। इसलिए Fed का कोई भी कदम Gold पर थोड़े समय के लिए दबाव जरूर डालेगा, लेकिन बाद में कहानी फिर पलट सकती है।

फिलहाल Gold पर सबसे बड़ा दबाव Bond Market की वजह से देखा जा रहा था। हालांकि अब Bond Market से थोड़ा सकारात्मक संकेत निकलता दिख रहा है। अभी भी Bond Yield 2007 वाले स्तर के आसपास है, लेकिन हल्की नरमी जरूर दिखाई दी है। Inflation Protection Bonds की खरीदारी उस स्तर पर नहीं हुई है, जैसी किसी बड़े संकट के समय होती है। इसका मतलब यह है कि मार्केट को अभी भी उम्मीद है कि Fed हालात को कंट्रोल कर लेगा। यही कारण है कि Gold पर थोड़े समय के लिए दबाव देखने को मिल सकता है।

आज Gold की Delivery 2.35 Metric Ton रही और इस महीने कुल Delivery लगभग 19.63 Metric Ton हो चुकी है। COMEX के पास कुल 891 Metric Ton Gold मौजूद है, जिसमें से 489 Metric Ton For Sale और 402 Metric Ton Not For Sale है।फिलहाल Gold का Correction Zone 4200 से 4400 के बीच माना जा रहा है, जबकि अभी यह 4500 के ऊपर ट्रेड कर रहा है।

अब बात करते हैं Silver की।

आज Silver की Delivery 5.76 Metric Ton रही और इस महीने कुल Delivery लगभग 883 Metric Ton हो चुकी है। COMEX के पास कुल 9787 Metric Ton Silver मौजूद है, जिसमें 2541 Metric Ton For Sale और 7246 Metric Ton Not For Sale है।

Gold-Silver Ratio इस समय 59.52 पर है। यानी Silver, Gold की तुलना में मजबूत हो रहा है।

  • 60 के आसपास Silver सामान्य रहता है।
  • 55 के नीचे Silver तेज चाल पकड़ता है।
  • 50 के नीचे Silver बेहद खतरनाक तेजी दिखा सकता है।
  • 65 के ऊपर Silver कमजोर माना जाता है।

Silver के लिए पहला Resistance 78 है, उसके बाद 81 का स्तर महत्वपूर्ण है। 81 वही स्तर है, जहां से पहले बड़ा Breakout आया था। अब Silver उसी स्तर को Retest करने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल Silver का बाजार अपने Fundamental से ज्यादा Headlines पर चल रहा है। खासकर Middle East की खबरों का बड़ा असर देखा जा रहा है।Silver पिछले कई महीनों तक 70 से 80 के बीच Consolidate करता रहा। फिर 81 के ऊपर Breakout लेकर 90 तक पहुंच गया। लेकिन बाद में Middle East तनाव, Bond Yield और Oil Prices बढ़ने के कारण बिकवाली शुरू हो गई और Silver फिर नीचे आ गया।

अब खबरें आ रही हैं कि America और Iran के बीच एक Draft तैयार हो चुका है। अगर शांति समझौता हो जाता है, तो Oil Prices में गिरावट आ सकती है। ऐसी स्थिति में Silver पर भी दबाव देखने को मिल सकता है। अगर यहां कोई तेज उछाल आता भी है, तो वह Manipulation या Short-Term Trading के कारण हो सकता है। इसलिए सावधान रहिएगा।Silver के लिए 64 का स्तर बहुत मजबूत Support माना जा रहा है, क्योंकि यह 200-Day Moving Average के आसपास है।

अब बात अपने शेयर बाजार की करते हैं।

FII लगातार बिकवाली कर रहे हैं। कल लगभग ₹1891 करोड़ की बिकवाली हुई। पिछले साल जुलाई से FII लगातार बिकवाली कर रहे हैं। Secondary Market में वे अब तक लगभग ₹4.52 लाख करोड़ के शेयर बेच चुके हैं। हालांकि Primary Market में उन्होंने करीब ₹79,000 करोड़ का निवेश भी किया है। कुल मिलाकर 11 महीनों में लगभग ₹3.73 लाख करोड़ की Net Selling हो चुकी है। यही कारण है कि रुपये पर दबाव बना हुआ है। हालांकि कल रुपया लगभग 70 पैसे मजबूत हुआ, क्योंकि मार्केट खुलने से पहले ही RBI ने डॉलर बेचना शुरू कर दिया था। इससे रुपये को सपोर्ट मिला। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जो पैसा बाजार से बाहर जा रहा है, उसे रोका जाए।

साथ ही हमारा शेयर बाजार काफी हद तक Global Tension पर निर्भर करेगा। Trump का नया रुख, जिसमें वे Taiwan के PM से हथियारों को लेकर बातचीत करना चाहते हैं, China के साथ तनाव बढ़ा सकता है। हाल ही में Beijing यात्रा के दौरान China ने Taiwan मुद्दे को लेकर Trump को दो टूक संदेश दिया था कि America Taiwan से दूरी बनाए रखे। इसके साथ Middle East संकट और Oil Supply की स्थिति भी आने वाले समय में बाजार पर बड़ा असर डाल सकती है। IEA प्रमुख का कहना है कि जुलाई-अगस्त तक Oil Crisis Red Zone में जा सकता है। Supply Crisis और महंगा तेल Global Financial Market पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।

इन सभी कारणों के चलते अगले 6 महीने तक शेयर बाजार में Pressure Zone बना रह सकता है, भले ही Corporate Results अभी अच्छे दिखाई दे रहे हों। अब सवाल आता है कि क्या Large Cap में रहना चाहिए? अगर पिछले 1 महीने का डेटा देखें —

  • Large Cap: -2.72%
  • Mid Cap: +1.27%
  • Small Cap: +2.16%

लेकिन लंबी अवधि में Portfolio Balance सबसे महत्वपूर्ण होता है। Crash के समय Mid Cap और Small Cap बहुत तेजी से गिरते हैं, जबकि Large Cap अपेक्षाकृत स्थिर रहते हैं। इसलिए हर Portfolio में Large Cap का हिस्सा जरूर होना चाहिए।

उम्र के हिसाब से एक सामान्य नियम —

  • 50+ उम्र: 50% Large Cap
  • 60+ उम्र: 60% Large Cap
  • 40+ उम्र: 40% Large Cap
  • 30+ उम्र: 30% Large Cap

साथ ही Gold और Silver का हिस्सा कुल Portfolio का 20% से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

फिलहाल बाजार में काफी उतार-चढ़ाव है। VIX Index 17.82 पर चल रहा है। 17 के ऊपर का VIX Swing Traders के लिए अच्छा माना जाता है। Mid Cap और Small Cap में ज्यादा Volatility देखी जा रही है, क्योंकि वहां Manipulation अपेक्षाकृत आसान होता है। इसलिए इस समय कदम फूंक-फूंक कर उठाइए। मार्केट अभी भी Pressure Zone में है —

  • Middle East तनाव
  • America-Iran स्थिति
  • China-Taiwan मुद्दा
  • Oil Crisis

ये सभी फैक्टर आने वाले समय में बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए जो भी निवेश या ट्रेडिंग करें, बहुत सावधानी के साथ करें। निवेश करने से पहले अपने SEBI Registered Financial Analyst या Financial Advisor से सलाह जरूर लें। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन होता है और यहां उतार-चढ़ाव बहुत तेज हो सकते हैं। इसलिए कोई भी फैसला सोच-समझकर और अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार ही लें।

Disclaimer:
यह जानकारी केवल शैक्षणिक एवं एजुकेशनल उद्देश्य (Education Purpose) के लिए प्रस्तुत की गई है। यह किसी भी प्रकार की निवेश सलाह (Investment Advice) नहीं है। शेयर बाजार, सोना-चांदी या किसी भी वित्तीय बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या SEBI Registered Analyst से सलाह अवश्य लें। किसी भी लाभ या हानि के लिए लेखक अथवा प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होगा।

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