नई दिल्ली: 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है, जो 13 अगस्त तक चलेगा. सत्र के शुरू होने से एक दिन पहले यानी 19 जुलाई को को सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है. इस बैठक को लेकर सरकार का उद्देश्य सत्र के सुचारू संचालन और महत्वपूर्ण विधायी कार्यों पर आम सहमति बनाना है.
सर्वदलीय बैठक क्यों?
सर्वदलीय बैठक के लिए विपक्षी पार्टियों को न्योता भेज दिया गया है. बैठक 19 जुलाई को सुबह 11 बजे शुरू होगी. इस बैठक में सरकार सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ संसद के एजेंडे पर चर्चा करेगी. इस दौरान विपक्ष को आगामी सत्र में पेश किए जाने वाले प्रमुख विधेयकों की जानकारी दी जाएगी, साथ ही विपक्षी दलों को भी अपने मुद्दे उठाने का मौका मिलेगा. सरकार का मुख्य लक्ष्य मानसून सत्र के दौरान सदन का कामकाज बिना किसी रुकावट के चलाना है. इस दौरन विपक्षियों से सुझाव भी लिए जा सकते हैं.
मानसून सत्र में गूंजने वाले संभावित मुद्दे
यह मानसून सत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस सत्र में सबसे ज्यादा चर्चा महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों के परिसीमन से जुड़े नए विधेयक को लेकर है. जानकारी के मुताबिक, सरकार सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव ला सकती है, ताकि दक्षिण भारत के राज्यों की आबादी संबंधी चिंताओं को संतुलित किया जा सके. इसके अलावा चर्चाओं में कानून-व्यवस्था, सीमा सुरक्षा, इथेनॉल ब्लेंडिंग और हालिया राम मंदिर में हुए कथित चढ़ावा चोरी से जुड़े विवादित मामले प्रमुख रह सकते हैं. वहीं जस्टिस यशवंत वर्मा से संबंधित जांच रिपोर्ट को भी इस सत्र के दौरान पटल पर रखा जाएगा, जिस पर संसद अपना फैसला लेगी.
बदलता राजनीतिक समीकरण
हालिया विधानसभा चुनावों के बाद एनडीए गठबंधन राज्यसभा और लोकसभा दोनों में पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ है. विपक्षी दलों में आंतरिक मतभेद चर्चा का विषय हैं. साथ ही, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों द्वारा अलग समूह के रूप में मान्यता मांगने का मामला भी लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित है. तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन टूटना और अभिनेता विजय की पार्टी (TVK) के साथ मिलकर सरकार का गठन, संसद के भीतर नए समीकरण पैदा कर सकता है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सत्र के लिए अधिसूचना जारी कर दी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सत्र राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक चर्चा और ठोस निर्णयों का गवाह बनेगा.




