आर्थिक तबाही की तस्वीर उभर रही है, क्या गोल्ड-सिल्वर में आएगी तूफानी तेजी?

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तबाही… भारी तबाही…
जो तबाही अभी तक दूर से दिखाई दे रही थी, अब वह धीरे-धीरे आंखों के सामने आती हुई नजर आ रही है। अगर मौजूदा स्थिति इसी तरह बनी रही, तो अगले 6 महीनों के अंदर दुनिया एक बड़े आर्थिक संकट की चपेट में आ सकती है। यह वही मंजर हो सकता है, जो हमें 2008 की मंदी की याद दिला दे।

2008 के रिसेशन में भारत किसी तरह बच गया था, लेकिन इस बार हालात कहीं ज्यादा गंभीर दिख रहे हैं। अगले 3–4 महीनों में जो कदम दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं उठाएंगी, वही तय करेगा कि हालात संभलेंगे या नहीं। वरना स्थिति बेहद कठिन नजर आ रही है।

बॉन्ड मार्केट क्यों बना खतरे की घंटी?

इस समय सबसे बड़ा संकट बॉन्ड मार्केट में दिखाई दे रहा है। पहले समझते हैं कि बॉन्ड होता क्या है।

बॉन्ड एक तरह का उधार होता है। जब कोई देश दूसरे देश या निवेशकों से पैसा लेता है, तो बदले में एक बॉन्ड जारी करता है। उसमें यह तय होता है कि: कितने वर्षों बाद पैसा लौटाया जाएगा, हर साल कितना ब्याज दिया जाएगा l आमतौर पर 10 साल और 30 साल के बॉन्ड ज्यादा लोकप्रिय होते हैं। लेकिन जब बॉन्ड की यील्ड (Yield) यानी ब्याज दर तेजी से बढ़ने लगती है, तो इसका मतलब होता है कि निवेशकों का उस देश की अर्थव्यवस्था पर भरोसा कम हो रहा है। लोग बॉन्ड बेचने लगते हैं, जिससे बॉन्ड की कीमत गिरती है और यील्ड ऊपर चली जाती है।

अमेरिका पर बढ़ता कर्ज और संकट

अमेरिका इस समय लगभग 39 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज में डूबा हुआ है। उसका Debt-to-GDP रेशियो 124% से भी ऊपर पहुंच चुका है।

  • हर साल लगभग 1.2 ट्रिलियन डॉलर सिर्फ ब्याज चुकाने में जा रहा है
  • कुल फिस्कल डेफिसिट लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है

अगर बॉन्ड यील्ड इसी तरह बढ़ती रही, तो अमेरिका के लिए कर्ज संभालना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

फिर अमेरिका क्या करेगा?

ऐसी स्थिति में अमेरिका के पास तीन रास्ते बचते हैं:

  1. और ज्यादा नोट छापना
  2. डॉलर का अवमूल्यन करना
  3. ब्याज दरें बढ़ाना

लेकिन ब्याज दरें बढ़ाने से लोन महंगे हो जाएंगे: मॉर्गेज महंगे होंगे, कॉर्पोरेट कर्ज महंगा होगा,रियल एस्टेट दबाव में आएगा,प्राइवेट क्रेडिट सिस्टम चरमरा सकता है.प्राइवेट क्रेडिट मार्केट पहले से दबाव में है। कई ऐसी कंपनियों को भारी ब्याज पर कर्ज दिया गया, जिन्हें बैंक लोन नहीं दे रहे थे।अब जांच एजेंसियों की नजर बड़ी कंपनियों पर है:ब्लैकरॉक,अपोलो(USA),KKR(USA),कार्लाइल,ब्लू आउल. आरोप है कि कुछ फंड्स की वैल्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई। अगर जांच में यह साबित हो जाता है, तो निवेशक तेजी से पैसा निकालना शुरू कर सकते हैं। इससे पूरा क्रेडिट सिस्टम हिल सकता है। 2008 में सिर्फ एक बैंक के गिरने से पूरी दुनिया में संकट फैल गया था। इस बार खतरा और बड़ा नजर आ रहा है।

जापान, यूके और दुनिया भर में बॉन्ड संकट

सिर्फ अमेरिका ही नहीं:जापान की बॉन्ड यील्ड भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, यूके की यील्ड 5% के ऊपर चली गई है,विदेशी निवेशक भारत सहित कई देशों से पैसा निकाल रहे हैं.जापान अमेरिका का सबसे बड़ा बॉन्ड होल्डर है। अगर जापान अमेरिकी बॉन्ड बेचता रहा, तो अमेरिका पर और दबाव बढ़ेगा।

गोल्ड और सिल्वर क्यों महत्वपूर्ण हो गए हैं?

सवाल उठता है कि अगर हालात इतने खराब हैं, तो गोल्ड और सिल्वर नीचे क्यों गिर रहे हैं?असल में इस समय जो गिरावट दिखाई दे रही है, वह मुख्य रूप से:पेपर ट्रेडिंग,फ्यूचर्स मार्केट,कॉमेक्स और MCX के दबाव की वजह से है।लेकिन लंबी अवधि में गोल्ड,सिल्वर दोनों के लिए स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है।

इतिहास क्या कहता है?

1971 से 1980 के बीच डॉलर का भारी अवमूल्यन हुआ था। उस दौरान: गोल्ड $35 से बढ़कर लगभग $850 तक पहुंच गया था, यानी लगभग 2400% की तेजी.इस बार भी परिस्थितियां वैसी ही बनती दिखाई दे रही हैं, हालांकि तेजी उसी स्तर की बिल्कुल नहीं होगा, क्योंकि तभी इंटरेस्ट रेट 12% से ज्यादा कर दिया गया था, जो इस बार संभव नहीं है क्योंकि कंज्यूमर का तरीका और एक्सपोज़र दोनों बदल चुके हैं।

सिल्वर में क्या दिख रहा है?

सिल्वर में फिलहाल भारी उतार-चढ़ाव दिखाई दे रहा है।शॉर्ट टर्म में Panic Selling संभव है,72 के नीचे और 70 तक गिरावट भी आ सकती है,64 एक बड़ा सपोर्ट लेवल माना जा रहा है. लेकिन 3–6 महीने के नजरिए से सिल्वर मजबूत दिखाई देता है। क्योंकि आर्थिक हालात Precious Metals के पक्ष में बन रहे हैं।

गोल्ड की स्थिति

गोल्ड में भी करेक्शन दिख रहा है, लेकिन 4350 बड़ा सपोर्ट लेवल है,उसके नीचे 4250 महत्वपूर्ण स्तर है.हालांकि लंबी अवधि में गोल्ड की बुनियाद मजबूत बनी हुई है।

तेल संकट और डॉलर

इस समय डॉलर को सबसे बड़ा सहारा तेल दे रहा है।अगर अगले कुछ महीनों में तेल संकट सामान्य होता है, तो डॉलर पर दबाव और बढ़ सकता है।इसी वजह से फिलहाल गोल्ड और सिल्वर की रफ्तार थोड़ी रुकी हुई नजर आती है।

भारतीय शेयर बाजार की स्थिति

भारतीय बाजार पर भी दबाव बना हुआ है। FII लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जबकि DII खरीदारी कर रहे हैं। जेपी मॉर्गन और मूडीज जैसी संस्थाओं ने भी बाजार में बढ़ते जोखिम की चेतावनी दी है।अगर वैश्विक हालात बिगड़ते हैं, तो बाजार में और गिरावट संभव है।रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में पैसा निकाल रहे हैं। पिछले दो महीनों में लगभग 21 बिलियन डॉलर की निकासी हुई, 1993 के बाद यह सबसे तेज निकासी मानी जा रही है.

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी: एक सकारात्मक संकेत

इन तमाम नकारात्मक खबरों के बीच एक सकारात्मक बात भी सामने आई है। महिलाओं की भागीदारी म्यूचुअल फंड और निवेश में तेजी से बढ़ रही है। लगभग 1.32 करोड़ महिला निवेशक सक्रिय हैं, महिला निवेशकों की वृद्धि दर पुरुषों से ज्यादा रही है. महिलाएं आमतौर पर धैर्य के साथ निवेश करती हैं, इसलिए लंबे समय में उनका रिटर्न बेहतर देखने को मिलता है।अगर शेयर बाजार से डर लगता है, तो म्यूचुअल फंड,ETF जैसे विकल्पों में धीरे-धीरे निवेश किया जा सकता है। लंबी अवधि में धैर्य रखने वाले निवेशक ही सबसे ज्यादा फायदा उठाते हैं।

दुनिया की अर्थव्यवस्था इस समय बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ी है।
बॉन्ड मार्केट, बढ़ता कर्ज, डॉलर पर दबाव, प्राइवेट क्रेडिट संकट और जियोपॉलिटिकल तनाव — ये सभी संकेत आने वाले समय को चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं।अगले 6 महीने बेहद अहम होंगे।अब देखना यह होगा कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस संकट को संभाल पाती हैं या नहीं।

Disclaimer:
यह जानकारी केवल शैक्षणिक एवं एजुकेशनल उद्देश्य (Education Purpose) के लिए प्रस्तुत की गई है। यह किसी भी प्रकार की निवेश सलाह (Investment Advice) नहीं है। शेयर बाजार, सोना-चांदी या किसी भी वित्तीय बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या SEBI Registered Analyst से सलाह अवश्य लें। किसी भी लाभ या हानि के लिए लेखक अथवा प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होगा।

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