मानसून @15 जुलाई, बारिश में क्यों लगा ब्रेक? राजस्थान, MP और दिल्ली में पारा 38 डिग्री के पार, खेती को बड़ा नुकसान

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इन दिनों भारत में मानसून की गतिविधियों पर ब्रेक लग गया है। दक्षिण भारत के साथ-साथ उत्तर भारत के राज्यों जैसे राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली में पारा 38 डिग्री के पार पहुंच रहा है। मानसून पर ब्रेक मुख्य रूप से ‘मानसून ट्रफ’ यानि कम दबाव वाली हवा की पट्टी के उत्तर की ओर खिसक जाने, कमजोर ट्रॉपिकल मौसम प्रणालियों और खासतौर पर अल-नीनो जैसी मौसमी परिस्थितियों के कारण लगता है। जो अब चिंताजनक बनता जा रहा है।

क्या है अल-नीनो का प्रभाव ?

अल-नीनो के कारण ही मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं।इससे भारत में सामान्य से कम बारिश और देश के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात पैदा होने की आशंका बढ़ जाती है।समुद्र की सतह का गर्म होना अल-नीनो कहलाता है, जो मानसूनी हवाओं को कमजोर कर देता है और कई बार देश में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न कर देता है। इतना ही नहीं इसका सीधा असर कृषि और फसलों के उत्पादन पर पड़ता है। अल-नीनो के कारण वैश्विक स्तर पर औसत तापमान में वृद्धि और भीषण हीटवेव का प्रकोप देखने को मिलता है।

कृषि और फसल उत्पादों पर बुरा असर

भारत में मानसून में अचानक आए इस ब्रेक से खरीफ फसलों, खासकर धान, मक्का और सोयाबीन की बुवाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। बारिश रुकने से खेतों की नमी कम हो रही है और तैयार नर्सरी के सूखने का खतरा बढ़ गया है। जिससे किसानों की लागत और उत्पादन दोनों पर भारी संकट है। इस बार खेती पर बाढ़ से ज्यादा सूखे प्रभावित होने का खतरा है। जिन किसानों ने शुरुआती अच्छी बारिश देखकर बुवाई कर दी थी,उन्हें अब पौधों की वृद्धि रुकने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, फसलें पीली पड़ने लगी हैं। जिन क्षेत्रों में बारिश नहीं हो रही है, वहां किसानों को डीजल पंप या बिजली के सहारे सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है।

मौसम विशेषज्ञों की माने तो मानसून पर इस ब्रेक का असर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कृषि क्षेत्रों पर ज्यादा देखा जा रहा है। हालांकि,कुछ रिपोर्ट्स में 19-20 जुलाई के बाद मॉनसून के फिर से सक्रिय होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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