कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आपने किसी परीक्षा या नौकरी के लिए जी-जान से मेहनत की हो, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला? और वहीं दूसरी तरफ, किसी दूसरे इंसान को बिना ज्यादा मेहनत किए सब कुछ आसानी से मिल गया? ऐसे वक्त पर हमारे मन में एक सवाल जरूर आता है क्या हमारी जिंदगी पहले से लिखी हुई है? क्या जो कुछ हमारे साथ हो रहा है, वो सिर्फ किस्मत का खेल है, या फिर हमारे कर्म ही सब कुछ तय करते हैं? आइए विज्ञान, अध्यात्म और तर्क की कसौटी पर इस सदियों पुराने रहस्य को समझते हैं.
जिंदगी की शुरुआत के ‘ताश के पत्ते’
सबसे पहले बात करते हैं किस्मत या भाग्य की। आखिर किस्मत है क्या? हमारे प्राचीन ग्रंथों और दर्शन के अनुसार, जिसे हम आज किस्मत कहते हैं, वो असल में हमारे ही संचित और प्रारब्ध कर्म हैं। इसे एक सरल उदाहरण से समझिए. आप किस देश में पैदा होंगे, आपके माता-पिता कौन होंगे, आपका डीएनए कैसा होगा यह आप तय नहीं करते। यह वो कार्ड्स हैं जो जिंदगी की शुरुआत में आपको बांट दिए गए हैं. अध्यात्म कहता है कि यह हमारे पिछले जन्मों के फलों का परिणाम है, जिसे हम इस जन्म में किस्मत के रूप में लेकर आते हैं. इसे हम तुरंत बदल नहीं सकते, ठीक उसी तरह जैसे आप ताश के खेल में अपने पास आए पत्तों को रातों-रात नहीं बदल सकते.
गेम को कैसे खेलना है?
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। यहीं पर एंट्री होती है कर्म यानी आपके पुरुषार्थ की. भले ही ताश के पत्ते आपके हाथ में क्या आए, यह आपकी किस्मत थी, लेकिन उन पत्तों के साथ खेल को कैसे खेलना है, कौन सी चाल चलनी है, यह पूरी तरह से आपका कर्म और आपकी फ्री विल (Free Will) है.“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” — श्रीकृष्ण (भगवद्गीता). इसका मतलब यह है कि आज आप जो भी निर्णय लेते हैं, जो भी मेहनत करते हैं, उसे हमारे शास्त्र क्रियामाण कर्म कहते हैं. यही क्रियामाण कर्म आपके आने वाले कल की नई किस्मत को लिखता है. यानी, सब कुछ पहले से तय नहीं है; आप इस पल में जो चुनते हैं, वह आपका भविष्य बदल देता है.
कार ड्राइविंग का बेहतरीन उदाहरण
कर्म और किस्मत के इस तालमेल को समझने के लिए कार ड्राइविंग का उदाहरण सबसे सटीक बैठता है. आप जिस सड़क पर चल रहे हैं, वह सड़क कैसी है, उसमें कितने गड्ढे हैं, आगे कोई तीखा मोड़ है या पहाड़ी रास्ता यह आपकी किस्मत है, जिसे आप अचानक नहीं बदल सकते. उस सड़क पर गाड़ी की स्पीड क्या रखनी है, गड्ढे आने पर ब्रेक लगाना है या नहीं, और गाड़ी को सुरक्षित कैसे चलाना है यह पूरी तरह आपका कर्म है.अगर कोई व्यक्ति यह सोचे कि सब कुछ किस्मत में लिखा है और अपनी कार का स्टेयरिंग छोड़कर आंखें बंद कर ले, तो दुर्घटना होना तय है. इसलिए, किस्मत हमें परिस्थितियां देती है, लेकिन कर्म हमें उन परिस्थितियों से बाहर निकलने का रास्ता देता है.
आधा हिस्सा लिखा हुआ, आधा कोरा कागज
तो, क्या जिंदगी पहले से लिखी है? इसका जवाब है—आधा हिस्सा लिखा हुआ है (जो परिस्थितियां हमें जन्म से मिली हैं) और आधा हिस्सा कोरा कागज है, जिसे आपको आज अपने कर्मों से लिखना है. किस्मत केवल संभावनाओं के दरवाजे खोलती या बंद करती है, लेकिन उन दरवाजों के अंदर कदम बढ़ाना सिर्फ कर्म का काम है. अगर आप सिर्फ किस्मत के भरोसे बैठेंगे, तो शायद जो मिलने वाला है वो भी छूट जाएगा. लेकिन अगर आप लगातार कर्म करते हैं, तो आप अपनी किस्मत की लकीरें खुद बदल सकते हैं. इसलिए, परिस्थितियों को दोष देना बंद कीजिए, अपनी जिंदगी का स्टेयरिंग अपने हाथ में लीजिए, बेहतरीन कर्म कीजिए और अपनी तकदीर खुद लिखिए क्योंकि भाग्य भी उन्हीं का साथ देता है जो कर्म करना जानते हैं.




