मध्य पूर्व जंग पर संसद में चर्चा:विदेश मत्री का आया बयान,हालात पर पीएम मोदी की नजर

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मध्य पूर्व में चल रही जंग को लेकर सदन में कार्यवाही के दौरान चर्चा की गई,विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, “हमारी सरकार ने 20 फरवरी को बयान जारी कर गहरी चिंता जताई थी और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी. हमारा मानना ​​है कि तनाव कम करने के लिए बातचीत और कूटनीति को आगे बढ़ाना चाहिए.

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका और इज़राइल के हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, और पूरे क्षेत्र में जंग का खतरा मंडरा रहा है।भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा और लोकसभा में विस्तार से हालात की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्र में शांति, बातचीत और कूटनीति के माध्यम से समाधान चाहता है। साथ ही वहां फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

खाड़ी क्षेत्र में करीब एक करोड़ भारतीय काम और पढ़ाई के लिए मौजूद हैं। ईरान में भी कई भारतीय छात्र और कर्मचारी हैं। संकट के बीच सरकार ने दूतावास और हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय किए हैं।तेहरान में भारतीय दूतावास ने कई छात्रों और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया। वहीं व्यवसायिक यात्रियों को आर्मेनिया के रास्ते भारत लौटने में मदद की गई। विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि दूतावास हाई अलर्ट पर है और पूरी तरह सक्रिय है।वहीं संसद भवन के बाहर विपक्ष ने प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि सरकार इस मुद्दे पर चुप है और देशहित के साथ समझौता कर रही है।28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने इजराइल और अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया। इस कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और तेल तथा गैस की कीमतों में तेजी आई है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा इस क्षेत्र पर निर्भर है। खाड़ी से आने वाला तेल और गैस देश की अर्थव्यवस्था और रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए बेहद जरूरी है। सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी आपूर्ति संकट से निपटने के लिए पूरी तैयारी है।जयशंकर ने कहा, ‘हमारे नागरिक सुरक्षित रहें, ऊर्जा सप्लाई बाधित न हो, और क्षेत्र में शांति कायम रहे – यही हमारी प्राथमिकता है।’ उन्होंने यह भी बताया कि करीब 67,000 भारतीय नागरिक पहले ही सुरक्षित लौट चुके हैं। बाकी लोगों की वापसी के लिए भी प्रयास लगातार जारी हैं।संकटग्रस्त क्षेत्र से नागरिकों की सुरक्षित वापसी एक चुनौतीपूर्ण काम है, लेकिन भारत सरकार हर संभव मदद सुनिश्चित कर रही है। इसके लिए विशेष हेल्पलाइन और एडवाइजरी जारी की गई है।

खाड़ी में अस्थिरता सीधे भारत की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सरकार का सतर्क रहना और रणनीतिक स्टॉक तैयार रखना महत्वपूर्ण है।विदेश मंत्रालय लगातार प्रभावित देशों के संपर्क में है। भारत किसी भी प्रकार के अप्रत्याशित संकट के लिए तैयार है, और यह सुनिश्चित कर रहा है कि भारतीय नागरिक सुरक्षित रहें और उनके जीवन पर कोई खतरा न आए।”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई खाड़ी देशों से सीधे बातचीत की है। उनका संदेश स्पष्ट है – शांति बनाए रखना और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

विश्व मीडिया में भी खाड़ी संकट को लेकर रिपोर्टिंग तेज हो गई है। तनाव, जंग और तेल कीमतों में तेजी को लेकर वैश्विक ध्यान इस क्षेत्र पर केंद्रित है।जयशंकर ने जोर देकर कहा कि भारत शांति, बातचीत और कूटनीति का पक्षधर है। तनाव कम करने, संयम बरतने और आम लोगों की सुरक्षा पक्की करने की वकालत करता है।खाड़ी में जंग फैल सकती है, लेकिन भारत की नजरें शांति, सुरक्षा और कूटनीति पर टिकी हैं। यही है भारत की प्राथमिकता।

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