सोना और चांदी में फिलहाल शॉर्ट टर्म में दबाव का माहौल देखा जा रहा है। हालांकि यह दबाव किसी बड़े क्रैश का संकेत नहीं है, बल्कि यह बाजार के सामान्य उतार-चढ़ाव और वेव साइकिल का हिस्सा है। अर्थव्यवस्था हमेशा सीधी रेखा में नहीं चलती। इसमें लगातार उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, जिन्हें पहले से समझना ही विश्लेषण का उद्देश्य होता है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार बाजार वेव पैटर्न में चलता है, जिसमें आमतौर पर दो तेजी और तीन गिरावट का चक्र देखा जाता है। वर्तमान स्थिति में सोना और चांदी दोनों में दो बड़ी तेजी के बाद दो गिरावट देखी जा चुकी हैं और तीसरी गिरावट की संभावना पर बाजार नजर बनाए हुए है।पहली गिरावट तेज होती है, दूसरी में रिकवरी आती है और तीसरी गिरावट अंतिम चरण होती है, जो प्रमुख सपोर्ट पर निर्भर करती है।
गोल्ड की तकनीकी स्थिति
गोल्ड के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटना यह रही कि उसने 200-डे मूविंग एवरेज का स्तर तोड़ दिया। यह स्तर 4454 डॉलर पर था और कीमत इसके नीचे फिसलकर 4366 डॉलर तक पहुंच गई। यदि गोल्ड दोबारा 4454 डॉलर के ऊपर टिकने में विफल रहता है तो अगला बड़ा सपोर्ट 4100 डॉलर पर दिखाई देता है। यदि 4100 डॉलर का स्तर भी टूटता है तो कीमत 4000 डॉलर या उससे नीचे तक जा सकती है। हालांकि ऐसी गिरावट को लंबी अवधि के निवेशकों के लिए खरीदारी का अवसर माना जा रहा है। आरएसआई और एमएसीडी जैसे तकनीकी संकेतक भी कमजोरी की ओर इशारा कर रहे हैं। आरएसआई में मोमेंटम कमजोर दिखाई दे रहा है जबकि एमएसीडी में निचली दिशा का रुख बनता दिख रहा है।
बाजार में बिकवाली के बीच एक सकारात्मक संकेत भी सामने आया है। तेल की कीमतों में गिरावट के कारण केंद्रीय बैंकों पर पड़ा दबाव कुछ कम हुआ है।कॉमेक्स में 1 जून की गोल्ड डिलीवरी 73.5 मीट्रिक टन दर्ज की गई है। यह मात्रा मई महीने की कुल डिलीवरी के बराबर बताई जा रही है। इसे बाजार में मजबूत फिजिकल डिमांड का संकेत माना जा रहा है। कॉमेक्स के पास इस समय 879 मीट्रिक टन गोल्ड मौजूद है।
सिल्वर की तकनीकी स्थिति
सिल्वर की तकनीकी स्थिति गोल्ड की तुलना में बेहतर दिखाई दे रही है। बाजार में फॉलिंग वेज पैटर्न बनता दिखाई दे रहा है, जिसे आमतौर पर गिरावट के बाद तेज रिकवरी का संकेत माना जाता है।सिल्वर का प्रमुख सपोर्ट 70.90 डॉलर पर है जबकि 73 डॉलर के आसपास भी मजबूत आधार मौजूद है। यदि कीमत इस क्षेत्र को बनाए रखने में सफल रहती है तो यहां से उछाल देखने को मिल सकता है। दूसरी ओर यदि 70.90 डॉलर टूटता है तो अगला महत्वपूर्ण स्तर 65 डॉलर होगा, जो इसका 200-डे मूविंग एवरेज है। फिलहाल 70.90 डॉलर का स्तर टूटना कठिन दिखाई दे रहा है। इसलिए निकट अवधि में सिल्वर 73 से 78 डॉलर के बीच कारोबार कर सकता है। 78 से 81 डॉलर के बीच बड़ा रेजिस्टेंस क्षेत्र मौजूद है।कॉमेक्स में 1 जून को 273 टन सिल्वर की डिलीवरी निर्धारित की गई है। पूरे महीने में सिल्वर की कुल डिलीवरी 1,022 मीट्रिक टन से अधिक रही है। कॉमेक्स के पास वर्तमान में 9,843 मीट्रिक टन सिल्वर उपलब्ध है।
1 मई को गोल्ड-सिल्वर रेशियो 62.5 था, जो अब घटकर 60.30 पर आ गया है। यह संकेत देता है कि हाल के दिनों में सिल्वर ने गोल्ड की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।कच्चे तेल की कीमतों में इस सप्ताह नरमी देखने को मिली। डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड लगभग 91 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया।
आगे मजबूती के प्रमुख कारण
हालांकि शॉर्ट टर्म में दबाव है, लेकिन कई बड़े फैक्टर सोने को आगे मजबूत बना सकते हैं:
1. तेल संकट का बाद का असर
तेल की गिरावट के बाद अक्सर 6–12 महीने में महंगाई बढ़ती है। ट्रांसपोर्ट, फर्टिलाइज़र और फूड कॉस्ट बढ़ते हैं, इसका असर धीरे-धीरे दिखाई देता है। जिससे इनफ्लेशन बढ़ता है और सोना मजबूत होता है।
2. वैश्विक आर्थिक कमजोरी
अमेरिकी हाउसिंग सेक्टर कमजोर है, वैश्विक बाजारों में अस्थिरता है, AI और टेक सेक्टर में प्राइवेट क्रेडिट का दबाव बढ़ रहा है। यह सब मिलकर सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ाते हैं।
3. कर्ज और क्रेडिट सिस्टम पर दबाव
दुनिया में सस्ता कर्ज देकर जो सिस्टम बना था, उसमें अब तनाव दिख रहा है। प्राइवेट क्रेडिट से पेंशन फंड की निकासी बढ़ रही है, जिससे जोखिम बढ़ता है और सोना मजबूत होता है।
4. केंद्रीय बैंकों की गतिविधि
हाल के समय में कॉमेक्स और वैश्विक बाजारों में बड़ी डिलीवरी और मूवमेंट देखा गया है। केंद्रीय बैंक अक्सर ऐसे समय में गोल्ड रिजर्व बढ़ाते हैं, जिससे सपोर्ट मिलता है।
5. डॉलर और ब्याज दरों का प्रभाव
डॉलर इंडेक्स 99 से नीचे स्थिर है। कमजोर डॉलर आमतौर पर सोने को सपोर्ट देता है।
6. दीर्घकालिक पैटर्न
इतिहास बताता है कि जब भी शेयर बाजार दबाव में आता है या आर्थिक संकट बढ़ता है, तो सोना और चांदी मजबूत होते हैं। 1973 के बाद भी यही देखा गया था कि बाजार गिरने के बाद सोने में बड़ी तेजी आई थी।
फिलहाल सोना और चांदी में शॉर्ट टर्म दबाव जरूर है, लेकिन यह किसी बड़े गिरावट का संकेत नहीं है।वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, तेल का असर, क्रेडिट सिस्टम का दबाव और मुद्रा बाजार की स्थिति को देखते हुए आने वाले समय में सोने और चांदी में मजबूती की पूरी संभावना बनी हुई है। निवेशकों के लिए यह समय सावधानी + अवसर दोनों का है।
Disclaimer:
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