नए फेड चीफ पर पूरी दुनिया की नजर
आज दुनिया को उस चीज का इंतजार था और ट्रंप को पिछले एक साल से इंतजार था कि फेड के चीफ पावेल जाएं और नया चीफ आए। अब नया चीफ आ चुका है। हालांकि 16 तारीख से वह पद पर आ चुके थे, लेकिन आज से वह आधिकारिक रूप से पदभार संभाल रहे हैं। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि केविन वार्श किस तरीके से अमेरिका की अर्थव्यवस्था को संभालते हैं।
ट्रंप क्यों थे पावेल से नाराज
ट्रंप लगातार यह कहते रहे कि पावेल ने जिस तरीके से ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखा, उससे अमेरिका की इकोनॉमी को नुकसान हुआ। उनका मानना था कि अगर समय रहते इंटरेस्ट रेट कट कर दिया जाता, तो अमेरिका की अर्थव्यवस्था तेजी से बाउंस कर सकती थी। खासकर प्रॉपर्टी मार्केट को राहत मिल सकती थी, जो इस समय 2007 जैसी स्थिति की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है। अब चूंकि केविन वार्श को ट्रंप के करीबी विचारों वाला माना जा रहा है, इसलिए बाजार को उम्मीद है कि ब्याज दरों को लेकर नई रणनीति सामने आ सकती है।
फेड के सामने सबसे बड़ा संकट
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि फेड क्या करेगा। अगर फेड इंटरेस्ट रेट घटाता है, तो महंगाई तेजी से बढ़ सकती है। अमेरिका में महंगाई पहले से ही ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। वास्तविक ब्याज दर लगभग नेगेटिव में दिखाई दे रही है। ऐसे में अगर ब्याज दरों को और नीचे लाया जाता है, तो महंगाई 4% के ऊपर जा सकती है, जो काफी खतरनाक स्थिति होगी।लेकिन अगर फेड ब्याज दरों को बढ़ाता है, तो दूसरा संकट पैदा होगा। ऊंची ब्याज दरों की वजह से प्रॉपर्टी मार्केट पर भारी दबाव आएगा। कोविड के बाद बेहद कम ब्याज दरों पर लोगों ने बड़े पैमाने पर लोन लिए थे। अब ईएमआई लगातार महंगी हो रही है और इससे रियल एस्टेट सेक्टर कमजोर पड़ रहा है।
प्राइवेट क्रेडिट मार्केट का खतरा
अमेरिका का प्राइवेट क्रेडिट सिस्टम भी इस समय एक बड़े खतरे के रूप में देखा जा रहा है। यह मार्केट ट्रिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंच चुका है। अगर ब्याज दरें और ऊपर जाती हैं, तो इस पूरे सिस्टम पर जबरदस्त दबाव पड़ सकता है। इसी वजह से फेड के लिए स्थिति बेहद कठिन है। अगर रेट घटाते हैं, तो महंगाई बढ़ेगी। अगर रेट बढ़ाते हैं, तो मंदी और वित्तीय संकट गहरा सकता है। और अगर कुछ नहीं करते, तो भी समस्या बनी रहेगी।
बॉन्ड यील्ड क्यों बनी चिंता
इस समय सबसे बड़ा संकट अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का तेजी से ऊपर जाना है। बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है। इसका मतलब यह है कि निवेशक अब अमेरिका को पैसा उधार देने के बदले ज्यादा ब्याज मांग रहे हैं। बॉन्ड यील्ड बढ़ना यह संकेत देता है कि अर्थव्यवस्था में कमजोरी है। बड़े निवेशक धीरे-धीरे बॉन्ड मार्केट से दूरी बनाने लगते हैं। हालांकि छोटे निवेशक ऊंचे ब्याज के लालच में बॉन्ड की तरफ जाते हैं, लेकिन लंबे समय में यह पूरी वित्तीय व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है।
अमेरिका के कर्ज का बढ़ता बोझ
अमेरिका पर इस समय भारी कर्ज है। सरकार को हर साल ट्रिलियन डॉलर में ब्याज चुकाना पड़ रहा है। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो सरकार का ब्याज खर्च और तेजी से बढ़ जाता है। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है। अमेरिका का कर्ज उसकी जीडीपी के मुकाबले लगभग 124% तक पहुंच चुका है। कई अर्थशास्त्रियों के अनुसार, जब किसी देश का कर्ज जीडीपी के मुकाबले बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो अर्थव्यवस्था की गति धीमी पड़ने लगती है।
क्या फिर से नोट छापने पड़ेंगे
अब फेड के सामने एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या उसे फिर से बड़े स्तर पर नोट छापने पड़ेंगे। अगर बाजार को संभालने के लिए लिक्विडिटी डाली जाती है, तो डॉलर कमजोर हो सकता है। डॉलर कमजोर होने का मतलब होगा कि गोल्ड और सिल्वर को मजबूती मिलेगी। हालांकि फिलहाल डॉलर इंडेक्स मजबूत दिखाई दे रहा है और यही वजह है कि गोल्ड और सिल्वर पर दबाव बना हुआ है।
गोल्ड और सिल्वर पर क्या असर होगा
गोल्ड और सिल्वर का बाजार इस समय पूरी तरह फेड की अगली चाल पर नजर बनाए हुए है। अगर फेड ब्याज दरों में कटौती करता है और डॉलर कमजोर होता है, तो गोल्ड और सिल्वर में तेजी आ सकती है। लेकिन अगर डॉलर इंडेक्स और मजबूत होता है, तो गोल्ड पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल डॉलर इंडेक्स 99.15 के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है और यह गोल्ड के लिए अल्पकालिक दबाव का कारण है।
गोल्ड को सपोर्ट करने वाले फैक्टर
गोल्ड इस समय मुख्य रूप से तीन बड़े फैक्टर पर आधारित है। पहला अमेरिका का बढ़ता कर्ज, दूसरा डॉलर इंडेक्स और तीसरा वैश्विक आर्थिक संकट की आशंका।इतिहास बताता है कि जब भी वैश्विक वित्तीय व्यवस्था पर दबाव बढ़ता है, तो गोल्ड सुरक्षित निवेश के रूप में उभरकर सामने आता है।
क्या गोल्ड रिजर्व का री-वैल्यूएशन हो सकता है
अमेरिका के पास लगभग 8,133 मीट्रिक टन गोल्ड रिजर्व मौजूद है। लेकिन उसका सरकारी मूल्यांकन अभी भी पुराने स्तर 42 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर है, जबकि मौजूदा बाजार कीमत 4,500 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस से ऊपर चल रही है। अगर भविष्य में फेड गोल्ड रिजर्व का पुनर्मूल्यांकन करता है, तो इससे फेड की बैलेंस शीट मजबूत हो सकती है। ऐसी स्थिति में गोल्ड की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
गोल्ड के अहम स्तर
गोल्ड के लिए सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट 4,500 डॉलर का है। अगर यह स्तर टूटता है, तो अगला सपोर्ट 4,350 डॉलर और उसके बाद 4,250 डॉलर पर दिखाई देता है। अगर गोल्ड 4,250 डॉलर के नीचे चला जाता है, तो इलियट वेव-3 का स्ट्रक्चर टूट सकता है, जिसने अब तक गोल्ड को मजबूती दी हुई है।
ऐसी स्थिति में ABC करेक्शन शुरू हो सकता है, जो गोल्ड को 4,000 डॉलर या उससे नीचे तक ले जा सकता है।
वहीं दूसरी तरफ, अगर गोल्ड 4,500 डॉलर के ऊपर मजबूती बनाए रखता है, तो पहला रेजिस्टेंस 4,630 डॉलर पर दिखाई देता है। इसके ऊपर 4,800 डॉलर का स्तर महत्वपूर्ण होगा। अगर गोल्ड 4,900 डॉलर को मजबूती से तोड़ देता है, तो इलियट वेव-3 अपने पीक मोमेंटम में आ सकती है और गोल्ड की कीमत 5,200 डॉलर तक पहुंच सकती है।
सिल्वर में क्या संकेत मिल रहे हैं
सिल्वर में भी इस समय दबाव बना हुआ है। गोल्ड-सिल्वर रेशियो पर बाजार की खास नजर है। फिलहाल यह रेशियो लगभग 60 के आसपास बना हुआ है।अगर यह रेशियो 56 के नीचे आता है, तो सिल्वर में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है। लेकिन अगर यह रेशियो 65 के ऊपर जाता है, तो सिल्वर कमजोर बना रह सकता है।
तेल बाजार और मिडिल ईस्ट का असर
मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव भी बाजार को प्रभावित कर रहा है। ईरान को लेकर अमेरिका की रणनीति और संभावित सैन्य कार्रवाई की चर्चाओं ने तेल बाजार को अस्थिर बना दिया है।अगर तेल की कीमतें 110 डॉलर के ऊपर स्थिर होती हैं, तो यह वैश्विक महंगाई को बढ़ा सकती हैं। क्योंकि तेल खरीदने के लिए डॉलर की मांग तेज हो जाएगी। इससे डॉलर मजबूत होगा और गोल्ड पर दबाव बढ़ सकता है।
शेयर बाजार क्यों डरा हुआ है
अमेरिकी शेयर बाजार इस समय बेहद ऊंचे वैल्यूएशन पर माना जा रहा है। अगर वहां बड़ी बिकवाली शुरू होती है, तो उसका असर दुनियाभर के बाजारों पर दिखाई देगा।भारतीय शेयर बाजार भी इस समय वैश्विक अनिश्चितताओं से प्रभावित है। निवेशक तेल की कीमतों, डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी ब्याज दरों और मिडिल ईस्ट संकट को लेकर डरे हुए हैं।
निवेशकों को क्या करना चाहिए
ऐसे माहौल में सबसे जरूरी बात यह है कि निवेशक डर और लालच से बचें। हर गिरावट बिकवाली का संकेत नहीं होती और हर तेजी खरीदारी का मौका नहीं होती। किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले उसके फंडामेंटल्स, कर्ज, प्रॉफिट, बैलेंस शीट और बिजनेस मॉडल को समझना बेहद जरूरी है।
अच्छे निवेश की पहचान कैसे करें
निवेश करते समय कंपनी का आरओई, आरओसीई, नेट प्रॉफिट मार्जिन, प्रमोटर होल्डिंग, डिविडेंड रिकॉर्ड और वैल्यूएशन जरूर देखना चाहिए। एक अच्छी कंपनी अगर बहुत महंगे वैल्यूएशन पर खरीदी जाए, तो नुकसान हो सकता है। लेकिन मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनी अगर उचित कीमत पर मिले, तो वह लंबी अवधि में शानदार रिटर्न दे सकती है।
बाजार फिलहाल वेट एंड वॉच मोड में
फिलहाल पूरा बाजार नए फेड चेयरमैन के फैसलों का इंतजार कर रहा है। आने वाला समय “वेट एंड वॉच” वाला दिखाई दे रहा है। हर मीटिंग, हर बयान और हर आर्थिक संकेत पर बाजार की नजर बनी रहेगी। गोल्ड, सिल्वर, डॉलर, तेल और शेयर बाजार,आने वाले समय में इन सभी की दिशा काफी हद तक फेड की अगली रणनीति पर निर्भर करेगी।




