पंजाब में बढ़ रहा डायबिटीज का खतरा, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 2300 मरीजों के इलाज पर खर्च हुए 6.5 करोड़ रुपये।

0
14

पंजाब में मधुमेह का असर अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कामकाजी उम्र के लोगों में भी इसके गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत स्टेट हेल्थ एजेंसी पंजाब की ओर से 21 जुलाई 2026 तक जारी आंकड़ों के मुताबिक, मधुमेह से जुड़े 2,300 उपचार मामलों पर करीब 6.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इनमें 36 से 60 वर्ष आयु वर्ग के 1,123 मामले सबसे अधिक रहे, जबकि 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के 809, 17 से 35 वर्ष के 243 और 0 से 16 वर्ष के 125 मामले दर्ज किए गए। उपचार के आंकड़ों में डायबिटिक कीटोएसिडोसिस सबसे अधिक सामने आने वाली गंभीर स्थिति रही, जबकि डायबिटिक फुट दूसरी प्रमुख जटिलता के रूप में सामने आया। कई मरीजों को डायलिसिस, आईसीयू उपचार, रक्त चढ़ाने के साथ-साथ सीटी, एमआरआई और डायबिटिक फुट सर्जरी जैसी उन्नत चिकित्सा सेवाओं की जरूरत पड़ी।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने इन आंकड़ों को परिवारों के लिए चेतावनी बताते हुए लोगों से मधुमेह के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने और नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच कराने की अपील की। बार-बार प्यास लगना और पेशाब आना, धुंधला दिखना, अत्यधिक थकान, पैरों में सुन्नपन और लंबे समय तक घाव का न भरना इसके संभावित संकेत हो सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक समय पर स्क्रीनिंग, संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन बनाए रखना और तंबाकू व शराब के अत्यधिक सेवन से बचना मधुमेह और इसकी गंभीर जटिलताओं के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है। सरकार के अनुसार मुख्यमंत्री सेहत योजना गंभीर मामलों में उपचार का खर्च उठाकर मरीजों को आर्थिक राहत दे रही है, लेकिन बीमारी की रोकथाम और समय पर जांच को भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here