चीन की आक्रामक सिल्वर खरीदारी.क्या सिल्वर बनेगा अगला ‘रेयर अर्थ’?

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गोल्ड, सिल्वर और शेयर बाजार की नजर ईरान-अमेरिका वार्ता पर टिकी हुई है। एक तरफ बातचीत जारी है, वहीं दूसरी तरफ सैन्य तनाव भी लगातार बढ़ रहा है। हॉर्मुज क्षेत्र में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान की मिसाइल लॉन्च साइट्स और माइंस बिछाने वाली नौकाओं को नष्ट करने की बात कही है। दूसरी ओर, ईरान का दावा है कि उसने बंदर अब्बास के पास एक ड्रोन मार गिराया है। यानी बातचीत और टकराव दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि “डील होगी तो शानदार होगी, नहीं तो नहीं होगी।” ट्रंप का “No Dust, No Dollar” बयान इसी नीति की ओर इशारा करता है। हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी बड़ा विवाद बना हुआ है।

OIL & GOLD-SILVER

मान लें कि डील हो भी जाती है और हॉर्मुज पूरी तरह खुल जाता है, तब भी सप्लाई तुरंत सामान्य नहीं होगी। लगभग 166 टैंकर अब भी फंसे हुए हैं और करीब 170 मिलियन बैरल तेल अटका हुआ है। इस सप्लाई को सामान्य होने में लगभग तीन महीने लग सकते हैं। वहीं तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान की भरपाई में छह महीने तक का समय लग सकता है।हालांकि ट्रंप के सकारात्मक बयानों के बाद तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई। डब्ल्यूटीआई लगभग 93 डॉलर और ब्रेंट करीब 99 डॉलर तक आ गया। अगर तेल 100 डॉलर के ऊपर जाता है तो महंगाई पर बड़ा दबाव बढ़ सकता है।

अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर है कि वह ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला करता है। यदि तेल की कीमतें कुछ नरम रहती हैं तो फेड भविष्य में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। ऐसा होने पर गोल्ड और सिल्वर दोनों को मजबूती मिल सकती है।इसके अलावा, यदि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए फेड आगे चलकर लिक्विडिटी बढ़ाता है और बाजार में ज्यादा पैसा आता है, तो यह भी कीमती धातुओं के लिए सकारात्मक संकेत होगा।

इस बीच गोल्डमैन सैक्स की एक रिपोर्ट में अमेरिका के प्राइवेट क्रेडिट सिस्टम को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार वहां इनफ्लो कम और आउटफ्लो ज्यादा दिखाई दे रहा है। यदि यह सिस्टम कमजोर पड़ता है तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है। यूरोप की स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं दिख रही। फ्रांस दबाव में है, जर्मनी फिलहाल अपने प्रोडक्शन सेक्टर के सहारे टिके रहने की कोशिश कर रहा है। यूके के बॉन्ड यील्ड 5% के ऊपर पहुंच चुके हैं। जापान, इटली और स्पेन भी आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। यानी सिर्फ अमेरिका ही नहीं, पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय चुनौतियों से घिरी हुई है। यही माहौल आने वाले समय में गोल्ड और सिल्वर को सपोर्ट दे सकता है।

CHINA & SILVER

अब सिल्वर की बात करें तो चीन की खरीदारी ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है।
25 मार्च को चीन के पास लगभग 676 मेट्रिक टन सिल्वर था।
24 अप्रैल तक यह बढ़कर 1137 मेट्रिक टन हो गया।
और अब यह करीब 1822 मेट्रिक टन तक पहुंच चुका है।

यानी सिर्फ दो महीनों में चीन ने लगभग 1146 टन सिल्वर जोड़ लिया है।

इसके पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला कारण इंडस्ट्रियल डिमांड है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बन चुका है। सोलर पैनल, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक सिस्टम में सिल्वर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। AI और डेटा सेंटर की बढ़ती मांग ने भी सिल्वर की जरूरत को और बढ़ा दिया है, क्योंकि डेटा सेंटर में भारी मात्रा में ऊर्जा और हाई-कंडक्टिव मटेरियल की आवश्यकता होती है।

दूसरा बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय प्राइस गैप है। चीन और अंतरराष्ट्रीय बाजार के सिल्वर रेट में लगभग 10 डॉलर का अंतर देखा जा रहा है। व्यापारी न्यूयॉर्क और लंदन से सिल्वर खरीदकर चीन में बेच रहे हैं और अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। इसी वजह से बड़ी मात्रा में फिजिकल सिल्वर चीन की ओर जा रहा है।दूसरी तरफ कॉमेक्स में सिल्वर का स्टॉक लगातार घट रहा है। पिछले चार वर्षों से सिल्वर मार्केट सप्लाई डेफिसिट में चल रहा है।

चीन लंबे समय की रणनीति के तहत सिल्वर पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है, ठीक वैसे ही जैसे उसने वर्षों पहले रेयर अर्थ मेटल्स में किया था। भविष्य AI, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऊर्जा का माना जा रहा है, और इन सभी सेक्टरों में सिल्वर की भूमिका बेहद अहम है। गोल्ड-सिल्वर रेशियो इस समय लगभग 59 पर है। यदि यह 55 के नीचे जाता है तो सिल्वर, गोल्ड के मुकाबले ज्यादा तेजी दिखा सकता है।

GOLD

अब बात गोल्ड की,हाल के तेल संकट के कारण कई देशों ने अपने गोल्ड रिजर्व बेचे, जिससे सोने पर कुछ दबाव देखने को मिला। लेकिन अगले छह महीनों में फेड की पॉलिसी, वैश्विक आर्थिक कमजोरी, यूरोप और जापान की स्थिति तथा बढ़ती लिक्विडिटी जैसे फैक्टर्स गोल्ड को मजबूती दे सकते हैं।

फिलहाल बाजार पूरी तरह न्यूज-ड्रिवन बना हुआ है। ईरान-अमेरिका डील से जुड़ी हर खबर पर बाजार तेजी से प्रतिक्रिया दे रहा है। लंबी अवधि के नजरिए से देखें तो गोल्ड और सिल्वर दोनों का आउटलुक अभी भी मजबूत दिखाई देता है। इसलिए रोज के छोटे उतार-चढ़ाव पर ज्यादा ध्यान देने की बजाय बड़े ट्रेंड पर नजर रखना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।

Disclaimer:
यह जानकारी केवल शैक्षणिक एवं एजुकेशनल उद्देश्य (Education Purpose) के लिए प्रस्तुत की गई है। यह किसी भी प्रकार की निवेश सलाह (Investment Advice) नहीं है। शेयर बाजार, सोना-चांदी या किसी भी वित्तीय बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या SEBI Registered Analyst से सलाह अवश्य लें। किसी भी लाभ या हानि के लिए लेखक अथवा प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होगा।

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