मध्यप्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद से दिल्ली तक सियासी खलबली मच गई।मंगलवार को चुनाव अधिकारियों ने हलफनामे में अनियमितताएं पाए जाने के आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया था। जिसके बाद कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली और भोपाल में चुनाव आयोग के दफ्तरों के बाहर धरना दिया था। बीजेपी ने आरोप लगाया था कि उन्होंने शपथ पत्र में हैदराबाद कोर्ट के एक लंबित मामले की जानकारी छिपाई है।तो वहीं नटराजन का नामांकन खारिज होने को कांग्रेस ने ‘लोकतंत्र की हत्या’ और ‘सीट चोरी’ बताया है।

निर्वाचन आयोग से कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल की हुई मुलाकात
इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात की।आयोग दफ्तर से बाहर आने के बाद कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा- मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करने का रिटर्निंग ऑफिसर (RO) का फैसला गलत है और कानून के मुताबिक नहीं है। जिस आधार पर नामांकन रद्द किया गया, उसका कानून में कोई प्रावधान नहीं है।मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ ऐसा कोई आपराधिक मामला नहीं था, जिसका उन्हें खुलासा करना पड़ता। सिंघवी ने बताया कि कोर्ट ने सिर्फ एक नोटिस भेजा था। इसमें मीनाक्षी नटराजन से पूछा गया था कि मामले में आगे सुनवाई शुरू की जाए या नहीं। सिंघवी ने कहा कि चुनाव आयोग के पास रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला बदलने या रद्द करने का पूरा अधिकार है। आयोग पहले भी हरियाणा और गुजरात के मामलों में ऐसा कर चुका है। इसलिए इस मामले में भी चुनाव आयोग कार्रवाई कर सकता है।बता दें, प्रतिनिधिमंडल में केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, रणदीप सुरजेवाला, सचिन पायलट, भूपेश बघेल, दीपा दासमुंशी, विवेक तन्खा, मीनाक्षी नटराजन, मोहम्मद अली खान और उमर होडा शामिल हैं।

वहीं मध्यप्रधेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस के कार्यकर्ता बुधवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के दफ्तर पहुंचे। गेट बंद मिलने पर उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ड्रेस दफ्तर के बाहर गेट पर टांग दी और लौट गए।

तेलंगाना से कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द होने पर कहा, “मध्य प्रदेश में मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द किया जाना चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाता है। तेलंगाना में दर्ज निजी शिकायत के आधार पर उनका नामांकन खारिज नहीं किया जाना चाहिए था, क्योंकि नोटिस मिलने पर वह उसका जवाब दे चुकी थीं।
मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला
रिटर्निंग ऑफिसर के अनुसार, नामांकन रद्द करने का कारण मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ तेलंगाना की कोर्ट में एक निजी शिकायत (परिवाद) दर्ज होना है। कोर्ट ने 17 सितंबर 2025 को समन जारी कर उन्हें पेश होने का आदेश दिया था। रिटर्निंग ऑफिसर ने इस पर तीन बातें कही, पहली शपथ पत्र में शिकायत का जिक्र नहीं होने से एफिडेविट अधूरा माना जाता है।दूसरी समन जारी होने के कारण मामला लंबित और सक्रिय माना गया।तीसरी समन के जवाब में पक्ष रखने से यह माना गया कि मीनाक्षी को मामले की जानकारी थी।आदेश में कहा गया कि अधूरा एफिडेविट यानि फॉर्म 26 जमा किया गया और अहम जानकारी छिपाई गई। इसलिए हैंडबुक के अध्याय 6 के पॉइंट 10(xiii) के तहत नामांकन रद्द कर दिया गया।
आपको बता दें BNSS की धारा 223 के तहत किसी भी नागरिक को मजिस्ट्रेट द्वारा निजी आपराधिक शिकायत दर्ज करने और अभियुक्त के तौर पर नोटिस मिलने पर अपना पक्ष रखने का कानूनी अधिकार है।हालांकि, इस प्रक्रिया को चुनावी हलफनामे यानि फार्म 26 में लिखना अनिवार्य नहीं है, आपको केवल उन लंबित मामलों या दोषसिद्धियों का विवरण देना होता है जहां सक्षम अदालत ने संज्ञान लेते हुए आरोप तय कर दिए हों या मजिस्ट्रेट ने समन जारी कर दिया गया हो, बीएनएसएस की धारा 223 का नोटिस केवल एक ‘कारण बताओ’ चरण है,इसलिए इसे ‘लंबित आपराधिक मामले’ या ‘समन जारी होने वाले मामले’ के रूप में फॉर्म 26 में घोषित करने की आवश्यकता नहीं होती है।




