I.N.D.I.A. गठबंधन ने देशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंका। 2 से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च। 19 विपक्षी दलों ने किया ऐलान।

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विपक्ष के I.N.D.I.A. गठबंधन ने चुनाव प्रणाली में गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए मोदी सरकार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई 19 विपक्षी दलों की एक अहम बैठक के बाद नेताओं ने 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक देशभर में जिला स्तर पर ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च निकालने का बड़ा ऐलान किया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में भारी हेरफेर करके विपक्षी वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं, जिसे उन्होंने सीधे तौर पर वोट चोरी करार दिया है।

इस बड़े आंदोलन की रणनीति के तहत विपक्ष सड़क से लेकर राष्ट्रपति भवन तक अपनी आवाज बुलंद करेगा। जिला स्तर पर प्रदर्शनों के बाद 6 अक्टूबर को विपक्ष के सभी सांसद दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर का घेराव करेंगे और ‘मार्च टू इलेक्शन कमीशन’ निकालेंगे। इसके साथ ही, विपक्ष के शीर्ष नेताओं ने अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में भारत के राष्ट्रपति से मिलकर इस मुद्दे पर दखल देने की मांग करने का फैसला किया है। इस पूरे विरोध प्रदर्शन का समापन 1 नवंबर को दिल्ली में आयोजित होने वाली एक मेगा रैली के साथ होगा।

इस देशव्यापी प्रदर्शन में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, आरजेडी, शिवसेना (UBT), और वामपंथी दलों सहित कुल 19 प्रमुख राजनीतिक दल एक साथ मिलकर हुंकार भर रहे हैं। विपक्ष ने इस बार ईवीएम को हटाकर फिर से बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग को बेहद आक्रामक तरीके से उठाया है। हालांकि आम आदमी पार्टी और डीएमके इस बैठक में शामिल नहीं हुए, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर विपक्षी एकजुटता का समर्थन करने के संकेत दिए हैं, जिससे आने वाले दिनों में देश का सियासी पारा चढ़ना तय माना जा रहा है।

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