गुजरात का सूरत शहर वैसे तो अपने लजीज खान-पान और दुनिया भर में मशहूर हीरा कारोबार के लिए जाना जाता है. लेकिन इसी सूरत के अथवाल लाइन्स इलाके में एक ऐसी जगह मौजूद है, जिसके बारे में सुनकर पहली बार में किसी का भी सिर चकरा सकता है. क्या आपने कभी ऐसे मंदिर के बारे में सोचा है जहां भगवान को हाथ जोड़कर अगरबत्ती नहीं, बल्कि सुलगती हुई सिगरेट चढ़ाई जाती हो? जी हां, सुनने में यह किसी हॉरर फिल्म की कहानी या अंधविश्वास लग सकता है, लेकिन यह सौ प्रतिशत सच है. आज हम आपको ले चल रहे हैं करीब 100 साल पुराने भूत मामा मंदिर के सफर पर, जिसका रहस्य जानने के बाद विज्ञान भी हैरान है और लोगों की आस्था अटूट है.
कौन हैं ‘भूत मामा’?
आमतौर पर हमारे देश में मंदिरों के नाम देवी-देवताओं या ऋषियों के नाम पर होते हैं, लेकिन भूत मामा नाम सुनकर ही पहली बार में रोंगटे खड़े हो जाते हैं. हालांकि, इस मंदिर में डर का कोई माहौल नहीं है. हर रोज यहां सैकड़ों की तादाद में लोग दर्शन के लिए आते हैं, जिनके हाथों में पूजा की थाली के साथ-साथ सिगरेट के पैकेट्स साफ देखे जा सकते हैं.स्थानीय मान्यताओं और बुजुर्गों के अनुसार, करीब एक सदी पहले इस इलाके में एक इंसान रहते थे, जिन्हें प्यार से मामा कहा जाता था. मामा बेहद दयालु स्वभाव के थे और हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते थे. उनकी एक खास आदत थी उन्हें सिगरेट और बीड़ी पीने का बहुत शौक था. कहा जाता है कि उनके निधन के बाद इस जगह पर उनकी याद में एक छोटी सी जगह (ओटला) बनाई गई. धीरे-धीरे लोगों ने महसूस किया कि जो भी यहां आकर सच्चे दिल से मन्नत मांगता है, उसकी परेशानी दूर हो जाती है. चूंकि उन्हें अपने जीवनकाल में सिगरेट बेहद पसंद थी, इसलिए भक्तों ने मन्नत पूरी होने की खुशी में उन्हें सिगरेट अर्पित करना शुरू कर दिया. समय के साथ इस जगह ने एक मंदिर का रूप ले लिया और वे एक लोक देवता के रूप में पूजे जाने लगे.
कैसे चढ़ाई जाती है सिगरेट?
इस मंदिर के नियम भी बेहद दिलचस्प हैं. यहां भगवान को सिगरेट सिर्फ पैकेट में बंद करके नहीं चढ़ाई जाती, बल्कि नियम यह है कि भक्तों को सिगरेट खुद जलानी पड़ती है. इसके बाद सुलगती हुई सिगरेट को बाबा के सामने बने विशेष स्टैंड में रखना होता है. यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि भूत मामा बेहद दयालु हैं. चाहे कोर्ट-कचहरी का मामला हो, नौकरी की समस्या हो, या फिर सेहत की खराबी अगर किसी ने यहां आकर भूत मामा को सिगरेट चढ़ाने की मन्नत मांग ली, तो उनका काम पूरा हो जाता है. जब मन्नत पूरी हो जाती है, तो लोग अपनी क्षमता के अनुसार महंगी से महंगी सिगरेट के पैकेट लाकर चढ़ाते हैं. रविवार और विशेष त्योहारों के दिन तो यहाँ पैर रखने की भी जगह नहीं होती.
आस्था बनाम अंधविश्वास
आज के इस आधुनिक दौर में जहां विज्ञान हर चीज के पीछे लॉजिक ढूंढता है, वहीं भूत मामा का यह मंदिर आस्था और विश्वास की एक अनूठी मिसाल पेश करता है. कुछ लोग इसे अंधविश्वास या बुरी आदतों को बढ़ावा देने वाली जगह मान सकते हैं. यहां आने वाले लोगों का सोचना इससे बिल्कुल अलग है. वे इसे केवल एक लोक परंपरा मानते हैं जो सदियों से चली आ रही है. उनके लिए सिगरेट कोई नशा नहीं, बल्कि एक प्रसाद या भेंट है जो उन्होंने अपने प्रिय मामा को खुश करने के लिए दी है. लोगों का कहना है कि यह मंदिर किसी को भी सिगरेट पीने के लिए प्रेरित नहीं करता, बल्कि यह उस नेक इंसान के प्रति सम्मान दिखाने का एक तरीका है जिसने जीवनभर दूसरों की भलाई की थी.भारत ऐसे ही अनगिनत रहस्यों और विविधताओं से भरा देश है. कहीं बुलेट मोटरसाइकिल की पूजा होती है, तो कहीं भगवान को सिगरेट पिलाई जाती है. यही अतरंगी संस्कृतियां हमारे देश को दुनिया का सबसे दिलचस्प और अनूठा देश बनाती हैं.




