Nithari Hatyakand: मासूमों की चीखों से थर्राया था देश; निठारी हत्याकांड में बरी हुआ आरोपी सुरेंद्र कोली हरिद्वार में फंदे से लटका मिला

दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी गांव स्थित पंधेर की कोठी के पीछे बने नाले से एक के बाद एक कई बच्चों और महिलाओं के कंकाल बरामद हुए. इस दिल दहला देने वाले खुलासे के बाद पंधेर और कोली को गिरफ्तार किया गया.

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देश के सबसे चर्चित और भयावह आपराधिक मामलों में शामिल नोएडा के निठारी कांड के मुख्य आरोपियों में से एक सुरेंद्र कोली की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है. उत्तराखंड के हरिद्वार में अपनी चाय की दुकान में उसका शव फांसी के फंदे से लटकता हुआ पाया गया. शुरुआती जांच के आधार पर स्थानीय पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है. निठारी कांड के सभी मामलों में सबूतों के अभाव के कारण कोर्ट से रिहा होने के बाद कोली हरिद्वार आकर बस गया था और चाय का छोटा-मोटा ढाबा चलाकर अपनी आजीविका कमा रहा था.

कौन था सुरेंद्र कोली?

मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के एक दूरदराज़ गांव से ताल्लुक रखने वाला सुरेंद्र कोली बेहद सामान्य और गरीब परिवार से था. गांव में चरवाहे का काम करने के बाद वह साल 2000 के आसपास काम की तलाश में दिल्ली आया. साल 2003 में वह व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंधेर के संपर्क में आया और नोएडा सेक्टर-31 स्थित उसकी डी-5 कोठी में केयरटेकर और घरेलू नौकर के रूप में काम करने लगा.

क्या था निठारी कांड और पूरा घटनाक्रम?

दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी गांव स्थित पंधेर की कोठी के पीछे बने नाले से एक के बाद एक कई बच्चों और महिलाओं के कंकाल बरामद हुए. इस दिल दहला देने वाले खुलासे के बाद पंधेर और कोली को गिरफ्तार किया गया. शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने जांच की, लेकिन जनवरी 2007 में मामला सीबीआई को सौंप दिया गया. 2009 से लेकर 2017 के दौरान सीबीआई की विशेष अदालतों ने कोली को कई मामलों में फांसी की सजा सुनाई. 2014 में राष्ट्रपति ने उसकी दया याचिका खारिज कर दी थी और मेरठ जेल में उसकी फांसी की तारीख भी तय हो गई थी, लेकिन अंतिम क्षणों में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से फांसी पर रोक लग गई. जांच एजेंसियों की ढिलाई, कबूलनामे में कमियां और पुख्ता फॉरेंसिक साक्ष्य पेश न कर पाने के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट और अंततः सुप्रीम कोर्ट ने कोली को विभिन्न मामलों से बरी कर दिया. 11 नवंबर 2025 को उसके खिलाफ लंबित अंतिम मामले में भी ठोस सबूत न मिलने के चलते उसे कानूनी रूप से बरी कर दिया गया.

जेल से रिहा होने के बाद की जिंदगी

कानूनी तौर पर बरी होने के बाद सुरेंद्र कोली ने अपनी पहचान छुपाकर हरिद्वार में जीवन की नई शुरुआत की थी. वह वहां एक चाय की दुकान चलाकर अपना गुजर-बसर कर रहा था. शुक्रवार को उसी दुकान से उसका शव बरामद होने के बाद इस पूरे मामले से जुड़ा एक और अध्याय हमेशा के लिए समाप्त हो गया. पुलिस फिलहाल घटना के कारणों की विस्तृत जांच कर रही है.

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