इसी तर्क का सहारा लेकर ये तीनों बड़े देश अंतर्राष्ट्रीय समझौते से बाहर निकल गए और अपनी राष्ट्रीय चिंताओं और हित को ज्यादा तवज्जो दी। अभी हाल ही में पाकिस्तान के मंत्री ने अताउल्लाह तरार ने एक सेमिनार में कहा है कि भारत इंडस वॉटर ट्रीटी यानी सिंधु जल समझौते को संशोधित, रद्द या निलंबित नहीं कर सकता है। लेकिन पाकिस्तान ने भारत की चिंता आतंकवाद पर मुंह सिल लिया है।
नई दिल्ली। जिस तरह से पाकिस्तान भारत को सिंद्धू जल संधि के रद्द होने के बाद से ही धमकियां दे रहा है इससे एक बात तो बिल्कुल साफ हो जाती है कि पाकिस्तान की जमीन अब बंजर होने की कगार पर पहुंच चुकी है। सिंधु जल समझौते पर पाकिस्तान बिलबिला रहा है। पहलगाम के आतंकी हमले के बाद भारत ने समझौते को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया। अब पाकिस्तान गीदड भभकियां दे रहा है। लेकिन बड़बोले पाकिस्तान को ये पता नहीं है कि भारत के पास अमेरिका, रूस और चीन द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक तर्क है।
इसी तर्क का सहारा लेकर ये तीनों बड़े देश अंतर्राष्ट्रीय समझौते से बाहर निकल गए और अपनी राष्ट्रीय चिंताओं और हित को ज्यादा तवज्जो दी। अभी हाल ही में पाकिस्तान के मंत्री ने अताउल्लाह तरार ने एक सेमिनार में कहा है कि भारत इंडस वॉटर ट्रीटी यानी सिंधु जल समझौते को संशोधित, रद्द या निलंबित नहीं कर सकता है। लेकिन पाकिस्तान ने भारत की चिंता आतंकवाद पर मुंह सिल लिया है।

हालांकि भारतीय रक्षा विशेषज्ञों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़े देशों द्वारा किए गए समझौतों के उल्लंघन का उदाहरण देकर भारत के अधिकारों पर जोर दिया है। इस मामले पर कहा जा रहा है कि भारत को आतंकवाद को लेकर अपनी चिंता दूर करने के लिए हर प्रयास को उठाने का अधिकार रखता है। इस मामले में पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल पीआर शंकर ने X पर ट्वीट किया और लिखा कि अगर अमेरिका JCPOA से हट सकता है, रूस INF ट्रीटी से दूर जा सकता है। चीन दक्षिण चीन सागर पर हेग के फैसले को खारिज कर सकता है। तो भारत भी राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में IWT को अस्थायी रूप से निलंबित क्यों नही्ं कर सकता।
कहने का अर्थ साफ है कि दुनिया की बड़ी ताकतों ने जब अंतरराष्ट्रीय समझौतों को नज़रअंदाज़ किया या उनसे बाहर निकल गए, जब वे उनके राष्ट्रीय हितों के काम के नहीं रहे थे। रक्षा विशेषज्ञ पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल पीआर शंकर का कहना है कि ताकतवर देश संधियों का सख्ती से पालन करने के बजाय रणनीतिक/राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरतों को ज़्यादा अहमियत देते हैं, इसलिए भारत भी IWT के मामले में ऐसा करने का अधिकार रखता है।
सिंधु जल समझौता 1960 में भारत और Pakistan के बीच हुआ एक ऐतिहासिक जल-बंटवारा समझौता है, जिसकी मध्यस्थता विश्व बैंक ने की थी। इस समझौते के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों को दो हिस्सों में बांटा गया। रावी, ब्यास और सतलुज का अधिकांश जल भारत को मिला, जबकि सिंधु, झेलम और चेनाब का उपयोग का अधिकार पाकिस्तान को दिया गया था।
पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के संदर्भ में भारत लंबे समय से इस समझौते की समीक्षा की मांग कर रहा था। आइए समझते हैं कि दुनिया की बड़ी ताकतें कब अपने राष्ट्रीय हित में अंतर्राष्ट्रीय समझौते से बाहर निकल गईं। अमेरिका का तर्क था कि यह डील बुनियादी तौर पर खराब थी। ट्रंप ने इसे अबतक का सबसे खराब डील कहा। अमेरिका का कहना है कि इसमें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम, क्षेत्रीय प्रॉक्सी गतिविधियों और “सनसेट क्लॉज़” (समय-सीमा वाली शर्तें) जैसे मुद्दों को ठीक से नहीं सुलझाया गया था, जिनकी वजह से ईरान को आगे चलकर एडवांस्ड न्यूक्लियर काम फिर से शुरू करने की इजाज़त मिल जाती।




