भज्जी करेंगे ‘आप’ का भंडाफोड़। कौन है आप का लाला? पार्टी छोड़ते ही नेताओं को क्यों याद आती नैतिकता?

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भज्जी करेंगे 'आप' का भंडाफोड़। कौन है आप का लाला? पार्टी छोड़ते ही नेताओं को क्यों याद आती नैतिकता?
भज्जी करेंगे 'आप' का भंडाफोड़। कौन है आप का लाला? पार्टी छोड़ते ही नेताओं को क्यों याद आती नैतिकता?

उनका यह पोस्ट एक यूजर के उस ट्वीट के जवाब में आया, जिसमें देवेंद्र यादव नामक एक शख्स ने उन पर गद्दारी करने के आरोप लगाए थे। यादव ने हरभजन सिंह से पूछा था कि ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि पंजाब के 800 से ज्यादा किसान भाइयों की मौत की जिम्मेदार पार्टी में वह चले गए? यादव ने यह भी पूछा था कि भाजपा में जाने के लिए आपने अपने जमीर की कितनी कीमत लगाई?

प्रिशिता शर्मा

जालंधर: आगामी साल में पंजाब में विधानसभा के चुनाव होने हैं। यह एकमात्र राज्य है जहां आम आदमी पार्टी की सरकार है। दिल्ली की सत्ता हाथ से जाना आप के लिए एक बड़ा झटका था। इसके बाद आम आदमी पार्टी पंजाब में अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी हुई थी, लेकिन यहां राघव चड्ढा ने आप का खेल बिगाड़ दिया। राघव चड्ढा को लेकर आलाकमान की नाराजगी पार्टी के लिए परेशानी का सबब बन गई। राघव चड्ढा के साथ आम आदमी पार्टी (AAP) के कुल सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ी थी। इनमें संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी, राजेंद्र गुप्ता और स्वाति मालीवाल शामिल थे। तब आप के कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़ने वाले हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, अशोक मित्तल के घरों के बाहर प्रदर्शन हुआ था। जालंधर, लुधियाना में विधायकों के घरों की दीवारों पर पेंट से ‘गद्दार’ लिख दिया गया था।

भज्जी ने खोली ‘आप’ की पोल!

इसके बाद ट्रोलर्स ने हरभजन सिंह को सोशल मीडिया पर ट्रोल करना शुरू कर दिया। राज्यसभा सांसद और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह को “गद्दार” कहा जाने लगा, जिस पर हरभजन सिंह भड़क गए और उन लोगों को आड़े हाथों लिया जिन्होंने उन्हें गद्दार कहा। एक सोशल मीडिया पोस्ट में पूर्व क्रिकेटर ने इशारों-इशारों में आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर पंजाब के लोगों को लूटने का आरोप लगाया है। हरभजन सिंह ने X पर पोस्ट कर लिखा, “समय आने पर हर बात का जवाब दूंगा। उन्होंने कहा कि मैंने आपके किसी लीडर को गाली तक नहीं दी है। अपनी जुबान क्यों गंदी करूं मैं। और मुझे गद्दार कहने वालों, पहले अपने लोगों से पूछो कि पंजाब की राज्यसभा सीट कितने में बेची थी। अगर ना बताए तो मैं आपको बताऊंगा कि किसको कितना चढ़ावा गया था और किसकी तरफ से। और कैसे किसको मंत्री-संतरी बनाया गया, पंजाब को लूटने के लिए और लाला को माल पहुंचाने के लिए। पंजाब को लूट खा गए।”

यूजर के पोस्ट के पर हरभजन ने दिया जवाब

उनका यह पोस्ट एक यूजर के उस ट्वीट के जवाब में आया, जिसमें देवेंद्र यादव नामक एक शख्स ने उन पर गद्दारी करने के आरोप लगाए थे। यादव ने हरभजन सिंह से पूछा था कि ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि पंजाब के 800 से ज्यादा किसान भाइयों की मौत की जिम्मेदार पार्टी में वह चले गए? यादव ने यह भी पूछा था कि भाजपा में जाने के लिए आपने अपने जमीर की कितनी कीमत लगाई? यह भी पूछा गया कि जिस आप ने राज्यसभा की सीट दी, उसके नेता को दिन-रात भला-बुरा क्यों कहते हो और उसकी दी गई राज्यसभा सीट से इस्तीफा क्यों नहीं दिया?

पहले भी आप पर लग चुके हैं सीट बेचने के आरोप

अप्रैल 2026 में कांग्रेस नेता अजय माकन ने भी आम आदमी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे ‘अरबपतियों की पार्टी’ बताया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी पैसों के बदले राज्यसभा सीटें आवंटित कर रही है। इससे पहले, 2018 में भी भाजपा नेता परवेश वर्मा ने आरोप लगाया था कि अरविंद केजरीवाल ने 50 करोड़ रुपये में राज्यसभा सीटें बेची हैं।

कई राज्यों में हुई सीटों की ‘खरीद-फरोख्त’

झारखंड ‘कैश-फॉर-वोट्स’ स्टिंग ऑपरेशन सभी को याद होगा। जून 2010 में हुए झारखंड राज्यसभा चुनाव के दौरान एक न्यूज़ चैनल और कोबरापोस्ट के स्टिंग ऑपरेशन में कांग्रेस, बीजेपी और जेएमएम के कई विधायकों को राज्यसभा उम्मीदवार के लिए पैसे मांगते हुए दिखाया गया था। कांग्रेस पर भी अतीत में विभिन्न राज्यों से राज्यसभा टिकट और सीटें पैसे या अन्य लाभों के बदले उद्योगपतियों और रसूखदार लोगों को देने के आरोप लगते रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की एकमात्र राज्यसभा सीट के चुनाव के दौरान भी पार्टी पर क्रॉस-वोटिंग और सीट के सौदे के आरोप लगे थे। उत्तर प्रदेश के चुनावों के दौरान बसपा पर भी राज्यसभा और विधान परिषद की सीटों के बदले पार्टी फंड में भारी रकम वसूलने के सार्वजनिक आरोप लगते रहे हैं।

पार्टी छोड़ने के बाद नेताओं को क्यों याद आती है नैतिकता?

पार्टी छोड़ने के बाद नेताओं को अक्सर जनता के विरोध का सामना करना पड़ता है, तब उन्हें ‘नैतिकता’ याद आ जाती है। कई बार राजनीतिक मजबूरी, महत्वाकांक्षा को सही ठहराने और डैमेज कंट्रोल के लिए नैतिकता का पाठ पढ़ाया जाने लगता है। फिर धड़ल्ले से जिस पार्टी में रहे, उसकी कमियां गिनाई जाने लगती हैं और जनता को गुमराह करने की कोशिश की जाती है। एक सोची-समझी रणनीति के तहत इसका इस्तेमाल किया जाता है। सीधे तौर पर पार्टी बदलने को जनता स्वार्थ से जोड़ सकती है, इसलिए नेता खुद को पीड़ित और अपनी पुरानी पार्टी को भ्रष्ट बताकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश करते हैं। राजनीति में अक्सर राजनेता ‘नैतिकता’ को एक ऐसे हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं, जिसका उपयोग चुनावों के समय अपने राजनीतिक फायदे और नुकसान को देखकर किया जाता है।

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