कर्नाटक के सीएम बने रहेंगे सिद्धारमैया, राज्यसभा का ऑफर ठुकराया! कांग्रेस हाईकमान की बैठक में क्या हुआ ? जानें

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नई दिल्ली। इंदिरा भवन में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में हुई कर्नाटक के मुख्यमंत्री के साथ बैठक 6 घंटे से ज्यादा चली। सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया को सीएम पद छोड़ने और राज्यसभा का ऑफर दिया गया, लेकिन सीएम पद छोड़ने के लिए सिद्धारमैया राजी नहीं हुए। हालांकि, बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को सिरे से नकार दिया। दरअसल, तीन दिन पहले राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल के बीच महत्वपूर्ण बैठक के बाद कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को दिल्ली तलब किया गया।

केसी वेणुगोपाल ने कहा – अटकलें लगाना बंद करें

कांग्रेस हाईकमान की बैठक खत्म होने के बाद केसी वेणुगोपाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि बैठक में राज्यसभा चुनाव और एमएलसी चुनाव को लेकर चर्चा हुई है। नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को केसी वेणुगोपाल ने सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा, “जो अटकलें लगाई जा रही हैं, उनमें कोई सच्चाई नहीं है। हमारी बैठक हुई। सीएम सिद्धारमैया, डिप्टी सीएम शिवकुमार और रणदीप सुरजेवाला इस बैठक में शामिल हुए। पूरी बातचीत राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव को लेकर हुई।”

राज्यसभा और विधान परिषद के होने हैं चुनाव

बैठक खत्म होने के बाद केसी वेणुगोपाल ने साफ किया कि राज्यसभा और विधान परिषद के चुनाव को लेकर चर्चा हुई है। राज्यसभा चुनावों को लेकर भी गहमागहमी जारी है, जिसमें चार सीटों पर चुनाव होने हैं। खड़गे का राज्यसभा सदस्य के तौर पर कार्यकाल खत्म हो रहा है और उनके कर्नाटक से ही एक बार फिर चुने जाने की संभावना है। इसके साथ ही पार्टी डीके शिवकुमार के भाई डीके सुरेश और पिछड़े वर्ग के किसी नेता या महिला उम्मीदवार को चुनावी मैदान में उतार सकती है। नेताओं ने विधान परिषद सीटों के लिए भी पार्टी के उम्मीदवारों पर चर्चा की। राज्य विधानसभा में कांग्रेस के संख्या बल को देखते हुए विधान परिषद की सात रिक्त सीटों में से कांग्रेस को चार सीटें मिलने की संभावना है।

कर्नाटक में सीएम फेस को लेकर लंबे समय से चल रहा नाटक

2023 में हुए विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने डीके शिवकुमार के नेतृत्व में लड़ा था और 135 सीटों के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। लेकिन वह सीएम बनने का मौका चूक गए थे। तभी सीएम फेस को लेकर कांग्रेस के कथित ढाई-ढाई साल वाले फॉर्मूले की चर्चा हुई और कांग्रेस हाईकमान ने पुराने और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को चुना, जिनकी साफ छवि और राजनीति में लंबा अनुभव सीएम पद के लिए सही माना गया। लेकिन सरकार के तीन साल पूरे होते ही नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा भी तेज हो गई। इससे पहले भी कर्नाटक में तनाव का माहौल रह चुका है। हाईकमान ने काफी मान-मनौव्वल के बाद मामला शांत करवाया था।कांग्रेस सरकार के तीन साल पूरे होने के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल भी होना है, लेकिन दिल्ली हाईकमान से हरी झंडी नहीं मिली। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच चल रहे संघर्ष को माना जा रहा है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच लंबे समय से सीएम पद को लेकर खींचतान चल रही है। नवंबर 2025 में सिद्धारमैया सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद डीके समर्थकों ने सीएम बदलने का अभियान तेज कर दिया था, जिसके बाद कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई थीं।

शिवकुमार के एक बयान से मची थी उथलपुथल

नवंबर 2025 में भी नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने कहा था, “मैं हमेशा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नहीं रह सकता।” उन्होंने यह भी बताया था कि मई 2023 में उपमुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने पद छोड़ने की पेशकश की थी, लेकिन आलाकमान ने उन्हें पद पर बने रहने के लिए कहा।शिवकुमार ने कहा था कि अब दूसरे नेताओं को भी मौका मिलना चाहिए। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा, “मैं नेतृत्व में रहूंगा। चिंता मत करिए, मैं फ्रंटलाइन में रहूंगा।”

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