पूरे सप्ताह बाजार की नजर ट्रंप और ईरान के बीच समझौते पर रही। पहले जहां युद्ध और तनाव की आशंका से तेल, डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी देखी जा रही थी, वहीं सप्ताह के अंत में राष्ट्रपति ट्रंप के एक बयान ने पूरी दुनिया के बाजार को राहत पहुंचाई। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ डील अंतिम चरण में है, जिससे ईरान पर लगे प्रतिबंध हट सकते हैं।
इसका असर हुआ,तेल की कीमत गिरी: डब्ल्यूटीआई क्रूड $85 और ब्रेंट क्रूड $90 पर आ गया। डॉलर कमजोर हुआ, डॉलर इंडेक्स घटकर 99.68 पर आ गया। बॉन्ड यील्ड गिरी,10 साल और 30 साल के बॉन्ड के दाम कम हुए, जो गोल्ड के लिए सकारात्मक है। यही कारण रहा कि गोल्ड और सिल्वर में जोरदार रिकवरी देखने को मिली और दुनिया भर के शेयर बाजारों में भी खरीदारी लौटी।
गोल्ड पूरे सप्ताह दबाव में रहा। एक समय ऐसा लग रहा था कि 4000 डॉलर का स्तर टूट जाएगा और बाजार 3900 डॉलर वाले जोन में प्रवेश कर जाएगा। लेकिन ट्रंप के बयान और डॉलर की कमजोरी ने गोल्ड को राहत दी। हालाँकि गोल्ड की चाल को अगर देखे तो पिछले शुक्रवार के मुकाबले 5.65% की गिरावट के साथ बंद हुआ , गोल्ड का का प्रदर्शन पिछले 30 दिनों में 12.39% की गिरावट दर्ज़ की गयी ,6 महीनों में 5% की गिरावट। अगर गोल्ड का 200 दिनों का मूविंग एवरेज (DMA) देखे तो वो 4372 है, जबकि गोल्ड इसके नीचे (4210) पर बंद हुआ ,जो दबाव का संकेत है। यानि गोल्ड से अब भी खतरा पूरी तरह से टला नहीं है। गोल्ड के लिए एक राहत की बात रही की 4090 के स्तर पर 11.08 मीट्रिक टन की जबरदस्त खरीदारी हुई, जो पूरे जून माह की सबसे बड़ी खरीदारी है। जो आने वाले समय में गोल्ड को मजबूती देगा ऐसा इससे देखने को मिला
गोल्ड में आगे का रुझान, गोल्ड अभी 200 DMA से नीचे है। इसे तोड़ना होगा 4,372 के पार जाना होगा,तभी तेजीआ सकती है। फिलहाल 4150 बड़ा प्रतिरोध (Resistance) और 3930 बड़ा समर्थन (Support) है। फिलहाल गोल्ड अभी भी अपने 200 डे मूविंग एवरेज के नीचे कारोबार कर रहा है, इसलिए तकनीकी रूप से दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।लेकिन एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है,जब-जब गोल्ड 200 डे मूविंग एवरेज से नीचे गया, तब भारी खरीदारी देखने को मिली। हाल के दिनों में 11 टन से अधिक की खरीदारी इसका संकेत है कि बड़े खिलाड़ी गिरावट में लगातार खरीदारी कर रहे हैं।
गोल्ड के लिए प्रमुख स्तर : 4150 डॉलर बड़ा रेजिस्टेंस, 4300 डॉलर अगला लक्ष्य,3930 डॉलर मजबूत सपोर्ट,दीर्घकालिक नजरिए से गोल्ड की कहानी अभी भी मजबूत दिखाई देती है।
अगर सिल्वर को देखे तो वो गोल्ड से ज्यादा मजबूत दिखा क्योंकि सिल्वर 200 डे मूविंग एवरेज के नीचे जाने के बाद दोबारा उसके ऊपर बंद होने में सफल रहा। जबकि गोल्ड 200 डीएमए की नीचे ही बंद हुआ, यह तकनीकी रूप से मजबूती का संकेत माना जाता है। पिछले कई महीनों से 61-65 डॉलर का क्षेत्र सिल्वर के लिए मजबूत सपोर्ट साबित हो रहा है,पिछले 6 महीना में चौथी बार सिल्वर इसी क्षेत्र से रिवर्स हुआ यानि 61 $ की दिवार को नहीं भेद पाया । हालाँकि सिल्वर की चाल को अगर देखे तो पिछले शुक्रवार के मुकाबले 8% की गिरावट के साथ बंद हुआ , सिल्वर का का प्रदर्शन पिछले 30 दिनों में 24% की गिरावट दर्ज़ की गयी ,6 महीनों में सिर्फ 0.71% की तेजी.
सिल्वर की कीमत जैसे जैसे ऊपर जायेगा बिकवाली का एक नया दवाब जंक सिल्वर (पुराना सिल्वर) से मिल सकता है जो भरी मात्रा में लोग बेचने के लिए आ रहे है, जंक सिल्वर लगभग 2 लाख मीट्रिक टन है। इसलिए जैसे ही कीमत बढ़ेगी, यह जंक सिल्वर बिक्री के लिए आएगा और कीमत पर दबाव बनाएगा।
डॉलर, तेल और बॉन्ड: तीनों ने बदली तस्वीर.गोल्ड और सिल्वर पर सबसे ज्यादा दबाव तीन कारणों से था-मजबूत डॉलर,महंगा कच्चा तेल,ऊंची बॉन्ड यील्ड.लेकिन इस सप्ताह तीनों में नरमी आई।तेल की कीमतें नीचे आईं, डॉलर इंडेक्स कमजोर हुआ और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी नीचे फिसली। इससे कीमती धातुओं को बड़ी राहत मिली।
विशेषज्ञों के अनुसार लंबी अवधि में गोल्ड-सिल्वर मजबूत रहेगा।डॉलर का दबाव कम होगा: तेल की कीमत गिरने से डॉलर की मांग कम होगी, जिससे गोल्ड को राहत मिलेगी।चीन और अमेरिका में सोलर पावर का बढ़ता उपयोग: इससे सिल्वर की डिमांड बढ़ेगी क्योंकि सिल्वर का उपयोग सोलर पैनल में होता है।
पिछले 15 साल का रिटर्न,गोल्ड: 9% (CAGR) & सिल्वर: 12% (CAGR)अगले 15 साल का अनुमान गोल्ड का रिटर्न बढ़कर 12% होने की संभावना है।सिल्वर 12% के आसपास ही रहेगा जंक सिल्वर के दबाव के कारण।
भारतीय शेयर बाजार: क्या नई तेजी की शुरुआत. निफ्टी और सेंसेक्स में इस सप्ताह शानदार उछाल देखने को मिला।
हालांकि विदेशी निवेशक (FII) लगातार बिकवाली कर रहे हैं, लेकिन घरेलू निवेशकों (DII) की खरीदारी बाजार को मजबूती दे रही है। विदेशी निवेशक अब तक इस साल में 3 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं। घरेलू निवेशक जबरदस्त खरीदारी कर रहे हैं। अब तक 4.42 लाख करोड़ रुपये के शेयर खरीद चुके हैं।
आईएमएफ ने भारत की विकास दर को लेकर सकारात्मक टिप्पणी की है और भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रखा है।
पूरे सप्ताह एआई को लेकर चर्चा जारी रही।बर्नस्टीन की रिपोर्ट के अनुसार एआई का सबसे बड़ा असर विकसित देशों पर पड़ सकता है, यहां 22% नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। जबकि भारत जैसे देशों पर इसका असर अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है, सिर्फ 10% नौकरियां प्रभावित होंगी कारण स्पष्ट है,भारत में श्रम लागत अभी भी काफी कम है, जबकि एआई सिस्टम की लागत कई मामलों में कर्मचारियों से ज्यादा पड़ती है।यही वजह है कि आईटी सेक्टर में जो डर दिखाई दे रहा है, वह भविष्य में उतना बड़ा साबित न हो जितना वर्तमान में माना जा रहा है।
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