28 फरवरी से शुरु हुआ अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध शांति समझौते की ओर बढ़ गया है। रविवार को जंग खत्म करने के लिए शांति समझौते पर दोनों देश राजी हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया है। वहीं ईरान ने भी बयान जारी कर कहा कि अमेरिका के साथ कई महीनों तक चली लंबी और मुश्किल बातचीत के बाद दोनों देशों ने एक डील यानी MoU को अंतिम रूप दे दिया है।

स्विट्जरलैंड के जेनेवा में होंगे साइन
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि दोनों देश शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में दस्तखत करेंगे। अगर ऐसा होता है तो यह, 47 साल में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हाई लेवल की बैठक होगी।
सबसे बड़ी राहत होर्मुज स्ट्रेट को लेकर मिली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि इस समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा। उन्होंने ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाने की मंजूरी दे दी है। ट्रम्प ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू कर लो। तेल को बहने दो।’
किन 3 शर्तों पर ईरान पीस डील के लिए माना
ईरान-अमेरिका के बीच हुए समझौते का फिलहाल पूरा दस्तावेज जारी नहीं किया गया है, हालांकि, ईरानी मीडिया के अनुसार दोनों देशों के बीच हुए MoU में कुछ अहम बातें शामिल की गई हैं। युद्ध और सैन्य कार्रवाई रोकना, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, ईरान के कुछ फ्रीज्ड फंड जारी करना, परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर अगले 60 दिनों की बातचीत का ढांचा तय करना। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद शुरू होने वाली 60 दिन की अमेरिका-ईरान वार्ता इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका पहले अपने तीन वादे पूरे करता है या नहीं।
पहली शर्त, नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करना। दूसरी, युद्ध और सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोकना। तीसरी, ईरान के फ्रीज्ड फंड जारी करना। ये तीन शर्तें महत्वपूर्ण रूप से पीस डील में शामिल है।




