नई दिल्ली: भारतीय रक्षा क्षेत्र को स्वावलंबी बनाने और विदेशी आयात पर निर्भरता न्यूनतम करने के उद्देश्य से रक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लिया है. मंत्रालय ने 405 महत्वपूर्ण सामरिक घटकों की छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी की है. इस निर्णय के तहत अब हथियारों, टैंकों, लड़ाकू विमानों और मिसाइल प्रणालियों के स्पेयर पार्ट्स और सब-सिस्टम का निर्माण भारत में ही किया जाएगा. सरकार के इस कदम से देश के रक्षा उद्योग और निजी विनिर्माताओं के लिए लगभग 3,070 करोड़ का सीधा व्यापारिक अवसर तैयार होने का अनुमान है.
इन प्रमुख प्लेटफॉर्मों के कलपुर्जे बनेंगे स्वदेशी
मंत्रालय द्वारा जारी सूची में थल, नभ और जल सेना से जुड़े कई जटिल पार्ट्स शामिल हैं. हवाई प्लेटफॉर्म में सुखोई-30MKI का शक्तिशाली AL-31FP इंजन, एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH), लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) और लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA). बख्तरबंद वाहन: T-72, T-90 मुख्य युद्धक टैंक और BMP-II इंफेंट्री कॉम्बैट व्हीकल के स्पेयर पार्ट्स. मिसाइल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स: Konkurs-M, Invar और MRSAM मिसाइल सिस्टम, रडार, सोनार, सैटेलाइट कम्युनिकेशंस और उन्नत फायर कंट्रोल सिस्टम. गोला-बारूद व वॉरशिप: हाई-एक्सप्लोसिव एंटी-टैंक गोला-बारूद तथा नौसेना के युद्धपोतों के महत्वपूर्ण कलपुर्जे.
MSME और भारतीय उद्यमियों को मिलेगा बड़ा मौका
रक्षा मंत्रालय ने हर उत्पाद के स्वदेशीकरण के लिए एक निश्चित समयावधि (Timeline) तय की है. इस पूरी प्रक्रिया में घरेलू उद्योग, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) और स्टार्ट-अप्स की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी. इससे न केवल विदेशी कंपनियों पर निर्भरता घटेगी, बल्कि देश के भीतर निवेश और तकनीकी विकास को भी गति मिलेगी.
5 वर्षों में 15,700 से ज्यादा उत्पाद स्वदेशी बने
रक्षा उपकरणों के स्वदेशीकरण को तेज करने के लिए सरकार ने अगस्त 2020 में SRIJAN डिफेंस पोर्टल लॉन्च किया था. इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रक्षा उपक्रम (DPSUs) और तीनों सेनाएं उन पुर्जों की जानकारी साझा करती हैं, जिन्हें भारत में निर्मित किया जाना है. पोर्टल की शुरुआत से जून 2026 तक भारतीय उद्योगों के समक्ष स्वदेशी विकास के लिए रखे गए. पिछले 5 वर्षों में 15,700 से अधिक उत्पादों का देश में ही निर्माण शुरू हुआ, जिससे अरबों रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई. मार्च 2026 तक घरेलू आपूर्तिकर्ताओं और इन-हाउस प्रोडक्शन के लिए करीब 10,000 करोड़ के खरीद आदेश जारी किए जा चुके हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीतिगत फैसला भारत को रक्षा आयात पर निर्भर देश की छवि से निकालकर रक्षा निर्माण के एक वैश्विक हब के रूप में स्थापित करेगा.




