बिहार क्रिकेट का ‘कायाकल्प’… बदनामी के दौर से निकलकर एलीट ग्रुप तक पहुंचने की पूरी कहानी

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Bihar Cricket
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बिहार क्रिकेट, जो पिछले कई दशकों से प्रशासनिक विवादों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण आलोचनाओं का केंद्र बना हुआ था, अब एक नए और सकारात्मक दौर में प्रवेश कर चुका है। पिछले छह वर्षों में राज्य के क्रिकेट ढांचे में हुए क्रांतिकारी बदलावों ने न केवल बिहार को घरेलू क्रिकेट के नक्शे पर मजबूती से स्थापित किया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी धमक दर्ज कराई है।

राकेश तिवारी का विज़न: स्थिरता और प्रक्रिया पर जोर

बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) के पूर्व अध्यक्ष राकेश तिवारी के कार्यकाल को राज्य के क्रिकेट पुनरुद्धार के एक निर्णायक चरण के रूप में देखा जा रहा है। एक ऐसे समय में जब बिहार क्रिकेट अस्थिरता और ढांचागत चुनौतियों से जूझ रहा था, उनके नेतृत्व ने शासन को मजबूत करने और विश्वास बहाली पर ध्यान केंद्रित किया।

राकेश तिवारी ने हाल ही में प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा:

“बिहार क्रिकेट में स्पष्ट और सकारात्मक बदलाव आया है। लंबे समय तक इसकी आलोचना की गई, इसे बदनाम किया गया और बार-बार आरोप लगाए गए। लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद, पिछले कुछ वर्षों ने स्थिरता और व्यवस्थित प्रगति दी है। आज बिहार की टीमें, विशेष रूप से अंडर-19 स्तर पर, प्रभावशाली प्रदर्शन कर रही हैं और एलीट ग्रुप में प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। यह बदलाव किसी रातों-रात मिली सफलता का नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास, धैर्य और दीर्घकालिक दृष्टिकोण का परिणाम है।”

अंडर-19 टीम का जलवा और IPL में एंट्री

बिहार की अंडर-19 टीम ने न केवल मैदान पर कई पुराने रिकॉर्ड्स ध्वस्त किए, बल्कि अपनी निरंतरता के दम पर एलीट ग्रुप में भी जगह सुरक्षित कर ली है। अब स्थिति यह है कि बिहार की भागीदारी आईपीएल जैसे बड़े मंचों पर भी बढ़ रही है और इस सीजन राज्य के 3 खिलाड़ियों का चयन विभिन्न फ्रेंचाइजी में हुआ है।

इस उभरते हुए टैलेंट ईकोसिस्टम का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं वैभव सूर्यवंशी। वैभव की सफलता पर पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि उनकी प्रगति संयोग नहीं बल्कि अनुशासन और कनिष्ठ स्तर पर उनके मजबूत प्रदर्शन का प्रमाण है। वह बिहार क्रिकेट के उस नए आत्मविश्वास का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो अब सुविधाओं या अवसरों की कमी से सीमित नहीं है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर और पारदर्शी चयन प्रक्रिया

एक समय बिहार में अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं लगभग शून्य थीं, लेकिन आज परिदृश्य बदल चुका है। मोइन-उल-हक स्टेडियम का पुनर्विकास और राजगीर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का उभरना बिहार की खेल महत्वाकांक्षाओं के प्रतीक हैं। बुनियादी ढांचे में यह सुधार जिला स्तर तक अवसरों के विकेंद्रीकरण के उद्देश्य से किया गया है।

प्रशासनिक स्तर पर बदलावों को रेखांकित करते हुए लेख के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं वर्तमान में खिलाड़ियों का चयन पूरी तरह से बीसीसीआई की प्रक्रिया और नियमों के अनुसार होता है। बीसीसीआई के चयनकर्ता स्वयं प्रतिभाओं को परखते हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता (Transparency) और डिजिटल ट्रैकिंग सुनिश्चित की गई है। बिहार की प्रगति केवल पुरुषों तक सीमित नहीं है। 16 फरवरी 2026 को कटक के बाराबती स्टेडियम में सीनियर महिला टीम की जीत राज्य के खेल पुनरुत्थान का एक शक्तिशाली प्रतीक बनकर उभरी है।

दूरदर्शी सोच का परिणाम

राकेश तिवारी का मानना है कि क्रेडिट कभी उद्देश्य नहीं था; प्राथमिक लक्ष्य हमेशा बिहार क्रिकेट का विकास और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए अवसर पैदा करना रहा है। यदि बिहार भविष्य में और अधिक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी पैदा करता है, तो यही सबसे बड़ी संतुष्टि होगी।

बिहार क्रिकेट के लिए आगामी घरेलू सत्र ऐतिहासिक होने वाला है। एलीट ग्रुप में प्रवेश के बाद अब बिहार का मुकाबला देश की दिग्गज टीमों से होगा। अंक तालिका में सुधार के साथ-साथ अब फोकस आगामी विजय हजारे और रणजी ट्रॉफी के मैचों पर है, जहाँ बिहार अपनी इस नई पहचान और लय को बरकरार रखना चाहेगा।

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