दुनिया में इस समय ऑयल शॉक लगातार बढ़ता जा रहा है। इतिहास में जितने भी बड़े रिसेशन आए हैं, उनमें ऑयल शॉक एक बड़ा कारण रहा है। इसी पूरे विषय पर चर्चा करते हैं।
ट्रंप, ईरान और संभावित युद्ध
ट्रंप आज ईरान पर हमला करने वाले थे, लेकिन फिलहाल उसे टाल दिया गया है। बताया जा रहा है कि गल्फ देशों की तरफ से अनुरोध आया कि युद्ध न किया जाए। एक बार सीज़फायर हो जाए और हालात सामान्य होने लगें, तो फिर दोबारा युद्ध तभी होता है जब कोई बहुत बड़ा कारण सामने आए। हालांकि ट्रंप के मामले में निश्चित रूप से कुछ भी कहना मुश्किल है।
लेकिन एक बात साफ दिख रही है कि ईरान पर हमले को लेकर अमेरिका में ट्रंप की लोकप्रियता प्रभावित हुई है। एक पोल के अनुसार, 67% लोगों ने माना कि ट्रंप ने ईरान पर हमला करके गलती की। यानी उनका अप्रूवल रेट लगभग 33% रह गया। इतिहास में जिन भी अमेरिकी राष्ट्रपतियों का अप्रूवल रेट 40% से नीचे गया है, उन्हें राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है। निक्सन का अप्रूवल रेट काफी नीचे चला गया था और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। जिमी कार्टर चुनाव हार गए थे। ऐसे में नवंबर में होने वाले सीनेट चुनाव काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अगर रिपब्लिकन पार्टी वहां हारती है, तो ट्रंप की स्थिति काफी कमजोर हो सकती है।
इसका असर यह हुआ कि ट्रंप बैकफुट पर गए और अमेरिकी बाजार में हल्की हरियाली देखने को मिली। यूरोपीय बाजार भी बढ़त के साथ बंद हुए।
तेल संकट क्यों बढ़ रहा है
तेल की कीमतों में बहुत बड़ा बदलाव अभी नहीं दिखा है। ब्रेंट क्रूड लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल और WTI लगभग 108 डॉलर के आसपास चल रहा है। हॉर्मुज़ स्ट्रेट लगभग पूरी तरह बंद है। अगर खुल भी जाए, तब भी अगले 6 महीनों तक तेल संकट समाप्त होने की संभावना कम है। अब इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है।
EIA और IEA की रिपोर्ट क्या कहती है
अमेरिका की Energy Information Administration (EIA) का कहना है कि पहले तेल की मांग में 1.2 मिलियन बैरल प्रति दिन की वृद्धि का अनुमान था। लेकिन अब यह घटकर सिर्फ 2 लाख बैरल प्रतिदिन रह सकती है। इसका मतलब है कि लोग तेल की खपत कम करेंगे। ऐसा आमतौर पर तब होता है जब:
- रिसेशन आता है
- स्टैगफ्लेशन बढ़ता है
- आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ने लगती हैं
International Energy Agency (IEA) ने भी लगभग इसी तरह का अनुमान दिया है। पहले जहां 1.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन मांग वृद्धि की उम्मीद थी, अब यह अनुमान घटाकर लगभग 4.2 लाख बैरल प्रतिदिन कर दिया गया है।
अब सवाल उठता है कि अगर आने वाले समय में तेल की मांग घटेगी तो कीमतें नीचे क्यों नहीं आएंगी? कारण यह है कि मांग इसलिए घट रही है क्योंकि लोगों के पास खर्च करने के लिए पैसे कम होंगे। आर्थिक गतिविधियां धीमी होंगी, उपभोग घटेगा, ट्रैवल कम होगा और बाजार में स्लोडाउन आएगा। यही स्थिति आगे चलकर गोल्ड और सिल्वर को मजबूती देती है।
नौकरी का संकट इनफ्लेशन से भी बड़ा
जॉब मार्केट की स्थिति लगातार खराब होती दिख रही है। आधिकारिक आंकड़ों में लगभग 1,15,000 नौकरियों का आंकड़ा दिखाया गया, जबकि पिछले महीने यह 65,000 था। देखने में ऐसा लग रहा है कि नौकरियां बढ़ी हैं, लेकिन Household Survey में पता चला कि वास्तविक स्थिति इससे भी खराब है। कंपनियां तेजी से कर्मचारियों को निकाल रही हैं और वेज वर्कर्स को भी पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है। अब सेंट्रल बैंक के सामने भी बड़ी समस्या है। अगर ब्याज दर बढ़ाते हैं तो अर्थव्यवस्था दबती है, और अगर नहीं बढ़ाते तो महंगाई बढ़ती है। यानी हर तरफ संकट है।
बॉन्ड मार्केट और नोट छापने का खतरा
30 साल के अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने 2007 का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 10 साल का बॉन्ड यील्ड भी ऊंचे स्तर पर है। इससे फेडरल रिजर्व पर दबाव बढ़ेगा और संभव है कि आगे चलकर फिर से नोट छापने की जरूरत पड़े। अगर यह स्थिति जारी रहती है तो:
- लोग ड्राइविंग कम करेंगे
- ट्रैवल कम होगा
- शॉपिंग घटेगी
- रेस्टोरेंट्स में खर्च कम होगा
- पूरी अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे स्लो होने लगेगी
इसके संकेत अभी से दिखाई देने लगे हैं।अमेरिकी बॉन्ड बाजार पर भी दबाव बढ़ रहा है। चीन पहले से अमेरिकी बॉन्ड बेच रहा था। अब जापान ने भी पिछले 3 महीनों में लगभग 29.6 बिलियन डॉलर के बॉन्ड बेच दिए हैं। इसके कारण:
- बॉन्ड यील्ड बढ़ रही है
- अमेरिका पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है
- स्टैगफ्लेशन का खतरा बढ़ रहा है
ऐसी स्थिति में डॉलर कमजोर हो सकता है और यही परिस्थिति गोल्ड और सिल्वर को मजबूती देने वाली मानी जाती है।
गोल्ड का विश्लेषण
गोल्ड लगभग 4545 डॉलर के स्तर पर ट्रेड कर रहा है और इसमें करीब 0.18% की नरमी देखी जा रही है। डॉलर इंडेक्स सुबह गिरकर 98.95 तक आ गया था, लेकिन अभी लगभग 99.17 पर है। डॉलर इंडेक्स जितना कमजोर होगा, उसका सीधा फायदा गोल्ड को मिलेगा।
महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस
- पहला सपोर्ट: 4350
- दूसरा सपोर्ट: 4250
अगर 4250 भी टूटता है, तो Elliott Wave 3 का स्ट्रक्चर कमजोर हो सकता है और गोल्ड 4000 के नीचे जा सकता है।
ऊपर की तरफ स्तर
- पहला रेजिस्टेंस: 4630
- बड़ा बैरियर: 4800
- अगर 4900 के ऊपर जाता है, तो Elliott Wave 3 शुरू हो सकता है।
फिलहाल ओवरऑल ट्रेंड गोल्ड के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।
गोल्ड-सिल्वर रेशियो
इस समय Gold-Silver Ratio लगभग 59.65 पर है।
- अगर यह 56 के नीचे जाता है, तो सिल्वर में बड़ी तेजी आ सकती है।
- अगर 65 के ऊपर जाता है, तो सिल्वर सस्ता माना जाएगा।
पहले यह रेशियो 53.5 तक गया था, तब सिल्वर में जबरदस्त तेजी आई थी। इस समय निवेशकों को Gold-Silver Ratio देखकर ही कदम उठाने की जरूरत है।
सिल्वर का विश्लेषण
सिल्वर पहले लगभग 78.68 डॉलर पर बंद हुआ था, लेकिन अभी लगभग 76.24 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है।
महत्वपूर्ण स्तर
- मजबूत सपोर्ट: 72 डॉलर
- दूसरा मजबूत सपोर्ट: 64 डॉलर
- प्रमुख रेजिस्टेंस: 78 डॉलर
अगर 72 डॉलर का स्तर टूटता है, तो सिल्वर 64 डॉलर तक जा सकता है।
चीन में लगातार सिल्वर खरीदा जा रहा है। अमेरिका और चीन के बाजार में सिल्वर की कीमत में लगभग 7 डॉलर का अंतर रहा, जिसके कारण अमेरिका के ट्रेडर्स लगातार चीन में सिल्वर बेच रहे हैं। इसी वजह से चीन के एक्सचेंज में सिल्वर की मात्रा 1700 टन से अधिक हो गई है। सिर्फ पिछले एक महीने में लगभग 1000 टन सिल्वर बढ़ा है। यह आने वाले समय में सिल्वर को मजबूती दे सकता है, लेकिन फिलहाल सिल्वर में भारी उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।
भारत में स्थिति
सरकार के प्रतिबंधों के कारण फिजिकल सिल्वर में प्रीमियम बढ़ सकता है। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि जंक सिल्वर की सप्लाई कैसी रहती है।
अपने शेयर बाजार पर असर
एक बड़ी रेटिंग एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार अगले 12 से 18 महीने शेयर बाजार के लिए आसान नहीं रहने वाले हैं।
प्रमुख कारण
- तेल की ऊंची कीमतें
- सप्लाई चेन बाधित होना
- रुपया कमजोर होना
- लेबर मार्केट की समस्या
- इनपुट कॉस्ट बढ़ना
इन कारणों से कॉर्पोरेट मुनाफे की रफ्तार धीमी हो सकती है।
FIIs और बाजार की चाल
FIIs ने लगभग 2830 करोड़ की खरीदारी की और DIIs ने भी लगभग 2682 करोड़ की खरीदारी की।लेकिन आशंका यह है कि FIIs पहले बाजार को ऊपर ले जाएं और फिर प्रॉफिट बुकिंग करके निकल जाएं। इसलिए अगले 7 दिन बाजार के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
म्यूचुअल फंड और IT सेक्टर
म्यूचुअल फंड्स ने IT सेक्टर में अपना एक्सपोज़र कम किया है।
- पिछले साल: 8.5%
- अब: 6.7%
कारण
- AI से बढ़ता दबाव
- जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता
- IT सेक्टर की धीमी ग्रोथ
पूरी दुनिया इस समय एक जटिल आर्थिक दौर से गुजर रही है.ऑयल शॉक बढ़ रहा है,बॉन्ड मार्केट दबाव में है,नौकरी का संकट गहरा रहा है,स्टैगफ्लेशन का खतरा बढ़ रहा है,शेयर बाजार में अनिश्चितता है ऐसे माहौल में गोल्ड और सिल्वर को सुरक्षित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि सिल्वर में भारी वोलैटिलिटी बनी रह सकती है।




