भारत सरकार अब सिर्फ क्रिकेट या बैडमिंटन ही नहीं, बल्कि कॉम्बैट स्पोर्ट्स (मार्शल आर्ट्स) में भी मेडल की बारिश चाहती है। मिशन ओलंपिक सेल (MOC) ने अपनी 168वीं बैठक में कराटे और ताइक्वांडो खिलाड़ियों के लिए 1.70 करोड़ रुपये के बड़े बजट को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का सीधा मकसद 2026 में होने वाले एशियन गेम्स के लिए भारतीय मुक्केबाजों और फाइटर्स को दुनिया के बेहतरीन ट्रेनिंग कैंप्स और टूर्नामेंट्स का अनुभव दिलाना है।
रोडाली और रूपा: ताइक्वांडो की नई उम्मीदें
ताइक्वांडो स्टार रोडाली बरुआ को बुल्गारिया, स्लोवेनिया और डच ओपन जैसे 5 बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में खेलने के लिए सरकार ने 21.20 लाख रुपये की मदद दी है। वहीं, एशिया की नंबर-1 और वर्ल्ड नंबर-6 रूपा बायोर को अगले 9 महीनों के लिए पर्सनल फिजियोथेरेपिस्ट, मसाजर और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की सुविधा मिलेगी। रूपा का लक्ष्य अपनी रैंकिंग बरकरार रखते हुए एशियन गेम्स में गोल्ड जीतना है।
कराटे में भुवनेश्वरी और अलीशा का दम
कराटे चैंपियन भुवनेश्वरी जाधव को रोम, चीन और स्पेन में होने वाले टूर्नामेंट्स के साथ-साथ उज्बेकिस्तान के दिग्गज कोच सुलेमान शरीफोविच की देखरेख में ट्रेनिंग का मौका मिलेगा। भुवनेश्वरी के साथ उनकी साथी खिलाड़ी अलीशा को भी अंतरराष्ट्रीय दौरों के लिए सरकार ने फंड जारी किया है। ये दोनों खिलाड़ी 2025 एशियन चैंपियनशिप में ब्रोंज मेडल जीतकर अपनी ताकत दिखा चुकी हैं।
नीरज चोपड़ा और अनाहत सिंह को भी बड़ी मदद
सिर्फ मार्शल आर्ट्स ही नहीं, सरकार ने ‘गोल्डन बॉय’ नीरज चोपड़ा के साउथ अफ्रीका (प्रिटोरिया) वाले ट्रेनिंग कैंप को अप्रैल 2026 तक बढ़ाने की अनुमति दे दी है। वहीं, स्क्वैश की उभरती सितारा अनाहत सिंह को स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच की सुविधा मिलेगी। साथ ही पैरा-एथलीट वरुण भाटी और संदीप चौधरी को भी विदेशी ट्रेनिंग के लिए हरी झंडी मिल गई है।
मिशन ओलंपिक सेल का विजन
MOC का मानना है कि एशियन गेम्स से पहले इन खिलाड़ियों को ‘G1 और G2’ लेवल के टूर्नामेंट्स में उतारना ज़रूरी है। इससे न सिर्फ उनका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा, बल्कि वर्ल्ड रैंकिंग में भी फायदा होगा। सरकार का यह निवेश सीधा इशारा है कि 2026 में भारत का परचम जापान के एशियन गेम्स में जोर-शोर से लहराने वाला है।



