Khelo India Winter Games 2026: कश्मीर की फिजाओं में अब सिर्फ केसर की खुशबू नहीं, बल्कि खेलों का जुनून भी घुल चुका है। गुरुवार को गुलमर्ग की बर्फीली ढलानों पर जब ‘खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2026’ का समापन हुआ, तो केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने एक ऐसी बात कही जो सीधे दिल पर लगती है। उन्होंने कहा, “कश्मीर की जिस जमीन को कभी ‘पत्थरबाजी’ के लिए जाना जाता था, आज वहां का युवा ‘स्कीइंग’ कर रहा है और दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है।”
15 दिन का मेला और नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: बड़े बदलाव की तैयारी
समापन समारोह में डॉ. मांडविया ने सिर्फ भाषण नहीं दिया, बल्कि कश्मीर के युवाओं के लिए सौगातों की झड़ी लगा दी। उन्होंने ऐलान किया कि अब विंटर गेम्स सिर्फ 4 दिनों के लिए सिमटकर नहीं रहेंगे। अगले साल से गुलमर्ग में 15 दिनों का एक महा-उत्सव मनाया जाएगा, जिसमें खेल के साथ-साथ कश्मीर की संस्कृति, खान-पान और ‘फिट इंडिया कार्निवल’ का संगम होगा। कश्मीर में विंटर स्पोर्ट्स को पेशेवर बनाने के लिए सरकार यहाँ एक नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोलने जा रही है। इसका मतलब है कि अब कश्मीर के बच्चों को ट्रेनिंग के लिए विदेशों का मुँह नहीं ताकना पड़ेगा।
6th Khelo India Winter Games have concluded, but a new legacy begins.
— Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) February 26, 2026
Witnessed the phenomenal energy of our youth at the closing ceremony.
With this unmatched spirit, Gulmarg is destined to be the Winter Sports Capital of the World. pic.twitter.com/22rFVKLbxX
‘पत्थरबाजी’ से ‘स्कीइंग’ तक का सफर: घाटी का बदलता चेहरा
डॉ. मांडविया ने भावुक होते हुए कहा कि आर्टिकल 370 हटने के बाद घाटी में खेलों की एक नई लहर आई है। उन्होंने खेलो इंडिया सेंटर्स में खिलाड़ियों और कोचों से हुई मुलाकातों का जिक्र किया और बताया कि कैसे अब कश्मीर का हर युवा विकास की दौड़ में शामिल होना चाहता है। मंत्री जी ने साफ़ कहा कि गुलमर्ग आने वाले समय में दुनिया के लिए ‘विंटर स्पोर्ट्स का ग्लोबल हब’ बनने वाला है। यहाँ 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 900 से ज्यादा एथलीट्स का जुटना इस बात का गवाह है कि कश्मीर अब पूरे देश को जोड़ रहा है।
लक्ष्य 2036 ओलंपिक: कश्मीर बनेगा भारत की ताकत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन को दोहराते हुए खेल मंत्री ने कहा कि भारत 2036 में ओलंपिक की मेजबानी करने और 2047 तक दुनिया के टॉप-5 खेल देशों में शामिल होने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। ‘खेलो भारत नीति’ का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि सरकार अब एथलीटों की जरूरतों को ध्यान में रखकर नीतियां बना रही है, ताकि टैलेंट को पैसे या सुविधाओं की कमी न खले।
बर्फ पर लिखी जा रही नई इबारत
डॉ. मांडविया का यह बयान कि ‘घाटी में खेल अब एक सेंसेशन बन चुका है’, सिर्फ शब्दों का जाल नहीं है। जब 900 युवा एक साथ बर्फ पर तिरंगा लेकर उतरते हैं, तो वह एक नए कश्मीर का उदय होता है। 15 दिन का विंटर फेस्टिवल न सिर्फ खेलों को बढ़ावा देगा, बल्कि यहाँ के पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी नई ऊंचाई पर ले जाएगा।




