मीडिया में करियर बनाना है? वोग इंडिया की हेड रोशेल पिंटो के ये 5 मंत्र आपकी जिंदगी बदल देंगे

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मीडिया में करियर बनाना है? वोग इंडिया की हेड रोशेल पिंटो के ये 5 मंत्र आपकी जिंदगी बदल देंगे
मीडिया में करियर बनाना है? वोग इंडिया की हेड रोशेल पिंटो के ये 5 मंत्र आपकी जिंदगी बदल देंगे

आज जब हम महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, तो अक्सर बड़े शहरों की मिसाल देते हैं। लेकिन वोग इंडिया (Vogue India) की हेड ऑफ एडिटोरियल कंटेंट, रोशेल पिंटो का मानना कुछ और ही है। पणजी के मशहूर ‘क्लब टेनिस डी गैसपर डायस’ (Clube Tennis de Gaspar Dias) के शताब्दी समारोह में बोलते हुए रोशेल ने साफ कहा कि आज वो जिस मुकाम पर हैं, उसमें गोवा की मिट्टी और यहाँ के खुलेपन का बहुत बड़ा हाथ है।

गोवा की ‘आजाद हवा’ ने दी उड़ान भरने की ताकत

रोशेल पिंटो, जिन्होंने मात्र 11 साल की उम्र में ऑल इंडिया रेडियो, गोवा से अपना करियर शुरू किया था, कहती हैं— “गोवा एक लड़की के बड़े होने के लिए दुनिया की सबसे बेहतरीन जगह है। यहाँ महिलाओं को कभी दूसरे दर्जे का नागरिक नहीं समझा गया। यहाँ का माहौल समावेशी और विविधता से भरा है, जिसने मुझे वो कॉन्फिडेंस दिया कि मुझे अपनी जगह बनाने के लिए कभी किसी से इजाजत नहीं मांगनी पड़ी।”

पत्रकार होते हैं ‘गिद्ध’ की तरह!

मीडिया इंडस्ट्री में 15 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाली रोशेल ने पत्रकारिता को लेकर एक बहुत ही दिलचस्प बात कही। उन्होंने कहा, “एक अच्छा जर्नलिस्ट आज भी वही है जो जमीन पर उतरकर कहानियाँ खोजता है। जर्नलिस्ट एक गिद्ध की तरह होते हैं—जहाँ दूसरों को सिर्फ एक ढांचा (carcass) दिखता है, हमें वहां पूरा ‘भोजन’ यानी एक बेहतरीन स्टोरी नज़र आती है।”

मीडिया में करियर बनाने वालों के लिए ‘गुरु मंत्र’

फैशन डिजाइनर सिमरन ढोंड के साथ बातचीत के दौरान रोशेल ने युवाओं को खरी-खरी सलाह दी इस फील्ड में टिकने के लिए आपके पास नैतिकता (Ethics), लचीलापन (Resilience) और आलोचना झेलने के लिए ‘मोटी खाल’ होनी चाहिए। काम को अंजाम तक पहुँचाने के लिए जो करना पड़े, वो करें। रोशेल ने कहा, “मैं काम करने में यकीन रखती हूँ, सिर्फ सोचने में नहीं।” उन्होंने इस मिथक को तोड़ा कि महिलाएं एक-दूसरे का पैर खींचती हैं। रोशेल के मुताबिक, प्रोफेशनल लाइफ में महिलाएं एक-दूसरे की सबसे बड़ी ताकत बनती हैं।

AI से डरना कैसा?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते खतरे पर उन्होंने बेबाकी से कहा कि नई तकनीक से डरना फिजूल है। प्रिंटिंग प्रेस के ज़माने में भी लोग डरे थे, लेकिन इंसान ने खुद को बदला। राइटर्स को अपनी स्किल सुधारनी होगी, माध्यम बदल सकता है पर हुनर नहीं।

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