नई दिल्ली: NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन लगातार जारी है. इस मामले में आंदोलन उस समय और उग्र हो गया जब 20 दिन से अनशन पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरणविद सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस इलाज का हवाला देकर उठाकर ले गई. इस बीच हुई एक घटना ने सोशल मीडिया में खलबली मचा दी है. सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके पर एक महिला की ओर से स्याही फेंकने का वीडियो वायरल हो रहा है. इस घटना को अंजाम देने वाली महिला का नाम बरखा त्रेहन है, जो अपनी मुखर विचारधारा और विवादों के लिए जानी जाती हैं.
कौन हैं बरखा त्रेहन?
बरखा त्रेहन एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और मुख्य रूप से पुरुष आयोग नामक संगठन का नेतृत्व करती हैं. उनका संगठन पुरुषों के अधिकारों के लिए काम करता है और जेंडर-न्यूट्रल कानूनों की वकालत करता है. बरखा दहेज विरोधी कानूनों, घरेलू हिंसा और विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधानों में पुरुषों के साथ होने वाले कथित अन्याय और कानूनों के दुरुपयोग के खिलाफ लंबे समय से आवाज उठाती रही हैं.
क्या था पूरा मामला?
शनिवार, 18 जुलाई को जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के समर्थन में एक कार्यक्रम चल रहा था. इस दौरान जब अभिजीत दीपके समर्थकों को संबोधित कर रहे थे, तभी बरखा त्रेहन ने मंच के करीब पहुंचकर उन पर स्याही फेंक दी. इस घटना के बाद मौके पर काफी हंगामा हुआ और समर्थकों द्वारा बरखा के साथ मारपीट करने के आरोप भी सामने आए.
बरखा ने क्या कहा?
घटना के बाद बरखा त्रेहन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए अपने कदम का बचाव किया. उन्होंने आरोप लगाया कि अभिजीत दीपके ने भगवान श्रीराम का अपमान किया था, जिससे वह बेहद आहत थीं. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा- हां, मैं बरखा त्रेहन हूं… मैंने उस कट्टरपंथी अर्बन नक्सल अभिजीत दीपके पर स्याही फेंकी, क्योंकि उसने श्रीराम का अपमान करने वालों का समर्थन किया था. मैं कट्टर हिंदू हूं और मुझे अपने इस विरोध पर गर्व है. इसके साथ ही, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के आयोजक सोनम वांगचुक का इस्तेमाल कर रहे हैं. पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया है और मामले की जांच की जा रही है.
विवादों से पुराना नाता
यह पहली बार नहीं है जब बरखा त्रेहन किसी विवाद के केंद्र में आई हैं. इससे पहले भी वह अपनी विवादास्पद टिप्पणियों और प्रदर्शनों के कारण चर्चा में रह चुकी हैं. उन्नाव रेप मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के पक्ष में खुलकर सामने आने और उनके लिए उचित कानूनी प्रक्रिया की मांग करने पर भी बरखा त्रेहन को भारी आलोचना का सामना करना पड़ा था. दिसंबर 2025 में भी वह जंतर-मंतर पर इसी तरह के एक प्रदर्शन के दौरान चर्चा में रही थीं.




