हमारा भारत देश बहुत सारी धार्मिक मान्यताओं को अपने अंदर संजोए हुए है. रहस्यमयी मंदिरों से लेकर अनोखे पंरपराओं तक कई ऐसी धार्मिक स्थान है जो अपने आप में ही एक पहेली है. आप सब मंदिर जाते होंगे, और भगवान के दर्शन के बाद वहां मिलने वाले प्रसाद भी ग्रहण करते होंगे. लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते है कि मंदिर में दर्शन के बाद प्रसाद के रूप में आपको लड्डू या पेड़े के बजाय नकदी मिले? सुनने में यह अजीब लग सकता है, लेकिन भारत में कुछ ऐसे मंदिर हैं जहां की परंपराएं इसे सच बनाती हैं.
भक्त केवल भगवान का आशीर्वाद ही नहीं, बल्कि आर्थिक तरक्की के रूप में असली नोट और सिक्के भी प्रसाद के तौर पर प्राप्त करते हैं.
भगवान की इच्छा से बांटे जाते हैं नोट
पहाड़ियों के बीच बसा तमिलनाडु का करुणासामी मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. यहां करुणासामी देवी की पूजा की जाती है. चलिए आपको बताते हैं कि क्यों खास है यह मंदिर? दरअसल यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि देवी स्वयं उनकी आर्थिक परेशानियों को दूर करती हैं. मान्यता है कि भगवान की इच्छा से यहां प्रसाद के रूप में नोट बांटे जाते हैं. जो लोग कोर्ट-कचहरी के मामलों और पारिवारिक विवादों से घिरे होते हैं, वे न्याय और सुख-समृद्धि की आस में यहां आते हैं.
प्रसाद के रूप में देते हैं कड़क नोट
मध्य प्रदेश के रतलाम का महालक्ष्मी मंदिर दिवाली के समय किसी कुबेर के खजाने से कम नहीं लगता. यहां की परंपरा राजा रतन सिंह राठौर के समय से चली आ रही है. दिवाली के पांच दिनों तक मंदिर को फूलों से नहीं, बल्कि नोटों की गड्डियों और गहनों से सजाया जाता है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में कड़क नोट और सिक्के दिए जाते हैं. लोग इस प्रसाद को मिठाई की तरह खाकर खत्म नहीं करते, बल्कि इसे बरकत मानकर अपनी तिजोरियों में सहेज कर रखते हैं, ताकि घर में हमेशा धन-धान्य बना रहे. ये मंदिर केवल आस्था के केंद्र ही नहीं हैं, बल्कि भारत की समृद्ध और विविधतापूर्ण संस्कृति का भी प्रतीक हैं. जहां एक ओर मिठाई मिठास का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर यहां मिलने वाले नोटों का प्रसाद विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है.




