वैश्विक तनाव के बीच सरकार की तैयारी, कैबिनेट में कई अहम फैसले

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार अलर्ट मोड में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों और मंत्रालयों को साफ निर्देश दिए हैं कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट का असर देशवासियों पर कम से कम पड़े. इसी के साथ केंद्रीय कैबिनेट ने कई बड़े फैसलों पर भी मुहर लगा दी है. जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया गया है और मदुरै एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय दर्जा देने का फैसला लिया गया है. इसके अलावा दिवाला और कंपनी कानून में भी संशोधन को मंजूरी दी गई है.

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई. सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों और मंत्रालयों को निर्देश दिया कि वे आपसी समन्वय के साथ काम करें ताकि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर भारत के नागरिकों पर न्यूनतम रहे.

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और ऐसे समय में सरकार को हर संभावित चुनौती के लिए तैयार रहना चाहिए. खासकर ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता जैसे मुद्दों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं. सरकार का मानना है कि समय रहते समन्वित प्रयास किए जाएं तो किसी भी वैश्विक संकट का असर देश पर सीमित रखा जा सकता है.

कैबिनेट बैठक में सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्थिति ही नहीं बल्कि देश के विकास से जुड़े कई अहम फैसले भी लिए गए. इनमें सबसे बड़ा फैसला जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने का है. केंद्र सरकार ने इस योजना के बजट को बढ़ाकर 8.7 लाख करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी है.

जल जीवन मिशन की शुरुआत साल 2019 में हुई थी. इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के हर घर तक नल के जरिए साफ पीने का पानी पहुंचाना है. पिछले कुछ वर्षों में इस योजना के तहत बड़ी प्रगति हुई है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक लगभग 12.6 करोड़ ग्रामीण घरों को नल से पानी का कनेक्शन दिया जा चुका है.

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार अब इस योजना के अगले चरण पर विशेष ध्यान देगी. पहले जहां मुख्य फोकस पाइपलाइन और बुनियादी ढांचा तैयार करने पर था, वहीं अब प्राथमिकता बेहतर सेवा वितरण और जल आपूर्ति की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर होगी.

इसके लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को और मजबूत बनाया जाएगा. अगले तीन महीनों के भीतर अलग-अलग राज्यों के साथ एमओयू यानी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. इन समझौतों के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पानी की आपूर्ति नियमित और सुरक्षित रहे, साथ ही जल प्रबंधन की प्रणाली भी मजबूत हो.

विशेषज्ञों का मानना है कि जल जीवन मिशन ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभा सकता है. इससे न सिर्फ लोगों को सुरक्षित पीने का पानी मिलेगा बल्कि महिलाओं और बच्चों को पानी लाने में लगने वाले समय और मेहनत से भी राहत मिलेगी.

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