Delhi Police Mystery Solve,टूटी दीवार…मासूम की चीखें,एक जोड़ी चप्पल ने खोला राज़

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दिल्ली… देश की राजधानी….लेकिन इसी राजधानी में एक मासूम की चीख़ें जंगल की खामोशी में दबा दी गईं…10 साल की बच्ची…एक ई-रिक्शा…और एक दरिंदा….

एक जोड़ी चप्पल और टूटी दीवार ने कैसे खोला उस गुनाह का राज़,जिसे आरोपी हमेशा के लिए दफन समझ रहा था…ये कहानी है दिल्ली के प्रसाद नगर की…जहाँ पुलिस ने सिर्फ 3 दिनों में हैवान को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया…ये दिल्ली है…जहाँ हर मोड़ पर सीसीटीवी है,लेकिन फिर भी अपराधी सोचते हैं…कि वो बच निकलेंगे….11 जनवरी की सुबह…प्रसाद नगर इलाका…ट्रैफिक सिग्नल पर फूल बेचकर अपने परिवार का पेट पालने वाली 10 साल की बच्ची…अचानक गायब हो जाती है,कुछ घंटों बाद…वही बच्ची खून से लथपथ,बेहोशी की हालत में अस्पताल लाई जाती है….जिस उम्र में बच्चे खिलौनों से खेलते हैं,उस उम्र में वो मौत से लड़ रही थी।”हिम्मत टूट चुकी थी…लेकिन याददाश्त ज़िंदा थी….बच्ची पुलिस को बताती है,एक ई-रिक्शा ड्राइवर आया…चाय पिलाने का लालच दिया…और फिर मुझे जंगल में ले गया,होश पूरी तरह नहीं था…लेकिन दिमाग़ ने दो बातें कैद कर लीं…नीला कमरा टूटा हुआ एंट्री पॉइंट….अपराधी को लगा बच्ची बेहोश थी,लेकिन उसकी यादें जाग रही थीं…मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी सेंट्रल अनंत मित्तल खुद मैदान में उतरते हैं…तीन टीमें बनाई जाती हैं….पहली टीम: पीड़िता के बयान पर,दूसरी टीम: इलाके की भौगोलिक मैपिंग,तीसरी टीम: सीसीटीवी फुटेज के आधार पर …करीब 20 वर्ग किलोमीटर का इलाका…दिन-रात खंगाला जाता है…वक्त कम था… दबाव ज़्यादा…और एक मासूम को इंसाफ़ चाहिए था….

ब्रेकथ्रू आता है प्रोफेसर राम नाथ विज मार्ग के पास…रिज एरिया…सुनसान जंगल…और वहाँ—एक टूटी पत्थर की दीवार….दीवार में बना एक छोटा सा गैप…जो अंदर एक स्ट्रक्चर की ओर जाता है…यहीं मिलती हैं…बच्ची की चप्पलें…एक जोड़ी चप्पल…और झूठ की दीवार टूट गई…फोरेंसिक टीम रात 11 से 1 बजे तक पूरे रास्ते को रीक्रिएट करती है…अब सबसे बड़ा सवाल—आरोपी कौन?ई-रिक्शा पर…ना नाम…ना नंबर प्लेट…बस एक पहचान—लाल ई-रिक्शा, सफेद छत…सीसीटीवी फुटेज में वही ई-रिक्शा बच्ची को ले जाता दिखता है….तीसरी टीम करोल बाग,राजेंद्र प्लेस और आसपास के ई-रिक्शा स्टैंड्स खंगालती है…सैकड़ों ड्राइवर…दर्जनों ई-रिक्शा…एक-एक चेहरा स्कैन किया जाता है…फिर राजेंद्र प्लेस के एक पेट्रोल पंप के पास वही ई-रिक्शा…एक शख्स गाड़ी की ओर बढ़ता है…पुलिस को देखते ही भागने की कोशिश करता है…आरोपी पकड़ा जाता है…उसके बाद पूछताछ में अपना नाम 25 साल का दुर्गेश बताता है…आरोपी पूछताछ में टूट जाता है और खुद अपने गुनाहों को कबूल करता है…उसकी निशानदेही पर—खून से सने कपड़े बरामद…ई-रिक्शा कीपिछली सीट पर खून के निशान…सबूत बोल रहे थे…और आरोपी चुप था…आरोपी के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया…पुलिस का दावा—चार्जशीट मज़बूत है,और सज़ा तय है….कानून देर कर सकता है,लेकिन अंधा नहीं होता…

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