T20 World Cup 2026: टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बीच बीसीसीआई (BCCI) ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने क्रिकेट गलियारों में हलचल मचा दी है। नामीबिया और फिर 15 फरवरी को पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले महा-मुकाबले से पहले बोर्ड ने साफ कर दिया है कि खिलाड़ियों के साथ उनकी पत्नियाँ या गर्लफ्रेंड्स (WAGs) नहीं रह सकेंगी। आइए जानते हैं बीसीसीआई के इस ‘कड़क’ अनुशासन और पाकिस्तान के यू-टर्न की पूरी इनसाइड स्टोरी.
परिवारों की ‘नो एंट्री’—क्यों सख्त हुआ बोर्ड?
बीसीसीआई ने अपने पुराने नियम को फिर से सख्ती से लागू कर दिया है। नियम क्या है? 45 दिन से लंबी सीरीज में परिवार 14 दिन साथ रह सकता है, लेकिन छोटे दौरों पर यह लिमिट सिर्फ 7 दिन है। वर्ल्ड कप के इस अहम मोड़ पर बोर्ड ने साफ कहा— “कोई परिवार साथ नहीं रहेगा।” वजह- हाल के समय में टेस्ट क्रिकेट (न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ) में मिली हार के बाद बोर्ड का मानना है कि विदेशी दौरों पर परिवार के साथ रहने से खिलाड़ियों का ध्यान भटकता है। अब सभी को हर समय टीम बस में ही साथ यात्रा करनी होगी।
‘जय शाह की कूटनीति ने जिताया आधा मैच’—राजीव शुक्ला
पाकिस्तान के यू-टर्न मारने के बाद बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने आईसीसी और खास तौर पर जय शाह की जमकर तारीफ की है। शुक्ला ने कहा, “मैं बीसीसीआई की तरफ से आईसीसी अध्यक्ष जय शाह का आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने इतना शानदार समाधान निकाला। यह आईसीसी की बड़ी उपलब्धि है कि पाकिस्तान बातचीत की मेज पर आया और 15 फरवरी को कोलंबो में मैच खेलने को राजी हुआ।”
कैसे झुका पाकिस्तान? फोन कॉल्स और वार्निंग का खेल
पाकिस्तान का ड्रामा तब खत्म हुआ जब श्रीलंका के राष्ट्रपति ने खुद पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ को फोन किया। साथ ही आईसीसी ने बांग्लादेश के मामले में थोड़ी नरमी दिखाई (जुर्माना न लगाकर), जिससे पाकिस्तान को अपनी इज्जत बचाने का एक ‘सुरक्षित रास्ता’ (Escape Route) मिल गया। अब पाकिस्तान की टीम 15 फरवरी को कोलंबो के मैदान पर भारत का सामना करने उतरेगी।
वर्ल्ड कप का अगला पड़ाव
भारतीय टीम ने अमेरिका को हराकर अपने अभियान का शानदार आगाज किया है। अब गुरुवार को टीम इंडिया नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में नामीबिया से भिड़ेगी, जिसके बाद टीम कोलंबो के लिए उड़ान भरेगी।
मैदान के बाहर जय शाह ने बाजी जीत ली है, अब मैदान के अंदर सूर्यकुमार यादव और उनकी सेना की बारी है। बोर्ड ने ‘फैमिली बैन’ लगाकर साफ़ कर दिया है कि अब बहानेबाजी की कोई जगह नहीं है। या तो परफॉर्म करो, या फिर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहो!




