इस कहानी से पहले आपको खबरदार करना चाहते है क्योंकि ये कहानी कमजोर दिल वालों के लिए नहीं …हमारी सलाह ही कि कमजोर दिल वाले इसे न ही देखें…
कहानी में हम जिस वारदात का जिक्र कर रहे है वो आपको परेशान कर सकती है….क्या आपको भी शैतान को लेकर सुनी सुनाई बातों पर यकीन है…अमूमन लोग कहते है नहीं शैतान जैसी कोई चीज नहीं होती है…

हम जिस दौर में जी रहे है वो है 21वीं सदी का..जिसमें मोबाइल इंटरनेट और विज्ञान सब है…कुछ लोग कहेंगे किु भूत प्रेत की बातें सिर्फ फिल्मों ही अच्छी लगती है….लेकिन मैं आपसे कहूं कि विज्ञान के पास आपके हर सवाल का जवाब नहीं है…अगर मैं आपसे कहूं को एक बार कोर्ट रूम में वकीलों और जजों के सामने ऐसा टेप बजाया गया था…जिसे सुनकर वहां मौजूद हर शख्स ने अपनी सांसे थोड़ी देर के लिए रोक ली थी….वो टेप आज भी मौजूद है..उस टेप के अंदर जो आवाज है वो किसी इंसान की नहीं बल्कि शैतान की …किसी जानवर की गुर्रा हट की लड़की की चिखती आवाज सबका मिश्रण है. ..जिसे आप सुनेंगे आपकी रूह अंदर तक हिल जाएगी..आप थर-थर कांपने लगेंगे….वो लड़की थी एनेलिज़ मिशेल….और उस कहानी पर हॉलीवुड ने एक फिल्म भी बनाई थी…द एक्सॉर्सिज़्म ऑफ़ एमिली रोज़….

लेकिन जो फिल्म बनाई गई थी वो असलियत के सामने बच्चों का खेल थी…असली कहानी में कोई स्पेशल इफेक्ट्स नहीं थे…वहां सिर्फ कुछ था वो..दर्द…अंधेरा…और लोगों के कराहने की आवाजें..जिसने हंसते खेलते परिवार को खत्म कर दिया…और आज हम उसी अंधेरी दुनिया में कदम रखने जा रहे है ..इस कहानी के जरिए ..जर्मनी का एक छोटा सा कस्बा है…यहीं पर मिशेल का पूरा परिवार एक साथ रहता था…वो बेहद धार्मिक कैथेलिक थे…घर अंदर नियम सख्त थे…लेकिन प्यार भी पूरे परिवार में था…इस पूरे परिवार की जान थी…एनेलिज़… 16 साल की खूबसूरत लड़की…उसे संगीत से प्यार था…वो अपने आप को संगीत में खो देना चाहती थी..वो एक टीचर बनना चाहती थी,…उसका एक प्रेमी था पिटर…उसकी लाइफ ठीक वैसे चल रही थी जैसे किसी टीनेजर की…उम्मीदों से भरी हुई…लेकिन फिर साल 1968 की रात उसकी किस्मत पूरी तरह से बदल जाती है…मिशेल अपने बिस्तर पर लेटी थी और इसी बीच उसका पूरा शरीर अकड़ जाता है…उसकी जबान तलु से चिपक जाती है…वो अपने हाथों को और पैर को हिलाना चाहती थी..वो हिला नहीं पा रही थी…उससे महसूस हुआ कि उसके बिस्तर पर कोई बैठा हुआ है…जो उसे कंट्रोल कर रहा है…एक भारी अदृश्य वजन उसकी छाती को कुचल रहा है….वो सांसे नहीं ले पार रही था..वो अपनी मां को पुकारना चाहती थी.लेकिन गले से आवाज नहीं निकल रही थी…जब वो जागी तो पूरा बिस्तर पसीने से भीगा हुआ था…मिशेल के माता पिता ..उसे फिर डॉक्टर्स के पास ले जाते..वहां डॉक्टरों ने बताया कि ये कोई बीमारी है…जैसे मिर्गी…विज्ञान ने अपना फैसला सुना दिया….दवाइयां शुरू हो गई…लेकिन मिशेल जानती थी.कि ये दौरा सामान्य नहीं था…क्योंकि उस दौरे के दौरान उसने कुछ सुना था…एक आवाज जो उससे कह रही थी कि तुम सिर्फ मेरी हो….दवाइयां दी जाती रही…लेकिन मिशेल की हालात बिगड़ती रही……अब उसे न सिर्फ रातें बल्कि दिन के उजाले में भी चीखें सुनाई पड़ती थी…जब वो चर्च में प्रार्थना करने जाती तो उसे वहां शांति नहीं मिलती थी..उसे लगता था कि वो जहां खड़ी वो जमीन जल रही …सबसे बड़ी बात…खौफनाक बात तो तब हुई जब उसने ईसा मसीह और मेरी की तरफ देखा…उसे मूर्तियों के चहरे बदलते दिखाई दे रहे थे…पवित्र मूर्तियों के चेहरे बदलकर राक्षसों के चहरों में तब्दील हो गए…जो उस पर दांत कीटकीटा रहे थे..दांत को पीस रहे थे…उसके कानों में लगातार आवाजें आती थी..तुम नर्क में सोडोगी..भगवान मर चुका है…तुम श्रापित हो..डॉक्टरों ने कहा कि ये सिजियोफेर्निया है….मती भ्रम…दवाइयों का जो डोज था वो डबल कर दिया गया…एनेलिज़ दिन भर में बीस-बीस गोलियां खिलाई जाने लगी…लेकिन उसके दिल के अंदर जो अंधेरा था उसे दवाइयां नहीं रोक पा रही थी…वो बाहर आने के बेताब था….

साल 1974 आते ल..मिशेल का व्यवहार इंसानियत की हर हद को पार कर चुका था…उसके परिवार वाले अपने ही घर में एक अजनबी के साथ रह रहे थे…..एक ऐसा अजनबी जिसने उनकी बेटी का शरीर पहन रखा था…उसके घऱ के अंदर का मंजर किसी नर्क से कम नहीं कहा जा सकता था…एनेलिज़ ने खाना पीनी छोड़ दिया था वो घर कोनों में रेंगती रहती थी…मरे हुए पक्षियों को खाती थी..मख्खी..मकड़ी उसके हाथ से नहीं बच पाती थी..सबको जिंदा खा जाती थी….उसके दांतों के बीत पंख को फड़फड़ाते पंखों को देख उसकी मां की चीखें निकल जाती ..जब उसे प्यास लगती तो वो पानी नहीं…बल्कि पेशाब पीती थी..वो अपना खुद का…वो कायलों के टुकड़ों को जबाती …वो दुबली पतली हो चुकी थी..लेकिन उसके अंदर बैलों से भी ज्यादा ताकत आ चुकी थी..उसने एक बार अपनी बहन को गुड़ियां की तरह फेंक दिया था…वो किसी भी पूजा पाठ या पवित्र पानी से नफरत करती थी…वो पादरियों पर थूकती गलियां देती और घर दीवारों को नाखून से नोंचती थी..वहां से आने जाने वाले लोग बताते कि मिशेल के कमरे से एक ऐसी गंध आती मानों जैसे कोई…लाश कई दिन से पड़ी हो…ये पसीने या गंदगी की बदबू नहीं थी…पादरी इसे नर्क की बदबू कहते थे…एक जलती हुई दम घुटने वाली जगह…इसके बाद विज्ञान ने अपने हाथ खड़े कर दिए…दवाइयां उसे ठीक नहीं कर पा रही थी…थक हारकर आखिरकार परिवार ने चर्च की शरण ली…चर्च ने दो अनुभवी पादरियों, अर्नेस्ट ऑल्ट (Ernst Alt) और अर्नोल्ड रेंज (Arnold Renz) को इस मामले की जांच करने और आवश्यकतानुसार एक्सॉर्सिज़्म (भूत-प्रेत भगाने की प्रक्रिया) करने के लिए नियुक्त किया…..सितंबर 1975 में शुरू हुई वो लड़ाई दस महीने तक चली….जिसमें एनेलीज़ पर कुल 67 बार एक्सॉर्सिज़्म किया गया.यह अनुष्ठान कैथोलिक चर्च की प्राचीन रीति-रिवाजों पर आधारित था, जिसमें बाइबिल की पंक्तियाँ, प्रार्थनाएँ, पवित्र जल और धार्मिक प्रतीकों का उपयोग किया गया…ये पूरी प्रक्रिया टेप रिकॉर्डर पर रिकॉर्ड की गई….ये टेप आज भी इस कहानी का सबसे बड़ा सबूत है….जब पादरी ने लेटिन भाषा में पूछा कि कौन हो तुम..तो पहले मिशेल के मुंह से आवाज नहीं निकली ..थोड़ी देर बाद उसे गले से भरी भरकम आवाज निकली…खुर्दरी और भयानक..उसने कहा कि हम एक नहीं बल्कि कई है…एक-एक 6 शैतानों ने अपनी पहचान बताई…सबसे पहले लुसिफर खुद शैतानों का राजा आवाज में घमंड…नफरत…हिटलर द्वितीय विश्व युद्ध के लिए ज़िम्मेदार जर्मनी का तानाशाह था, और नीरो एक निर्दयी रोमन सम्राट था.उसके परिवार और पादरी यह देखकर स्तब्ध थे कि कभी-कभी उसकी आवाज़ और बोलने का तरीका पूरी तरह बदल जाता था, मानो वास्तव में कोई और उसके शरीर के माध्यम से बोल रहा हो…..

अब मिशेल ने अजीबोगरीब धार्मिक गतिविधियाँ शुरू कर दीं, जैसे कि बिना रुके घंटों तक घुटनों के बल बैठकर प्रार्थना करना.कई बार वह इतनी देर तक इस स्थिति में रहती कि उसकी हड्डियों और जोड़ों में गंभीर चोटें आ जातीं.इसके अलावा, उसने आत्म-क्षति करना और अपने परिवार को नुकसान पहुँचाना शुरू कर दिया.कभी वह खुद को दीवारों से टकराती, तो कभी अपने शरीर को नाखूनों से नोच डालती.उसके माता-पिता और भाई-बहन उसके हिंसक व्यवहार से भयभीत होने लगे..हालत ऐसी हो गई थी कि उसके दांत टूट चुके थे और शरीर नीला..मई 1976 तक मिशेल का शरीर जवाब दे चुका था…वो चल नहीं सकती थी. उसे निमोनिया हो चुका था..उसके शरीर का वजन केवल 30 किलो रह गया था…डॉक्टरों ने कहा खाना जबरदस्ती खिलाना होगा लेकिन मिशेल ने खाने से माना कर दिया…क्यों क्योंकि एनेलीज़ डरी में एक राज छिपा हुआ था…उसने लिखा था उसने सपने में वर्जिन मेरी के दर्शन किए थे…उसे एक विकल्प दिया गया था..कि तुम अभी मेरे साथ चलो सारे दर्द सारी पीड़ा खत्म हो जाएगी…या फिर इन शैतानों को तुम अपने शरीर में रहने दो..तुम्हारी मौत भयानक होगी..तुम्हें बहुत तड़पना होगा…और तुम्हारी पीड़ी दुनिया के लिए एक ऐसा सबूत होगी..जिसे देख दुनिया कहेगी की है शैतान होते है…ताकी लोग पाप करना बंद कर दें..मिशेल ने दूसरा रास्ता चुना..उसने अपनी जान का सौंदा किया…दुनिया को विश्वास दिलाने के लिए…तीस जून 1976 आखिरी रात ….एनेलीज़ मिशेल अपने बिस्तर पर पड़ी हुई..कमजोर टूटी हुई उसने अपनी मां की तरफ देखा…उस वक्त उसके अंदर कोई शैतान नहीं थी..सिर्फ डरी हुई एनेलीज़ थी…उसने कांपते हुए होंठों से अपनी मां से एक आखिरी शब्द कहे…मां आप मेरी हाथ पकड़ लो मैं डरी हुई हूं…एनेलीज़ के यही आखिरी शब्द थे…अगली सुबह 1 जुलाई 1976 को जब सूरज की पहली किरण कमरे में दाखिल हुई तो एनेलीज़ हमेशा के लिए खामोशी के साथ सो चुकी थी…न कोई शोर था..न कोई आवाज बस चारों ओर सन्नाटा…पिजरा टूट गया पक्षी आजाद हो चुका था..लेकिन कहानी एनेलीज़ की मौत पर खत्म नहीं होती है बल्कि और आगे बढ़ जाती है…असली तमाशा तो अब शुरू होता है…जर्मनी का सरकार हिल गई…

20वीं सदी में एक लड़की झाड़ फूंक के चक्कर में मर गई…एनेलीज़ की मृत्यु के बाद, उनके माता-पिता और दोनों पादरियों पर हत्या के लिए गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा चलाया गया….1978 में, अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी करार दिया और उन्हें छह महीने की सजा और तीन साल की प्रोबेशन दी.अदालत ने यह भी कहा कि एनेलीज़ को मेडिकल ट्रीटमेंट दिया जाना चाहिए था, जिससे उनकी जान बच सकती थी…अब बचाव पक्ष के पास अपनी बेगुनाही साबिक करने के लिए कुछ न थी…लेकिन बस एक चीज थी. जो उन्हे बचा सकती थी..वो थी वो टेप जो..झाड़ फूंक के दौरान रिकॉर्ड की गई थी…टेप रिकॉर्डिंग लाई जाती उसके बाद उस भयानक आवाज को सुनकर हर कोई हिल जाता है…इस पूरी कहानी से एक चीज तो समझ आ गई कि अगर आपको भगवान पर विश्वास है तो आपको शैतान का विश्वास करना पड़ेगा…सोचिए एक बिल्कुल मासूम लड़की, जिसके अंदर धीरे-धीरे छह खौफनाक ताक़तों का कब्ज़ा हो जाता है। यह किसी डरावनी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि जर्मनी की एनेलिज़ मिशेल की सच्ची और रूह कंपा देने वाली दास्तां है….सवाल सिर्फ एक है—क्या एनेलिज़ मानसिक बीमारी से जूझ रही थी, या उसने पूरी दुनिया को यह साबित करने के लिए अपनी जान दे दी….



