अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्तों में खटास बढ़ती जा रही है और इसका सीधा असर दोनों देशों के व्यापार पर पड़ा है। हालात ऐसे हैं कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच व्यापार लगभग ठप हो चुका है। लेकिन इसी बीच अफगानिस्तान की नजर अब भारत की तरफ झुक गई है, और दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार तेजी पकड़ रहा है।
टोलो न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान के उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय ने बताया है कि पिछले सात महीनों में भारत और अफगानिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 525 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। इसमें सबसे खास बात यह है कि इसमें अफगानिस्तान का निर्यात सबसे बड़ा हिस्सा रखता है, जो 379 मिलियन डॉलर (करीब 34 अरब रुपये) तक पहुंच गया है। यह साफ दिखाता है कि भारत में अफगान सूखे मेवों और खास कृषि उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
मंत्रालय के प्रवक्ता अखुंदजादा अब्दुल सलाम जवद के मुताबिक, भारत को भेजे जाने वाले प्रमुख निर्यात में सूखे अंजीर, केसर, हींग और उसके बीज, किशमिश, जीरा, पिस्ता और बादाम शामिल हैं। ये वे चीजें हैं जिनका इस्तेमाल भारत के लगभग हर घर में होता है, और त्योहारों के सीजन में इनकी डिमांड और बढ़ जाती है।
दूसरी ओर अफगानिस्तान भारत से दवाइयां, मशीनरी, कपास के कपड़े, ऑटो-पार्ट्स, औद्योगिक कच्चा माल और तैयार कपड़े आयात करता है। दोनों देशों के बीच सूखे मेवे, केसर और हस्तशिल्प वर्षों से मजबूत व्यापारिक कड़ी रहे हैं, जो अब और मजबूत होती दिख रही है।
अफगानिस्तान के लिए राहत भरी खबर यह भी है कि भारत ने दोनों देशों के बीच कार्गो फ्लाइट्स को आधिकारिक रूप से फिर से शुरू कर दिया है। पहले वाघा बॉर्डर रूट उपलब्ध न होने से अफगान व्यापारियों को काफी नुकसान होता था, लेकिन अब एयर-कार्गो विकल्प तेज और आसान रास्ता बन सकता है। इससे अफगान कारोबारियों को खासा लाभ मिलने की उम्मीद है।



