KHELO INDIA: जब हम केरल का नाम सुनते हैं, तो दिमाग में नारियल के पेड़, समंदर और हरियाली आती है। शायद ही कोई सोच पाए कि दक्षिण भारत के इस तटीय राज्य का एक लड़का लद्दाख की जमा देने वाली ठंड में बर्फ पर नाचते हुए (Figure Skating) देश का दिल जीत लेगा। लेकिन अभिजीत अमल राज ने इसे सच कर दिखाया है।
‘खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2026’ में पहली बार शामिल की गई फिगर स्केटिंग स्पर्धा में केरल के अभिजीत ने पुरुषों की ‘एडवांस कैटेगरी’ में गोल्ड मेडल जीतकर एक नया इतिहास रच दिया है। लेकिन इस गोल्ड मेडल की चमक के पीछे सालों का अंधेरा, संघर्ष और एक पिता का अटूट बलिदान छिपा है।
बेटे के सपने के लिए बेच दिया अपना घर
अभिजीत की कहानी तब शुरू हुई जब वह ठीक से बोल भी नहीं पाते थे। 3 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार स्केट्स पहने। केरल जैसे राज्य में आइस स्केटिंग का इंफ्रास्ट्रक्चर न के बराबर था। ट्रेनिंग बहुत महंगी थी। इटली के कोच से सीखने के लिए एक घंटे के 100 यूरो (करीब 9000 रुपये) देने पड़ते थे।
अभिजीत के पिता ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने बेटे की ट्रेनिंग के लिए अपनी सारी संपत्ति और जमीन बेच दी। पूरा परिवार किराए के मकान में रहने लगा ताकि अभिजीत दुनिया के बेहतरीन कोचों से सीख सके। आज यह गोल्ड मेडल उसी त्याग का नतीजा है।
वर्ल्ड चैंपियन की बर्फ पर 10 साल बाद वापसी
अभिजीत कोई नए खिलाड़ी नहीं हैं। वह 2019 में आर्टिस्टिक रोलर स्केटिंग के वर्ल्ड चैंपियन रह चुके हैं। 2023 और 2025 में उन्होंने एशियन चैंपियनशिप में भी गोल्ड जीता। रोलर स्केटिंग की दुनिया में शिखर पर पहुँचने के बाद, उन्होंने करीब एक दशक बाद फिर से बर्फ (Ice) पर वापसी की और खेलो इंडिया के जरिए खुद को साबित किया।
खुद चैंपियन बने, अब दूसरों को बना रहे हैं
24 साल के अभिजीत सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं रहना चाहते। उन्होंने अपनी पार्टनर वकास्या लक्ष्मी नारायणन के साथ मिलकर केरल और तमिलनाडु में ‘Adler Vision’ नाम की अकादमियां शुरू की हैं।
- यहाँ 100 से ज्यादा बच्चे ट्रेनिंग ले रहे हैं।
- उन्होंने इटली के बड़े कोचों को भारत बुलाया है ताकि बच्चों को विदेश न जाना पड़े।
- उनका मिशन है कि रोलर स्केटिंग करने वाले बच्चे धीरे-धीरे बर्फ पर फिगर स्केटिंग के लिए तैयार हों।
खेलो इंडिया: एक नई उम्मीद
अभिजीत के लिए खेलो इंडिया सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक बड़ा प्लेटफार्म है। उन्होंने कहा, “मेरा यहाँ आना सिर्फ मेडल के लिए नहीं था, बल्कि अपनी एकेडमी के बच्चों को यह दिखाना था कि भारत में अब इस खेल के लिए भी एक प्रतिष्ठित मंच तैयार हो चुका है।”
इस बार फिगर स्केटिंग में 8 राज्यों के 23 स्केटर्स ने हिस्सा लिया, जो भारत जैसे गर्म देश के लिए एक बहुत ही सकारात्मक शुरुआत है।




