तेजस MK-1A को मिली बड़ी रफ्तार: भारतीय वायु सेना होगी मजबूत, पाकिस्तान-चीन की बढ़ेंगी मुश्किलें

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इससे पहले छठे इंजन में नियमित गुणवत्ता परीक्षण के दौरान तकनीकी खामी सामने आई थी। हालांकि, HAL और GE Aerospace ने मिलकर कुछ ही सप्ताह में समस्या का समाधान कर लिया। विस्तृत निरीक्षण, तकनीकी सुधार और दोबारा किए गए परीक्षणों के बाद इंजन को निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार किया गया।

नई दिल्ली: स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस MK-1A कार्यक्रम को बड़ा बढ़ावा मिला है। अमेरिकी कंपनी GE Aerospace का सातवां F404-IN20 इंजन सफलतापूर्वक यूजर एक्सेप्टेंस क्वालिटी टेस्ट पास कर चुका है। इस उपलब्धि से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को उत्पादन और डिलीवरी शेड्यूल को लेकर बड़ी राहत मिली है।

इससे पहले छठे इंजन में नियमित गुणवत्ता परीक्षण के दौरान तकनीकी खामी सामने आई थी। हालांकि, HAL और GE Aerospace ने मिलकर कुछ ही सप्ताह में समस्या का समाधान कर लिया। विस्तृत निरीक्षण, तकनीकी सुधार और दोबारा किए गए परीक्षणों के बाद इंजन को निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार किया गया।

सातवें इंजन की मंजूरी के साथ HAL अब एयरफ्रेम निर्माण और सिस्टम इंटीग्रेशन का काम और तेजी से आगे बढ़ा सकेगा। यह प्रगति ऐसे समय में हुई है जब भारतीय वायुसेना को समय पर तेजस MK-1A की डिलीवरी सुनिश्चित करने को लेकर HAL पर दबाव बना हुआ है।

गौरतलब है कि वर्ष 2021 में हुए समझौते के तहत GE Aerospace को लगभग 5,375 करोड़ रुपये की लागत से 99 F404-IN20 इंजन की आपूर्ति करनी है। रक्षा मंत्रालय पहले डिलीवरी में देरी को लेकर चिंता जता चुका है, लेकिन सातवें इंजन के सफल परीक्षण से कार्यक्रम में फिर से गति आने की उम्मीद बढ़ गई है।

HAL का लक्ष्य 2026 के अंत तक तेजस MK-1A के पहले बैच को भारतीय वायुसेना को सौंपना है। अत्याधुनिक एवियोनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और बेहतर मेंटेनेंस सुविधाओं से लैस तेजस MK-1A भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण का अहम हिस्सा माना जा रहा है। ऐसे में इंजनों की समय पर आपूर्ति इस परियोजना की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सातवें इंजन की सफलता को तेजस कार्यक्रम के लिए एक सकारात्मक संकेत और भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

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