NTA को सुप्रीम फटकार।UPSC में कभी पेपर लीक नहीं हुआ, NTA को सीखने की जरूरत – सुप्रीम कोर्ट।

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नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को एक बार फिर कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NTA को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) जैसी संस्थाओं से सीख लेनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि UPSC में कभी पेपर लीक नहीं होता और उसकी परीक्षाओं पर कभी सवाल नहीं उठे। NTA में लोगों को इस लापरवाही की जिम्मेदारी लेनी होगी।कोर्ट ने साफ कर दिया कि NTA और केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करें कि 21 जून को दोबारा होने वाली परीक्षा बिना किसी गलती के संपन्न हो। जजों ने यह भी कहा कि NTA को अपनी पुरानी गलतियों से सबक लेना होगा।

21 जून को होने वाली परीक्षा की पूरी तैयारी — SG

21 जून को होने वाली परीक्षा को लेकर केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “परीक्षा को बेहतर तरीके से कराने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।” तुषार मेहता ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी व्यक्तिगत रूप से इसकी निगरानी कर रहे हैं।सुनवाई के अंत में कोर्ट ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से जवाब दाखिल करने को कहा। साथ ही मामले की अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अभी कुछ समय तक नीट परीक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी करता रहेगा।

NTA को भंग करने की मांग

इस साल 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा का पेपर लीक होने की जानकारी सामने आने के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इसके बाद छात्रों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किए। केंद्र सरकार और NTA की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठने लगे।इस मामले में दाखिल याचिकाओं में 21 जून को दोबारा होने वाली परीक्षा को पेन-पेपर की बजाय कंप्यूटर आधारित कराने, नई परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड कमेटी की निगरानी में कराने और NTA को भंग कर नई संस्था के गठन की मांग की गई थी। हालांकि, शुक्रवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इन मांगों पर चर्चा नहीं की।

दरअसल, 25 मई को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने NTA से मामले पर जवाब दाखिल करने को कहा था। तब भी सुप्रीम कोर्ट ने NTA की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। साथ ही परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के लिए गठित राधाकृष्णन कमेटी को भी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।शुक्रवार, 29 मई को हुई सुनवाई में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन स्वयं पेश हुए। उन्होंने बताया कि 2024 में कमेटी ने 60 सुझाव दिए थे, जिनमें से कई लागू किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि 2025 में परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित हुई थी, लेकिन इस बार कुछ नई कमियां सामने आई हैं, जिन्हें दूर किया जाएगा।

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