अमेरिका, यूरोप और जापान के बाद अब चीन से भी जो खबरें आ रही हैं, वो काफी चौंकाने वाली हैं। चीन की इकॉनमी में भी अब कमजोरी के संकेत साफ दिखाई देने लगे हैं। अप्रैल के जो आंकड़े सामने आए हैं, वो उम्मीद से काफी खराब रहे। रिटेल सेल्स कमजोर रही हैं। फिक्स्ड एसेट इन्वेस्टमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर, फैक्ट्री और प्रॉपर्टी सेक्टर सभी दबाव में दिखाई दे रहे हैं।घर की कीमतें लगातार 12 महीने से गिर रही हैं। लोग घर नहीं खरीद रहे, लोन नहीं ले रहे और खर्च भी कम कर रहे हैं। इसके कारण वहां डिफ्लेशन का खतरा और बढ़ता दिखाई दे रहा है।यही वजह है कि अब जो बात पहले कही जा रही थी कि अगर इस बार बड़ा स्लोडाउन आता है, तो उसका असर पूरी दुनिया में देखने को मिल सकता है, उसकी झलक अब धीरे-धीरे दिखाई देने लगी है।
ऊपर से अगर Hormuz जलमार्ग नहीं खुलता है, तो यह समस्या और ज्यादा विकट होती जाएगी। उधर ट्रंप की तरफ से संकेत दिया गया है कि ईरान के साथ बातचीत अब फाइनल स्टेज में पहुंचती दिखाई दे रही है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर भी तेहरान पहुंचे हुए हैं, जहां अंतिम स्तर की बातचीत चल रही है।
इस खबर का असर मार्केट पर पॉजिटिव दिखाई दिया। अमेरिका और यूरोप के शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली। साथ ही तेल की कीमतों में भी राहत दिखाई दी। WTI, जो 100 डॉलर के ऊपर निकल गया था, वह गिरकर 98.90 पर बंद हुआ। वहीं ब्रेंट में भी ऊंचाई से नरमी देखने को मिली। डॉलर इंडेक्स भी कमजोर हुआ और 99.15 के आसपास बंद हुआ।
SILVER
अगर सिल्वर की बात करें, तो सिल्वर 75.72 डॉलर पर 1.26% की तेजी के साथ बंद हुआ। भारतीय करेंसी में यह 271350 पर रहा। वहीं चीन के एक्सचेंज में सिल्वर में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। COMEX में सिल्वर की डिलीवरी लगातार बढ़ रही है। इस महीने अब तक 878 टन की डिलीवरी हो चुकी है। “For Sale” और “Not For Sale” स्टॉक को देखें, तो मार्केट में बड़ी हलचल साफ दिखाई दे रही है। सिल्वर का 73 डॉलर के ऊपर बने रहना काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर यह अगले कुछ दिनों तक इसके ऊपर बना रहता है, तो यह मजबूत सपोर्ट बन सकता है। लेकिन अगर यह टूटता है, तो 65 डॉलर तक गिरावट संभव है, जो इसका 200 डे मूविंग एवरेज भी है। ऊपर की तरफ 81 डॉलर इसका बड़ा रेजिस्टेंस माना जा रहा है। अगर सिल्वर इसे भी पार कर लेता है, तो फिर 90 डॉलर की तरफ तेजी देखने को मिल सकती है।
GOLD
गोल्ड भी मजबूती के साथ बंद हुआ। COMEX के पास मौजूद गोल्ड का स्टॉक और डिलीवरी यह दिखाती है कि फिजिकल डिमांड अभी भी बनी हुई है। अब गोल्ड के सपोर्ट की बात करें, तो 4300 डॉलर से 4374 डॉलर के बीच मजबूत सपोर्ट दिखाई दे रहा है। अगर गोल्ड इसके ऊपर बना रहता है, तो मजबूती बनी रह सकती है। लेकिन अगर यह नीचे आता है, तो फिर 4200 डॉलर तक फिसल सकता है। एक बात ध्यान रखिएगा कि इस समय मार्केट में सेंटीमेंट पूरी तरह नेगेटिव है। और कई बार जब सेंटीमेंट बहुत ज्यादा नेगेटिव हो जाता है, तो वही बॉटम बनने का संकेत भी होता है। पहले भी 4150 के आसपास ऐसा देखने को मिला था, जहां से Elliott Wave 3 शुरू हुआ था। अब देखना होगा कि 4300 वाला बेस टिकता है या नहीं।इस समय गोल्ड और सिल्वर दोनों कंसोलिडेशन में हैं। लेकिन अगर अचानक तेज खरीदारी आती है, तो यहां एक बड़ा एक्सप्लोसिव रैली देखने को मिल सकता है। क्योंकि मार्केट में भारी मात्रा में शॉर्ट पोजिशन बनी हुई है। अगर अचानक बाइंग आती है, तो शॉर्ट कवरिंग के कारण तेजी और तेज हो सकती है।
इस समय गोल्ड-सिल्वर रेशियो लगभग 1:60 पर चल रहा है। अगर यह ऊपर जाता है, तो सिल्वर सस्ता माना जाएगा। अगर यह नीचे आता है, तो सिल्वर गोल्ड के मुकाबले महंगा होता जाएगा। 65 के ऊपर सिल्वर काफी सस्ता माना जाता है, जबकि 55 के नीचे इसकी चाल काफी आक्रामक हो जाती है।
अब ग्लोबल इकॉनमी की बात करें, तो इस समय 2008 जैसी तस्वीर फिर से बनती दिखाई दे रही है। लेकिन इस बार स्थिति अलग है। 2008 में अमेरिका का बॉन्ड मार्केट और डॉलर दोनों मजबूत थे। लेकिन आज अमेरिका का बॉन्ड मार्केट दबाव में है और डॉलर भी काफी कमजोर हो चुका है। कुछ समय पहले तक डॉलर इंडेक्स 120 के आसपास था और अब 99 के करीब पहुंच चुका है।
भारत के नजरिए से देखें, तो गोल्ड और सिल्वर ने अमेरिका की तुलना में ज्यादा रिटर्न दिया है, क्योंकि भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। पिछले पांच साल में गोल्ड अमेरिका में लगभग 154% बढ़ा, जबकि भारतीय करेंसी में करीब 232% तक बढ़ गया। इसी तरह सिल्वर में भी भारतीय निवेशकों को ज्यादा मजबूत रिटर्न मिला। जब किसी देश की करेंसी कमजोर होने लगती है, तो लोग अपनी संपत्ति बचाने के लिए गोल्ड और सिल्वर खरीदने लगते हैं। यही वजह है कि कई बार सरकारें इनके आयात को नियंत्रित करने की कोशिश करती हैं।
इस समय दुनिया में कर्ज का एक्सप्लोजन, करेंसी डिवैल्यूएशन, एनर्जी क्राइसिस और फाइनेंशियल बबल जैसी स्थितियां बन रही हैं। ऐसे माहौल में गोल्ड और सिल्वर को मजबूत एसेट माना जाता है। धीरे-धीरे वेल्थ ट्रांसफर भी गोल्ड और सिल्वर की तरफ होता दिखाई दे रहा है। अब एक सवाल यह उठता है कि क्या 1980 के बाद जैसा लंबा ठहराव फिर से देखने को मिल सकता है।
उस समय फेड चेयरमैन वोल्कर ने ब्याज दरों को 20% तक पहुंचा दिया था, जिसके कारण गोल्ड दबाव में आ गया था। लेकिन आज की स्थिति पूरी तरह अलग है। आज अमेरिका पर कर्ज का बोझ बहुत ज्यादा है। अगर ब्याज दरों को इतनी ऊंचाई तक ले जाया जाता है, तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था संभलने के बजाय टूट सकती है। इसलिए वैसी परिस्थिति दोबारा बनना मुश्किल माना जा रहा है। अब बॉन्ड मार्केट पर भी दबाव लगातार बढ़ रहा है। पहले तेल बेचने वाले देश डॉलर लेकर अमेरिकी बॉन्ड खरीदते थे। लेकिन अब कई देश बॉन्ड बेचकर डॉलर निकाल रहे हैं। पेट्रो-डॉलर सिस्टम में भी सेंध लगती दिखाई दे रही है। ईरान, चीन और कई दूसरे देश युवान में ट्रेड की तरफ बढ़ रहे हैं। UAE और सऊदी अरब भी वैकल्पिक सिस्टम की तरफ झुकते दिखाई दे रहे हैं। इसका असर अमेरिकी बॉन्ड मार्केट और डॉलर सिस्टम दोनों पर दिखाई दे रहा है।
अगर हमारे शेयर बाजार की बात करें, तो फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। कभी अचानक तेजी आएगी, तो कभी तेज गिरावट देखने को मिल सकती है।ऐसे माहौल में स्विंग ट्रेडर्स के लिए मौके जरूर बन सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों को सावधानी के साथ चलना होगा। कॉर्पोरेट अर्निंग ग्रोथ भी पहले की उम्मीदों से कमजोर होती दिखाई दे रही है। यही वजह है कि बाजार में बुलिश ट्रेंड थोड़ा कमजोर पड़ता नजर आ रहा है।
इसलिए इस समय जल्दबाजी से बचिए, थोड़ा कैश अपने पास रखिए और लंबी सोच के साथ आगे बढ़िए।




