बर्फीली हवाओं के बीच अनुष का ‘शाही’ खेल, बेल्जियम में डेब्यू करते ही मचाई धूम, अब एशियन गेम्स पर है नज़र

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Belgium Dressage Events 2026
Anush Agarwalla (IND) - Straight Horse Floriana CDI Lier 2026 © DigiShots

Belgium Dressage Events 2026: घुड़सवारी के खेल में घोड़े और सवार के बीच का तालमेल ही जीत की असली चाबी होती है। भारत के युवा घुड़सवार अनुष अग्रवाल ने बेल्जियम ड्रेसेज इवेंट्स (Belgium Dressage Events) में इसी तालमेल का ऐसा नमूना पेश किया कि अंतरराष्ट्रीय दिग्गज भी देखते रह गए। अपने पहले ही इंटरनेशनल डेब्यू में अनुष ने न केवल शानदार स्कोर किया, बल्कि आगामी एशियन गेम्स के लिए अपनी दावेदारी भी ठोक दी है।

फ्लोरियाना के साथ ‘चौका’ और फ्लिन के साथ ’70 पार’

अनुष के लिए यह सफर दो चरणों में रहा। 28 फरवरी अनुष अपनी 8 साल की घोड़ी ‘फ्लोरियाना’ के साथ मैदान में उतरे। 14वें नंबर पर शुरुआत करते हुए उन्होंने 68.85% का स्कोर हासिल किया और ओवरऑल चौथे स्थान पर रहे। पहली बार इतने बड़े मंच पर उतरने के बावजूद उनके खेल में गजब की मैच्योरिटी दिखी। अगले ही दिन अनुष अपने 10 साल के घोड़े (Gelding) ‘फ्लिन’ पर सवार होकर आए। इस बार उन्होंने अपने प्रदर्शन को और ऊपर उठाया और 70.3% का व्यक्तिगत स्कोर बनाया। ड्रेसेज जैसे खेल में 70% का आंकड़ा पार करना किसी भी खिलाड़ी के लिए एक मील का पत्थर माना जाता है।

एशियन गेम्स का ‘मिशन क्वालिफिकेशन’

यह इवेंट अनुष के लिए सिर्फ एक मुकाबला नहीं था, बल्कि एशियन गेम्स की क्वालिफिकेशन की सीढ़ी भी था। अब उनके पास दो और मौके बचे हैं, और बेल्जियम की इस शुरुआत ने उन्हें जबरदस्त मोमेंटम (लय) दे दिया है।

अपनी इस उपलब्धि पर अनुष ने कहा, “बेल्जियम में फ्लोरियाना के साथ डेब्यू करना मेरे लिए गर्व की बात है। यहाँ का मुकाबला बहुत कड़ा है, जो आपको हर कदम पर बेहतर बनने के लिए प्रेरित करता है। फ्लोरियाना और फ्लिन ने मुझ पर पूरा भरोसा दिखाया, जिससे मेरा काम आसान हो गया। हमारा पूरा ध्यान अब एशियन गेम्स पर है।”

श्रुति वोरा को पीछे छोड़ा

इसी प्रतियोगिता में भारत की अनुभवी घुड़सवार श्रुति वोरा भी हिस्सा ले रही थीं। हालांकि, अनुष ने इसी लेग में उनसे बेहतर स्कोर हासिल कर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। यह दिखाता है कि भारतीय घुड़सवारी में अब नई पीढ़ी कमान संभालने के लिए तैयार है।

उम्मीदों का नया घोड़ा

अनुष अग्रवाल का बेल्जियम में यह प्रदर्शन साबित करता है कि अगर सही ट्रेनिंग और मौका मिले, तो भारतीय खिलाड़ी यूरोपियन सर्किट पर भी झंडे गाड़ सकते हैं। ड्रेसेज जैसे तकनीकी खेल में धैर्य सबसे बड़ी ज़रूरत है, और अनुष ने वह धैर्य दिखाया है। अब इंतज़ार है एशियन गेम्स का, जहाँ अनुष से पदक की उम्मीदें और बढ़ गई हैं।

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