Mission Olympics 2036: रक्षा खड़से ने बताया कैसे ‘अस्मिता’ लीग बनेगी टीम इंडिया की नींव

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Achieving Sports Milestone by Inspiring Women Through Action
Achieving Sports Milestone by Inspiring Women Through Action

Mission Olympics 2036: इस बार 8 मार्च यानी ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ पर सिर्फ बधाइयों के मैसेज नहीं चलेंगे, बल्कि देश की बेटियां ट्रैक पर अपनी रफ़्तार दिखाएंगी। केंद्रीय खेल राज्य मंत्री रक्षा निखिल खड़से ने सोमवार को एक मेगा-इवेंट का ऐलान किया है। अस्मिता (ASMITA) प्रोग्राम के तहत देश के 250 अलग-अलग कोनों में एक साथ एथलेटिक्स लीग का आयोजन किया जाएगा।

2.5 लाख खिलाड़ी और एक ही दिन: बनेगा रिकॉर्ड?

मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में मीडिया से बात करते हुए श्रीमती खड़से ने बताया कि यह आयोजन ‘खेलो इंडिया’ और ‘माय भारत’ (MY Bharat) का एक साझा प्रयास है।

  • मैदान: देश भर में 250 लोकेशंस।
  • इवेंट: 100 मीटर, 200 मीटर और 400 मीटर की दौड़।
  • आयु वर्ग: अंडर-13, 13-18 साल और 18 साल से ऊपर की केटेगरी। उम्मीद है कि एक ही दिन में ढाई लाख महिलाएं इस दौड़ का हिस्सा बनेंगी, जो अपने आप में एक मिसाल होगा।

गांव-गांव से निकलेंगी ‘उड़न परियां’

रक्षा खड़से ने साफ कहा कि इस लीग का असली मकसद गांवों और छोटे शहरों की लड़कियों को खेल को करियर के रूप में चुनने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा, “पीएम नरेंद्र मोदी का सपना है कि खेल सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित न रहे। ‘अस्मिता’ अरुणाचल से लेकर मिजोरम तक और नक्सल प्रभावित इलाकों तक पहुँच चुकी है। अब तक 3 लाख से ज्यादा महिलाएं इसका हिस्सा बन चुकी हैं।”

ओलंपिक 2036 की तैयारी: सिर्फ स्टेडियम नहीं, ‘इंसान’ भी चाहिए

भारत की नज़रें 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक की मेजबानी पर हैं। मंत्री खड़से ने एक बहुत गहरी बात कही—उन्होंने बताया कि ओलंपिक की तैयारी सिर्फ बड़े स्टेडियम बनाने से नहीं होती, बल्कि हर जिले में ट्रेंड कोच, सर्टिफाइड टेक्निकल ऑफिशियल्स और एडमिनिस्ट्रेटर होने चाहिए। महिला दिवस पर होने वाली यह लीग असल में उसी ‘ह्यूमन रिसोर्स’ को तैयार करने की एक वर्कशॉप भी है।

चूल्हे से ट्रैक तक का सफर

‘अस्मिता’ यानी Achieving Sports Milestone by Inspiring Women Through Action। यह नाम ही काफी है यह बताने के लिए कि अब महिलाओं को सिर्फ दर्शक दीर्घा में नहीं, बल्कि फिनिशिंग लाइन पर गोल्ड मेडल के साथ देखा जाएगा। जब एक साथ ढाई लाख लड़कियां दौड़ेंगी, तो वह सिर्फ एक रेस नहीं होगी, वह रूढ़ियों को पीछे छोड़ने की रफ़्तार होगी।

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