उत्तर प्रदेश में शिक्षक अब सिर्फ ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य सुरक्षा नीति के केंद्र में भी आ गए हैं।29 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया फैसला, यूपी के शिक्षा तंत्र के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

सरकार ने शिक्षकों और शिक्षा से जुड़े कर्मचारियों को राज्य कर्मचारियों की तरह कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने को मंजूरी दे दी है। यह सुविधा आयुष्मान व्यवस्था के माध्यम से लागू की जाएगी और इसका सीधा लाभ 11.92 लाख से अधिक लोगों को मिलेगा।लेकिन यह सिर्फ एक घोषणा नहीं है — यह फैसला सरकार की प्राथमिकताओं, चुनावी संकेतों और प्रशासनिक सोच को भी साफ करता है।
क्या है फैसला? — आसान भाषा में समझिए
अब तक यूपी में:
सरकारी कर्मचारी → कैशलेस इलाज के दायरे में
शिक्षक, शिक्षामित्र, रसोइया → अक्सर बाहर
अब यह फर्क खत्म किया जा रहा है।
कैबिनेट ने तय किया है कि:
शिक्षक
शिक्षामित्र
अनुदेशक
रसोइया
सभी को कैशलेस मेडिकल ट्रीटमेंट मिलेगा।इलाज के समय जेब से पैसे देने की जरूरत नहीं ।भुगतान सरकार/आयुष्मान व्यवस्था करेगी।यानी बीमारी के समय अब कर्ज या चिंता नहीं — सीधे इलाज।हालांकि, जो कर्मचारी पहले से किसी सरकारी स्वास्थ्य योजना से आच्छादित हैं, उन्हें इसका दोहरा लाभ नहीं मिलेगा।सरकार का कहना है कि योजना पूरी तरह कैशलेस होगी और इलाज के समय जेब से पैसे नहीं देने होंगे।गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल शिक्षक दिवस पर इस योजना की घोषणा की थी,जिसे अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद हकीकत का रूप दे दिया गया है।सरकार का दावा है कि यह फैसला न सिर्फ शिक्षकों को राहत देगा,बल्कि शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करेगा।



