पश्चिम बंगाल I-PAC मामला: DGP राजीव कुमार की भूमिका पर ED की सुप्रीम कोर्ट में याचिका

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कानून के रखवाले…अब खुद कानून के कटघरे में….जिस पुलिस पर संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी है,उसी पर सबूत चोरी का आरोप…और आरोप लगाने वाली है देश की सबसे ताक़तवर जांच एजेंसी — ED….देश की सियासत और कानून व्यवस्था के टकराव में एक बार फिर पश्चिम बंगाल केंद्र में है…I-PAC रेड केस में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाते हुए…एक ऐसा आरोप लगाया है,जो सिर्फ किसी अफसर पर नहीं,बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है….ED ने सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल कर पश्चिम बंगाल के DGP राजीव कुमार को हटाने और कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निलंबित करने की मांग की है…आरोप सीधा है…गंभीर है…और लोकतंत्र की बुनियाद को हिला देने वाला है….ED का आरोप है कि राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मिलकर जांच में जानबूझकर बाधा डाली…और इतना ही नहीं,सबूतों की कथित चोरी में भी मदद की…ED के मुताबिक,एक परिसर में आपत्तिजनक और महत्वपूर्ण सामग्री मौजूद थी…स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी गई…लेकिन इसके बाद जो हुआ,वो कानून के इतिहास में एक खतरनाक मिसाल बन सकता है….

ED का दावा है कि सूचना मिलते ही DGP,मुख्यमंत्री,पुलिस कमिश्नर,और इलाके के DCPभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे…और फिर…बिना किसी कानूनी आदेश के उस सामग्री को उठा लिया गया….ED ने इसे सीधे-सीधे चोरी का अपराध बताया है….यानी आरोप सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का नहीं,बल्कि आपराधिक कृत्य का है….ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में बेहद सख्त शब्दों में अपनी बात रखी…उन्होंने कहा —राज्य के पुलिस अधिकारी अपने राजनीतिक मालिकों के साथ धरने पर बैठ गए…सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि ED के एक अधिकारी का मोबाइल फोन तक छीन लिया गया….उनके मुताबिक,यह सिर्फ एक घटना नहीं,बल्कि एक खतरनाक संदेश है….अगर ऐसा चलता रहा,तो केंद्रीय एजेंसियों का मनोबल टूट जाएगा….और राज्यों की फोर्सेज को लगेगा….कि राजनीतिक संरक्षण मेंवो कुछ भी कर सकती हैं….तुषार मेहता ने कहा कि अगर अदालत ने इस मामले में कड़ा आदेश नहीं दिया,तो कल कोई भी राज्य किसी भी केंद्रीय एजेंसी को काम करने से रोक सकता है….आज ED रोकी गई है,कल CBI होगी…और परसों कानून खुद…ED ने अपनी याचिका में DGP राजीव कुमार की भूमिका पर खासतौर पर सवाल उठाए हैं…..याचिका में कहा गया है कि राजीव कुमार जब कोलकाता के पुलिस कमिश्नर थे…तब वे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ धरने पर बैठे थे….ED का कहना है कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का इस तरह राजनीतिक विरोध प्रदर्शन में शामिल होना संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है…और इससे जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं….

अब जरा समझ लेते है कि कौन हैं डीजीपी राजीव कुमार

IPAC मामले में ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मांग की है कि राजीव कुमार को सस्पेंड किया जाये… डीजीपी राजीव कुमार की कार्यकाल 31 जनवरी को पूरा हो रहा है… 1989 बैच के आईपीएस ऑफिसर राजीव कुमार जुलाई 2024 में पश्चिम बंगाल के डीजीपी बने थे… इससे पहले लोकसभा चुनावों में उन्हें केंद्रीय चुनाव आयोग के आदेश पर हटाया गया था… वह पहली बार इस कुर्सी पर दिसंबर, 2023 में बैठे थे… आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के चंदौसी जिले से ताल्लुक रखने वाले राजीव कुमार पूर्व में कोलकाता पुलिस आयुक्त भी रह चुके हैं… वे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विश्वासपात्र अधिकारियों में गिने जाते हैं… आईआईटी रुड़की से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करने वाले राजीव कुमार बिधाननगर के आयुक्त के साथ एसटीएफ के चीफ भी रह चुके हैं… ऐसे में जब राजीव कुमार अब अपने कार्यकाल को 31 जनवरी को पूरा कर रहे हैं तब उनके उत्तराधिकारी की चर्चा शुरू हो गई है… चर्चा है कि ममता बनर्जी किसी नए आईपीएस को डीजीपी बना सकती है… राजीव कुमार 1988 बैच के आईपीएस मनोज मालवीय के रिटायर होने के बाद डीजीपी बने थे…

यह मामला सिर्फ कानून बनाम कानून नहीं,बल्कि केंद्र बनाम राज्य और एजेंसी बनाम सत्ता की टकराहट भी है….जहां केंद्र का आरोप है कि बंगाल सरकार जांच एजेंसियों को रोक रही है….वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताती रही है….“यह लड़ाई ED बनाम बंगाल नहीं,यह लड़ाई है…कानून बनाम ताकत की….

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